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गांव में आते ही सबसे पहले नित्यानंद महाराज का आशीर्वाद लेगा बजरंग
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बजरंग पूनिया की जीत पर गांव खुडन में मिठाई बांटते ग्रामीण। संवाद
- फोटो : Jhjhar
बजरंग पहलवान की मेहनत में कोई कमी नहीं की केवल भाग्य की कमी के कारण वह गोल्ड से चूक गए, लेकिन कांस्य पदक जीतकर उन्होंने गांव का ही नहीं बल्कि पूरे देश का नाम रोशन कर दिया है। आज पूरा देश में पर गर्व कर रहा है। अब बजरंग पहलवान की इस उपलब्धि पर सरकार ने भी गांव में इंडौर स्टेडियम की घोषणा की है।
ग्रामीणों का कहना है कि अब पहलवानों को एक स्थान पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो एक नहीं अनेक बजरंग गांव से निकलेंगे। आज हमारे पास एक बजरंग है अब खेल सुविधाएं गांव में ही मुहैया होंगी तो उनसे प्रेरित होकर अनेक बजरंग गांव व क्षेत्र का नाम विश्व पटल पर रोशन करते रहेंगे। पहलवान तो पहले भी अनेक हुए हैं लेकिन बजरंग जैसा पहलवान होना देश के लिए भी गौरव की बात है। आज गांव का बच्चा, युवा व बुजुर्ग हर व्यक्ति बजरंग पहलवान पर गर्व कर रहा है। ग्रामीणों का ही नहीं बल्कि प्रदेश वासियों का भी सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। पूर्व चेयरमैन प्रदीप कुमार का कहना है कि बजरंग से स्वदेश लौटने के बारे में रात को बात होगी। उसके अनुसार ही उनके स्वागत की तैयारी की जाएगी।
गांव में आते ही सबसे पहले नित्यानंद महाराज का लेगा आशीर्वाद
बजरंग पहलवान के पिता बलवान सिंह पूनिया का कहना है जिस दिन बजरंग पहलवान स्वदेश लौटने के बाद गांव में पहुंचेगा उस दिन सबसे पहले गांव के इष्ट देव बाबा नित्यानंद महाराज के मंदिर में जाकर उनसे आशीर्वाद लेगा। उन्होंने कहा कि बजरंग सात साल का था, उस समय से ही पहलवानी के लक्षण होने के कारण उन्होंने काफी मेहनत कर अखाड़ों में रखा और उसे पहलवानी के गुर सिखाए। आज उनकी मेहनत सफल हो गई है। बजरंग ने अवॉर्ड व पदक तो अनेक प्राप्त किए हैं, लेकिन ओलंपिक के पदक की चमक तो अलग ही है। बजरंग उनका ही नहीं बल्कि पूरे देश का बेटा है और आज इस उपलब्धि पर पूरा देश गर्व कर रहा है।
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ग्रामीणों का कहना है कि अब पहलवानों को एक स्थान पर बेहतर सुविधाएं मिलेंगी तो एक नहीं अनेक बजरंग गांव से निकलेंगे। आज हमारे पास एक बजरंग है अब खेल सुविधाएं गांव में ही मुहैया होंगी तो उनसे प्रेरित होकर अनेक बजरंग गांव व क्षेत्र का नाम विश्व पटल पर रोशन करते रहेंगे। पहलवान तो पहले भी अनेक हुए हैं लेकिन बजरंग जैसा पहलवान होना देश के लिए भी गौरव की बात है। आज गांव का बच्चा, युवा व बुजुर्ग हर व्यक्ति बजरंग पहलवान पर गर्व कर रहा है। ग्रामीणों का ही नहीं बल्कि प्रदेश वासियों का भी सीना गर्व से चौड़ा कर दिया है। पूर्व चेयरमैन प्रदीप कुमार का कहना है कि बजरंग से स्वदेश लौटने के बारे में रात को बात होगी। उसके अनुसार ही उनके स्वागत की तैयारी की जाएगी।
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गांव में आते ही सबसे पहले नित्यानंद महाराज का लेगा आशीर्वाद
बजरंग पहलवान के पिता बलवान सिंह पूनिया का कहना है जिस दिन बजरंग पहलवान स्वदेश लौटने के बाद गांव में पहुंचेगा उस दिन सबसे पहले गांव के इष्ट देव बाबा नित्यानंद महाराज के मंदिर में जाकर उनसे आशीर्वाद लेगा। उन्होंने कहा कि बजरंग सात साल का था, उस समय से ही पहलवानी के लक्षण होने के कारण उन्होंने काफी मेहनत कर अखाड़ों में रखा और उसे पहलवानी के गुर सिखाए। आज उनकी मेहनत सफल हो गई है। बजरंग ने अवॉर्ड व पदक तो अनेक प्राप्त किए हैं, लेकिन ओलंपिक के पदक की चमक तो अलग ही है। बजरंग उनका ही नहीं बल्कि पूरे देश का बेटा है और आज इस उपलब्धि पर पूरा देश गर्व कर रहा है।
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