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बेटे के मृत शरीर के दर्शन नहीं कर पाई मां, पत्नी को लगा मां के पास है संदीप
Updated Sat, 06 Oct 2018 02:05 AM IST
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बहादुरगढ़। रोहतक-दिल्ली रेलवे ट्रैक पर परनाला फाटक के नजदीक गत 16 सितंबर को ट्रेन की चपेट में आकर मौत का शिकार हुए युवक के शव की शिनाख्त हो गई है। 19वें दिन परिजन जीआरपी में पहुंचे तो उन्हें संदीप की मौत का समाचार मिला। संदीप के मृतक शव को भी न देख पाने के कारण परिजन परेशान रहे।
गत 16 सितंबर की शाम को परनाला फाटक के नजदीक ट्रेन की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई थी। इस दौरान युवक के कपड़ों से कुछ ऐसा नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके। शव तीन दिन तक नागरिक अस्पताल के शवगृह में रहा, लेकिन परिजन अस्पताल तक नहीं पहुंचे। शव की शिनाख्त के लिए पुलिस ने भी हर संभव प्रयास किए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हादसे के 19वें दिन शुक्रवार को परिजन थाने में पहुंचे तो संदीप की मौत का पता चला।
मां कबीर बस्ती में रहती है और पत्नी टोहाना में रहती है। संदीप कभी अपनी मां के पास रहता तो कभी अपनी पत्नी के पास टोहाना में रहता था। सितंबर माह में वह कबीर बस्ती में अपनी मां बिमला के यहां ठहरा हुआ था। वह कबाड़ का काम करता था। 16 सितंबर को भी इसी सिलसिले में घर से निकला। शाम को वह परनाला फाटक पर गाड़ी की चपेट में आ गया। इधर, मां सोचती रही कि संदीप अपनी पत्नी के पास टोहाना गया होगा उधर पत्नी सोचती रही कि वह अपनी मां के पास है। एक दिन जब फोन पर बात हुई तो पता चला कि संदीप गायब है। संदीप को लापता मानकर परिजन उसे लगातार ढूंढते रहे। शुक्रवार को परिजन तलाश करते हुए जीआरपी थाने में पहुंचे और पुलिस कर्मियों से बातचीत की। पुलिस ने सितंबर माह में रेलवे ट्रेक पर हुए हादसे के दौरान मृत लोगों के फोटो और कपड़े दिखाए तो परिजनों ने शव की शिनाख्त की। इसके बाद तो थाना परिसर में काफी लोग एकत्र हो गए। मृतक की पत्नी किरण व मां बिमला की आंखें नम थीं। तीन मासूम भी अपने पिता संदीप (25) के शव के अंतिम दर्शन नहीं कर पाए।
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किए थे प्रयास
जांच अधिकारी एएसआई बलराम ने कहा कि मृतक के शव की पहचान के लिए हर संभव प्रयास किए गए थे। तमाम चौकी थानों में सूचना जारी की गई और यहां की कई कॉलोनियों में भी लोगों से पूछताछ की थी। पता न चलने पर 72 घंटे बाद शव का दाह संस्कार कराया गया था।
यहां मिल जाएंगी अस्थियां
शव का दाह संस्कार करने वाली मोक्ष सेवा समिति के प्रमुख रिंकू चुघ ने कहा कि उनके पास शव की अस्थियां हैं। दाह संस्कार करने के बाद वे कुछ दिनों तक अस्थियां रखते हैं ताकि उन्हें परिजनों तक पहुंचा सके। परिजन आते हैं तो उन्हें अस्थियां दे दी जाएगी।
गत 16 सितंबर की शाम को परनाला फाटक के नजदीक ट्रेन की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई थी। इस दौरान युवक के कपड़ों से कुछ ऐसा नहीं मिला, जिससे उसकी पहचान हो सके। शव तीन दिन तक नागरिक अस्पताल के शवगृह में रहा, लेकिन परिजन अस्पताल तक नहीं पहुंचे। शव की शिनाख्त के लिए पुलिस ने भी हर संभव प्रयास किए लेकिन कामयाबी नहीं मिली। हादसे के 19वें दिन शुक्रवार को परिजन थाने में पहुंचे तो संदीप की मौत का पता चला।
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मां कबीर बस्ती में रहती है और पत्नी टोहाना में रहती है। संदीप कभी अपनी मां के पास रहता तो कभी अपनी पत्नी के पास टोहाना में रहता था। सितंबर माह में वह कबीर बस्ती में अपनी मां बिमला के यहां ठहरा हुआ था। वह कबाड़ का काम करता था। 16 सितंबर को भी इसी सिलसिले में घर से निकला। शाम को वह परनाला फाटक पर गाड़ी की चपेट में आ गया। इधर, मां सोचती रही कि संदीप अपनी पत्नी के पास टोहाना गया होगा उधर पत्नी सोचती रही कि वह अपनी मां के पास है। एक दिन जब फोन पर बात हुई तो पता चला कि संदीप गायब है। संदीप को लापता मानकर परिजन उसे लगातार ढूंढते रहे। शुक्रवार को परिजन तलाश करते हुए जीआरपी थाने में पहुंचे और पुलिस कर्मियों से बातचीत की। पुलिस ने सितंबर माह में रेलवे ट्रेक पर हुए हादसे के दौरान मृत लोगों के फोटो और कपड़े दिखाए तो परिजनों ने शव की शिनाख्त की। इसके बाद तो थाना परिसर में काफी लोग एकत्र हो गए। मृतक की पत्नी किरण व मां बिमला की आंखें नम थीं। तीन मासूम भी अपने पिता संदीप (25) के शव के अंतिम दर्शन नहीं कर पाए।
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किए थे प्रयास
जांच अधिकारी एएसआई बलराम ने कहा कि मृतक के शव की पहचान के लिए हर संभव प्रयास किए गए थे। तमाम चौकी थानों में सूचना जारी की गई और यहां की कई कॉलोनियों में भी लोगों से पूछताछ की थी। पता न चलने पर 72 घंटे बाद शव का दाह संस्कार कराया गया था।
यहां मिल जाएंगी अस्थियां
शव का दाह संस्कार करने वाली मोक्ष सेवा समिति के प्रमुख रिंकू चुघ ने कहा कि उनके पास शव की अस्थियां हैं। दाह संस्कार करने के बाद वे कुछ दिनों तक अस्थियां रखते हैं ताकि उन्हें परिजनों तक पहुंचा सके। परिजन आते हैं तो उन्हें अस्थियां दे दी जाएगी।