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सब्सडि पास करने की एवज में 15 हजार रुपये की रिश्वत लेता मत्स्य विभाग का अधिकारी रंगे हाथ काबू
Updated Sat, 27 Oct 2018 01:02 AM IST
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15 हजार रुपये रिश्वत लेता मत्स्य विभाग का अधिकारी काबू
अमर उजाला ब्यूरो
जींद। किसान की सब्सिडी पास करवाने की एवज में 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते मत्स्य विभाग के अधिकारी को विजिलेंस ने शुक्रवार को कोर्ट परिसर से रंगेहाथों काबू किया है। किसान ने दो अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी थी। दूसरा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिसकी वजह से वह बच गया। विजिलेंस टीम ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि दूसरे अधिकारी की भूमिका की जांच की जा रही है।
नरवाना के राजगढ़ गांव निवासी रविंद्र ने विजिलेंस की टीम को दी शिकायत में बताया कि वह पिछले दो वर्षों से दो एकड़ में तालाब बनाकर मछली पालन का कार्य कर रहा है। उसने तालाबों पर सब्सिडी के लिए मत्स्य पालन विभाग में आवेदन किया हुआ है। नरवाना में कार्यरत मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार व एक अन्य अधिकारी ने सब्सिडी पास करने की एवज में उससे 20 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। बाद में उनके बीच 15 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। रविंद्र ने इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग को दे दी। शुक्रवार को मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार ने रिश्वत की राशि लेने के लिए रविंद्र को फोन करके कोर्ट परिसर में बुला लिया। इसकी सूचना रविंद्र ने विजिलेंस को दे दी। जींद के तहसीलदार प्रवीण कुमार को इसमें ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर विजिलेंस के इंस्पेक्टर सतबीर सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर कर व लाल रंग का पाउडर लगाकर विजिलेंस की टीम ने 15 हजार के नोट रविंद्र को दे दिए। इसके बाद रविंद्र कोर्ट परिसर में मत्स्य अधिकारी द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंच गया। वहां पहले से मौजूद मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार को रविंद्र ने वह नोट थमा दिए। रविंद्र द्वारा इशारा मिलते ही विजिलेंस टीम ने राजेश कुमार को रंगे हाथों मौके पर ही काबू कर लिया।
40 प्रतिशत मिलता है अनुदान, किसान को मिलने थे सवा दो लाख रुपये
मत्स्य विभाग के सूत्रों के अनुसार किसान को मछली पालन की परियोजना पर 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है। वहीं एक हेक्टेयर पर करीब सात लाख रुपये खर्च आता है। इस हिसाब से दो एकड़ जमीन पर मछली पालन करने पर किसान को करीब सवा दो लाख रुपये का अनुदान मिलना था, जो विभाग द्वारा रोका गया था।
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दूसरा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचने के बचा
किसान रविंद्र ने विजिलेंस टीम को मत्स्य विभाग के दो अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी है। जब रविंद्र रिश्वत के पैसे मस्त्य अधिकारी को देने गया तो उस समय दूसरा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस कारण वह बच गया। विजिलेंस इंस्पेक्टर सतबीर ने कहा कि दूसरे अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जा रही। यदि उसकी भी इस मामले में संलिप्तता पाई गई तो उसके खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा।
सतबीर सिंह, निरीक्षक विजिलेंस।
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अमर उजाला ब्यूरो
जींद। किसान की सब्सिडी पास करवाने की एवज में 15 हजार रुपये की रिश्वत लेते मत्स्य विभाग के अधिकारी को विजिलेंस ने शुक्रवार को कोर्ट परिसर से रंगेहाथों काबू किया है। किसान ने दो अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी थी। दूसरा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिसकी वजह से वह बच गया। विजिलेंस टीम ने आरोपी अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, जबकि दूसरे अधिकारी की भूमिका की जांच की जा रही है।
नरवाना के राजगढ़ गांव निवासी रविंद्र ने विजिलेंस की टीम को दी शिकायत में बताया कि वह पिछले दो वर्षों से दो एकड़ में तालाब बनाकर मछली पालन का कार्य कर रहा है। उसने तालाबों पर सब्सिडी के लिए मत्स्य पालन विभाग में आवेदन किया हुआ है। नरवाना में कार्यरत मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार व एक अन्य अधिकारी ने सब्सिडी पास करने की एवज में उससे 20 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। बाद में उनके बीच 15 हजार रुपये में सौदा तय हो गया। रविंद्र ने इसकी शिकायत विजिलेंस विभाग को दे दी। शुक्रवार को मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार ने रिश्वत की राशि लेने के लिए रविंद्र को फोन करके कोर्ट परिसर में बुला लिया। इसकी सूचना रविंद्र ने विजिलेंस को दे दी। जींद के तहसीलदार प्रवीण कुमार को इसमें ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त कर विजिलेंस के इंस्पेक्टर सतबीर सिंह के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया। ड्यूटी मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर कर व लाल रंग का पाउडर लगाकर विजिलेंस की टीम ने 15 हजार के नोट रविंद्र को दे दिए। इसके बाद रविंद्र कोर्ट परिसर में मत्स्य अधिकारी द्वारा बताए गए स्थान पर पहुंच गया। वहां पहले से मौजूद मत्स्य अधिकारी राजेश कुमार को रविंद्र ने वह नोट थमा दिए। रविंद्र द्वारा इशारा मिलते ही विजिलेंस टीम ने राजेश कुमार को रंगे हाथों मौके पर ही काबू कर लिया।
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40 प्रतिशत मिलता है अनुदान, किसान को मिलने थे सवा दो लाख रुपये
मत्स्य विभाग के सूत्रों के अनुसार किसान को मछली पालन की परियोजना पर 40 प्रतिशत अनुदान मिलता है। वहीं एक हेक्टेयर पर करीब सात लाख रुपये खर्च आता है। इस हिसाब से दो एकड़ जमीन पर मछली पालन करने पर किसान को करीब सवा दो लाख रुपये का अनुदान मिलना था, जो विभाग द्वारा रोका गया था।
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दूसरा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचने के बचा
किसान रविंद्र ने विजिलेंस टीम को मत्स्य विभाग के दो अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दी है। जब रविंद्र रिश्वत के पैसे मस्त्य अधिकारी को देने गया तो उस समय दूसरा अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। इस कारण वह बच गया। विजिलेंस इंस्पेक्टर सतबीर ने कहा कि दूसरे अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जा रही। यदि उसकी भी इस मामले में संलिप्तता पाई गई तो उसके खिलाफ भी मामला दर्ज किया जाएगा।
सतबीर सिंह, निरीक्षक विजिलेंस।