{"_id":"6101b3238ebc3e583b17788c","slug":"jhajjar-bahadurgarh-news-deepak-poonia-s-training-from-grass-root-is-getting-success-bahadurgarh-news-rtk619268968","type":"story","status":"publish","title_hn":"ग्रास रूट से मिला प्रशिक्षण दीपक पूनिया को दिलवा रहा है सफलता","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ग्रास रूट से मिला प्रशिक्षण दीपक पूनिया को दिलवा रहा है सफलता
विज्ञापन
माता-पिता के साथ दीपक। फाइल फोटो
- फोटो : Bahadurgarh
टोक्यो ओलंपिक में देश को पदक दिलाने के लिए दुनिया के नामी पहलवानों से भिड़ने के लिए तैयार ग्रास रूट से बेहतरीन प्रशिक्षण पाने वाला गांव छारा का बेटा दीपक पूनिया किसी बड़ी कुश्ती प्रतियोगिता से खाली हाथ नहीं लौटता। इसी आधार पर उसके प्रशंसक ये मान रहे हैं कि दीपक ओलंपिक से देश के लिए पदक जरूर लेकर आएगा।
गांव छारा निवासी दीपक पूनिया अपने ही गांव के लाला दीवानचंद योग एवं कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र से निकला हुआ पहलवान है। उसे एक विश्व स्तरीय पहलवान के रूप में उसके गुरु एनआईएस कोच आर्य वीरेंद्र ने तराशा। दीपक जब पांच साल का था तभी उसके पिता सुभाष ने उसे पहलवान वीरेंद्र के हवाले कर दिया। वीरेंद्र से पांच साल तक कड़ा प्रशिक्षण लेने पर मिली उपलब्धियों के आधार पर वर्ष 2007 में दीपक को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने गोद ले लिया और 2018 तक साई से प्रशिक्षण लेता रहा। फिलहाल वह सेना में सूबेदार है और अधिकतर समय कैंपों में अभ्यासरत रहता है।
खाली नहीं लौटता कभी
दीपक वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मैदान में उतरा। पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई चैंपियनशिप खेलने गया और विश्व कैडेट चैंपियन बनकर लौटा। विश्व कैडेट के बाद दीपक ने मुड़कर नहीं देखा। लगातार अनुशासन में रहकर कड़ा परिश्रम करता रहा। करीब 22 साल का यह ग्रामीण लड़का किसी बड़ी कुश्ती प्रतियोगिता से खाली हाथ नहीं लौटा। खुद की तुलना में तगड़े पहलवान को भी गिरा देता है। इसलिए उसको ओलंपिक के लिए अभ्यास कराने के लिए पिछले दिनों पोलैंड में पहलवान नहीं मिले तो रूस भेजा गया। चार दिन पहले 24 जुलाई को ही दीपक को इमर्जिंग स्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। इससे भी उसका उत्साह बढ़ा है।
विज्ञापन
इन देशों के पहलवानों से भिड़ेगा
दीपक के मुकाबले टोक्यो में 15 देशों के 86 किलोग्राम भार वर्ग (फ्री स्टाइल) के पहलवानों से होंगे। ये मुकाबले 4 व 5 अगस्त को होंगे। ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए दीपक को ईरान, स्विट्जरलैंड, रूस, कोलंबिया, अमेरिका, अमेरिका-2, पेरू, बेलारूस, तुर्की, नाइजीरिया, अल्जीरिया, उज्बेकिस्तान, चीन, जापान व स्लोवाकिया के पहलवानों के साथ भिड़ना होगा।
बेहद साधारण घर का बेटा
19 मई 1999 को जन्मा दीपक बहुत साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। उसको श्रेष्ठ पहलवान बनाने व परिवार के गुजारे के लिए उसके पिता सुभाष घर-घर दूध बेचकर गुजारा करते। उसकी मां कृष्णा तो पिता से भी अधिक मेहनत करती। पिछले साल दीपक की मां की बीमारी से मृत्यु हो गई थी। उसके कुछ दिन बाद दादी भी चल बसी। परिवार में बने इस हालात का दीपक की कुश्ती पर भी असर पड़ा। पर वह संभल गया और फिर मैट पर धमक गया।
ये हैं दीपक पूनिया की मुख्य उपलब्धियां
कांस्य पदक एशियन चैंपियनशिप, 2020
रजत पदक विश्व चैंपियनशिप, 2019
स्वर्ण जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2019
कांस्य एशियन चैंपियनशिप, 2019
रजत जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2018
स्वर्ण विश्व कैडेट चैंपियनशिप, 2016
वर्जन
दीपक को विश्व स्तरीय पहलवान बनाने के लिए मैंने और उसकी मां ने वर्षों तक तपस्या की है। मैं अपने गांव से करीब 60 किलोमीटर दूर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में दीपक को हर रोज दूध पहुंचाकर आता था। यह सिलसिला छह साल से अधिक चला, लेकिन मलाल इस बात है कि बेटे के ओलंपिक में जाने से पहले ही उसकी मां कृष्णा का बीमारी की वजह से निधन हो गया। वह बेटे की बड़ी उपलब्धि नहीं देख पाई।
