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जांच में खुलासा: अस्पताल के पास नहीं फायर एनओसी
Updated Tue, 03 Apr 2018 02:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
सामान्य अस्पताल में आग लगने जैसी घटना होने पर किस तरह के प्रबंध हैं, इसकी परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। अस्पताल में इस समय आग लगने पर आग से बचाव का कोई साधन उपलब्ध नहीं हैं। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में यह मामला उठाया तो एसडीएम ने मामले की जांच फायर ऑफिसर को सौंपी। फायर ऑफिसर ने सामान्य अस्पताल का निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल के पास फायर सेफ्टी एनओसी भी नहीं है।
गौर करने वाली बात यह है कि अस्पताल के नए भवन में ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी सेवाएं, ऑपरेशन थियेटर 14 जनवरी 2012 से शुरू हो गए थे। अस्पताल प्रबंधन छह साल तक भी एनओसी के लिए आवेदन नहीं कर पाए। इसके अलावा चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में 16 फायर इंस्टींगर भवन में लगे हैं। लेकिन निरीक्षण में पाया कि भवन में केवल नौ फायर इंस्टींगर लगे हुए हैं। वो भी तीन साल पूर्व एक्सपायर हो चुके हैं। उन्हें रिफिल तक नहीं कराया गया।
33 लाख का बजट, फिर भी नक्शा तक तैयार नहीं
अमर उजाला ने जब मामले की पड़ताल गहनता से की तो सामने आया कि अस्पताल के खाते में 33 लाख रुपये का बजट फायर हाईड्रेंट सिस्टम को तैयार करने लिए काफी समय से आया हुआ है। लेकिन एसएमओ ने कभी इसे जरूरी नहीं समझा। फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगवाने के लिए नक्शा तक तैयार नहीं कराया गया। अब अस्पताल प्रबंधन इसका नक्शा तैयार करवाने की बात कह रहा है। भवन में फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगने के बाद ही दमकल विभाग फायर सेफ्टी एनओसी जारी करेगा।
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60 की जरूरत, नौ से चल रहा काम
अस्पताल के भवन को देखते हुए दमकल विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि भवन में कम से कम 60 फायर इंस्टींगर की आवश्यकता है। जबकि भवन में केवल नौ फायर इंस्टींगर लगाए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के द्वारा अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर भी फायर इंस्टींगर नहीं लगाया गया। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के द्वारा मामले में बड़े पैमाने पर बरती गई लापरवाही सामने आ रही है।
वर्जन
फायर ऑफिसर बिजेंद्र डागर ने ने बताया कि उन्होंने सोमवार को एसडीएम के आदेश पर अस्पताल का निरीक्षण किया था। जिसमें पाया कि अस्पताल में हाईड्रेंट सिस्टम नहीं लगाया, जिसकी वजह से उन्हें एनओसी जारी नहीं की गई। अस्पताल में केवल नौ फायर इंस्टींगर लगे मिले। जोकि एक्सपायर डेट के हैं, इसलिए उन्हें रिफिल करवाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगवाने के भी निर्देश दिए हैं। पूरे मामले की रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी जाएगी।
वर्जन
एक अप्रैल को ही कार्यकारी एसएमओ का चार्ज संभाला है। जानकारी मिलते ही फायर हाईड्रेंट सिस्टम का नक्शा बनवाने के आदेश दे दिए हैं। नक्शा तैयार होते ही ई-टेंडर से ठेका छोड़ा जाएगा। फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगने पर दमकल विभाग से एनओसी ली भी जाएगी।
- संजय सचदेवा, कार्यकारी एसएमओ, झज्जर।
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झज्जर।
सामान्य अस्पताल में आग लगने जैसी घटना होने पर किस तरह के प्रबंध हैं, इसकी परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। अस्पताल में इस समय आग लगने पर आग से बचाव का कोई साधन उपलब्ध नहीं हैं। अमर उजाला ने सोमवार के अंक में यह मामला उठाया तो एसडीएम ने मामले की जांच फायर ऑफिसर को सौंपी। फायर ऑफिसर ने सामान्य अस्पताल का निरीक्षण किया तो पाया कि अस्पताल के पास फायर सेफ्टी एनओसी भी नहीं है।
गौर करने वाली बात यह है कि अस्पताल के नए भवन में ओपीडी, वार्ड, इमरजेंसी सेवाएं, ऑपरेशन थियेटर 14 जनवरी 2012 से शुरू हो गए थे। अस्पताल प्रबंधन छह साल तक भी एनओसी के लिए आवेदन नहीं कर पाए। इसके अलावा चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि अस्पताल के रिकॉर्ड में 16 फायर इंस्टींगर भवन में लगे हैं। लेकिन निरीक्षण में पाया कि भवन में केवल नौ फायर इंस्टींगर लगे हुए हैं। वो भी तीन साल पूर्व एक्सपायर हो चुके हैं। उन्हें रिफिल तक नहीं कराया गया।
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33 लाख का बजट, फिर भी नक्शा तक तैयार नहीं
अमर उजाला ने जब मामले की पड़ताल गहनता से की तो सामने आया कि अस्पताल के खाते में 33 लाख रुपये का बजट फायर हाईड्रेंट सिस्टम को तैयार करने लिए काफी समय से आया हुआ है। लेकिन एसएमओ ने कभी इसे जरूरी नहीं समझा। फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगवाने के लिए नक्शा तक तैयार नहीं कराया गया। अब अस्पताल प्रबंधन इसका नक्शा तैयार करवाने की बात कह रहा है। भवन में फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगने के बाद ही दमकल विभाग फायर सेफ्टी एनओसी जारी करेगा।
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60 की जरूरत, नौ से चल रहा काम
अस्पताल के भवन को देखते हुए दमकल विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि भवन में कम से कम 60 फायर इंस्टींगर की आवश्यकता है। जबकि भवन में केवल नौ फायर इंस्टींगर लगाए गए हैं। अस्पताल प्रबंधन के द्वारा अल्ट्रासाउंड केंद्र के बाहर भी फायर इंस्टींगर नहीं लगाया गया। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन के द्वारा मामले में बड़े पैमाने पर बरती गई लापरवाही सामने आ रही है।
वर्जन
फायर ऑफिसर बिजेंद्र डागर ने ने बताया कि उन्होंने सोमवार को एसडीएम के आदेश पर अस्पताल का निरीक्षण किया था। जिसमें पाया कि अस्पताल में हाईड्रेंट सिस्टम नहीं लगाया, जिसकी वजह से उन्हें एनओसी जारी नहीं की गई। अस्पताल में केवल नौ फायर इंस्टींगर लगे मिले। जोकि एक्सपायर डेट के हैं, इसलिए उन्हें रिफिल करवाने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगवाने के भी निर्देश दिए हैं। पूरे मामले की रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी जाएगी।
वर्जन
एक अप्रैल को ही कार्यकारी एसएमओ का चार्ज संभाला है। जानकारी मिलते ही फायर हाईड्रेंट सिस्टम का नक्शा बनवाने के आदेश दे दिए हैं। नक्शा तैयार होते ही ई-टेंडर से ठेका छोड़ा जाएगा। फायर हाईड्रेंट सिस्टम लगने पर दमकल विभाग से एनओसी ली भी जाएगी।
- संजय सचदेवा, कार्यकारी एसएमओ, झज्जर।