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दशलक्षण पर्व : पांचवें दिन जैन मंदिरों में हुई उत्तम सत्य धर्म की पूजा
Sun, 20 Sep 2026 07:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 20 Sep 2026 07:40 PM IST
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-फोटो-68 : जैन मंदिर में उत्तम सत्य धर्म की पूजा करती महिलाएं। स्रोत समाज
संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़। विश्व शांति और कल्याण के महापर्व पर्यूषण दशलक्षण पर्व का 5वां दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया। श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में इस अवसर पर विशेष पूजा अर्चना की गई। पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक भी मनाया गया।
इस दिन पुष्पदंत भगवान और पार्श्वनाथ भगवान की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने 108 अर्घ्य समर्पित किए। बताया गया कि सत्य पर अटल रहना ही साधक का गुण है। ईश्वर को अंतिम सत्य मानना ही उत्तम सत्य है। दीप विधान का पाठ भी किया गया।
जैन समाज प्रधान सुनील जैन ने सत्य धर्म का अर्थ समझाया। उन्होंने बताया कि क्षमा, मार्दव, आर्जव और शौच आत्मा का स्वभाव हैं। सत्य, संयम, तप और त्याग आत्मिक गुणों को प्रकट करने के साधन हैं। जैन शास्त्रों में सत्य का अर्थ हितकारी, मित और प्रिय वचन बोलना है। जिन वचनों से किसी जीव का अहित हो या जो कड़वे हों, वे सत्य होते हुए भी असत्य माने जाते हैं।
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बहादुरगढ़। विश्व शांति और कल्याण के महापर्व पर्यूषण दशलक्षण पर्व का 5वां दिन उत्तम सत्य धर्म के रूप में मनाया गया। श्री पद्म प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में इस अवसर पर विशेष पूजा अर्चना की गई। पुष्पदंत भगवान का मोक्ष कल्याणक भी मनाया गया।
इस दिन पुष्पदंत भगवान और पार्श्वनाथ भगवान की पूजा की गई। श्रद्धालुओं ने 108 अर्घ्य समर्पित किए। बताया गया कि सत्य पर अटल रहना ही साधक का गुण है। ईश्वर को अंतिम सत्य मानना ही उत्तम सत्य है। दीप विधान का पाठ भी किया गया।
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जैन समाज प्रधान सुनील जैन ने सत्य धर्म का अर्थ समझाया। उन्होंने बताया कि क्षमा, मार्दव, आर्जव और शौच आत्मा का स्वभाव हैं। सत्य, संयम, तप और त्याग आत्मिक गुणों को प्रकट करने के साधन हैं। जैन शास्त्रों में सत्य का अर्थ हितकारी, मित और प्रिय वचन बोलना है। जिन वचनों से किसी जीव का अहित हो या जो कड़वे हों, वे सत्य होते हुए भी असत्य माने जाते हैं।
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