- सुभाष पूनिया, पहलवान दीपक के पिता
वर्जन
मेरे प्रिय शिष्य रहे दीपक मेें साहस और देशभक्ति कूट-कूटकर भरी हुई है। वह अनुशासित पहलवान है। उसने बचपन से ही करीब 10 साल तक मेरे अखाड़े में कड़ी मेहनत की। हमें पूर्ण विश्वास है कि वह अपने देश के लिए टोक्यो ओलंपिक से मेडल अवश्य जीतकर लाएगा।
- आर्य वीरेंद्र पहलवान, दीपक पूनिया के गुरु
विज्ञापन
गांव छारा निवासी दीपक पूनिया अपने ही गांव के लाला दीवानचंद योग एवं कुश्ती प्रशिक्षण केंद्र से निकला हुआ पहलवान है। उसे एक विश्व स्तरीय पहलवान के रूप में उसके गुरु एनआईएस कोच आर्य वीरेंद्र ने तराशा। दीपक जब पांच साल का था तभी उसके पिता सुभाष ने उसे पहलवान वीरेंद्र के हवाले कर दिया। वीरेंद्र से पांच साल तक कड़ा प्रशिक्षण लेने पर मिली उपलब्धियों के आधार पर वर्ष 2007 में दीपक को भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) ने गोद ले लिया और 2018 तक साई से प्रशिक्षण लेता रहा। फिलहाल वह सेना में सूबेदार है और अधिकतर समय कैंपों में अभ्यासरत रहता है।
विज्ञापन
खाली नहीं लौटता कभी
दीपक वर्ष 2016 में अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मैदान में उतरा। पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई चैंपियनशिप खेलने गया और विश्व कैडेट चैंपियन बनकर लौटा। विश्व कैडेट के बाद दीपक ने मुड़कर नहीं देखा। लगातार अनुशासन में रहकर कड़ा परिश्रम करता रहा। करीब 22 साल का यह ग्रामीण लड़का किसी बड़ी कुश्ती प्रतियोगिता से खाली हाथ नहीं लौटा। खुद की तुलना में तगड़े पहलवान को भी गिरा देता है। इसलिए उसको ओलंपिक के लिए अभ्यास कराने के लिए पिछले दिनों पोलैंड में पहलवान नहीं मिले तो रूस भेजा गया। चार दिन पहले 24 जुलाई को ही दीपक को इमर्जिंग स्पोर्ट्समैन ऑफ द ईयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। इससे भी उसका उत्साह बढ़ा है।
विज्ञापन
इन देशों के पहलवानों से भिड़ेगा
दीपक के मुकाबले टोक्यो में 15 देशों के 86 किलोग्राम भार वर्ग (फ्री स्टाइल) के पहलवानों से होंगे। ये मुकाबले 4 व 5 अगस्त को होंगे। ओलंपिक में मेडल जीतने के लिए दीपक को ईरान, स्विट्जरलैंड, रूस, कोलंबिया, अमेरिका, अमेरिका-2, पेरू, बेलारूस, तुर्की, नाइजीरिया, अल्जीरिया, उज्बेकिस्तान, चीन, जापान व स्लोवाकिया के पहलवानों के साथ भिड़ना होगा।
बेहद साधारण घर का बेटा
19 मई 1999 को जन्मा दीपक बहुत साधारण परिवार से ताल्लुक रखता है। उसको श्रेष्ठ पहलवान बनाने व परिवार के गुजारे के लिए उसके पिता सुभाष घर-घर दूध बेचकर गुजारा करते। उसकी मां कृष्णा तो पिता से भी अधिक मेहनत करती। पिछले साल दीपक की मां की बीमारी से मृत्यु हो गई थी। उसके कुछ दिन बाद दादी भी चल बसी। परिवार में बने इस हालात का दीपक की कुश्ती पर भी असर पड़ा। पर वह संभल गया और फिर मैट पर धमक गया।
ये हैं दीपक पूनिया की मुख्य उपलब्धियां
कांस्य पदक एशियन चैंपियनशिप, 2020
रजत पदक विश्व चैंपियनशिप, 2019
स्वर्ण जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2019
कांस्य एशियन चैंपियनशिप, 2019
रजत जूनियर विश्व चैंपियनशिप, 2018
स्वर्ण विश्व कैडेट चैंपियनशिप, 2016
वर्जन
दीपक को विश्व स्तरीय पहलवान बनाने के लिए मैंने और उसकी मां ने वर्षों तक तपस्या की है। मैं अपने गांव से करीब 60 किलोमीटर दूर दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में दीपक को हर रोज दूध पहुंचाकर आता था। यह सिलसिला छह साल से अधिक चला, लेकिन मलाल इस बात है कि बेटे के ओलंपिक में जाने से पहले ही उसकी मां कृष्णा का बीमारी की वजह से निधन हो गया। वह बेटे की बड़ी उपलब्धि नहीं देख पाई।
- सुभाष पूनिया, पहलवान दीपक के पिता
वर्जन
मेरे प्रिय शिष्य रहे दीपक मेें साहस और देशभक्ति कूट-कूटकर भरी हुई है। वह अनुशासित पहलवान है। उसने बचपन से ही करीब 10 साल तक मेरे अखाड़े में कड़ी मेहनत की। हमें पूर्ण विश्वास है कि वह अपने देश के लिए टोक्यो ओलंपिक से मेडल अवश्य जीतकर लाएगा।
- आर्य वीरेंद्र पहलवान, दीपक पूनिया के गुरु