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एससीएसटी एक्ट में पुन: बहाली को लेकर सड़कों पर उतरे लोग
Updated Tue, 03 Apr 2018 02:12 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
एससी-एसटी एक्ट में पुन: बहाल करने को लेकर समाज के काफी लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी मांग पुरजोर तरीके से उठाई। शहर के लाइनपार क्षेत्र से प्रदर्शन शुरू होकर शहर के विभिन्न हिस्सों से होता हुआ लघु सचिवालय परिसर पहुंचा। इस दौरान शहर में भारी पुलिस बल की तैनाती रही। प्रदर्शन के साथ पुलिस बल भी चलता रहा। ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। दलित समुदाय के लोगों ने एसडीएम कार्यालय में पहुंचकर राष्ट्रपति के नामित एक ज्ञापन भी सौंपा गया।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से पिछले दिनों दिए गए फैसले को लेकर एससीएसटी वर्ग से जुड़े लोग सोमवार रेलवे लाइनपार क्षेत्र में एकत्रित हुए। उसके बाद लघु सचिवालय की तरफ रुख किया। रेलवे रोड व दिल्ली रोड से होते हुए नजफगढ़ रोड के रास्ते प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय पहुंचे। यहां पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान कई जगह अनुसूचित समाज के लोगों ने सड़कों पर बैठकर विरोध जताया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे यातायात भी अवरुद्ध हुआ। प्रदर्शनकारियों की भीड़ का नेतृत्व कई संगठनों के पदाधिकारियों ने किया।
प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में भारतीय बौद्ध महासभा के प्रदेश संगठन सचिव फौजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के तहत अब अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत अब सीधे एफआईआर नहीं की जा सकेगी और न ही गिरफ्तारी हो सकेगी। किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उस कर्मचारी के नियुक्ति अधिकारी द्वारा पहले विभागीय जांच की जाएगी और बाद में मामले को पुलिस व कोर्ट के पास भेजा जाएगा।
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पूर्व में ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट को अग्रिम जमानत देने का प्रावधान नहीं था और एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी का प्रावधान था। यही परिभाषा इस कानून की आत्मा थी लेकिन अब कोर्ट के फैसले के बाद यह कानून मृत प्राय: हो गया है। यह तथ्य छिपा नहीं है कि अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं। ऐसे में यदि कानून ही कमजोर हो जाएगा तो गरीब व कमजोर तबके को न्याय कैसे मिलेगा। फौजी ने कहा कि आज जरूरत तो गरीब व कमजोर वर्ग पर अत्याचार रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की है और सरकार की अनदेखी व गलत मंशा के चलते कानून ही कमजोर हो रहे हैं। इस प्रदर्शन में गुरु रविदास सभा, बाबा साहेब डाक्टर भीमराव अंबेडकर सभा, डाक्टर अंबेडकर फाउंडेशन सांखोल व मूल निवासी संघ के पदाधिकारी शामिल रहे।
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बहादुरगढ़।
एससी-एसटी एक्ट में पुन: बहाल करने को लेकर समाज के काफी लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी मांग पुरजोर तरीके से उठाई। शहर के लाइनपार क्षेत्र से प्रदर्शन शुरू होकर शहर के विभिन्न हिस्सों से होता हुआ लघु सचिवालय परिसर पहुंचा। इस दौरान शहर में भारी पुलिस बल की तैनाती रही। प्रदर्शन के साथ पुलिस बल भी चलता रहा। ताकि किसी भी अप्रिय घटना से निपटा जा सके। दलित समुदाय के लोगों ने एसडीएम कार्यालय में पहुंचकर राष्ट्रपति के नामित एक ज्ञापन भी सौंपा गया।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से पिछले दिनों दिए गए फैसले को लेकर एससीएसटी वर्ग से जुड़े लोग सोमवार रेलवे लाइनपार क्षेत्र में एकत्रित हुए। उसके बाद लघु सचिवालय की तरफ रुख किया। रेलवे रोड व दिल्ली रोड से होते हुए नजफगढ़ रोड के रास्ते प्रदर्शनकारी लघु सचिवालय पहुंचे। यहां पर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शन के दौरान कई जगह अनुसूचित समाज के लोगों ने सड़कों पर बैठकर विरोध जताया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इससे यातायात भी अवरुद्ध हुआ। प्रदर्शनकारियों की भीड़ का नेतृत्व कई संगठनों के पदाधिकारियों ने किया।
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प्रशासन को सौंपे ज्ञापन में भारतीय बौद्ध महासभा के प्रदेश संगठन सचिव फौजी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के तहत अब अनुसूचित जाति व जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अंतर्गत अब सीधे एफआईआर नहीं की जा सकेगी और न ही गिरफ्तारी हो सकेगी। किसी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ शिकायत आने पर उस कर्मचारी के नियुक्ति अधिकारी द्वारा पहले विभागीय जांच की जाएगी और बाद में मामले को पुलिस व कोर्ट के पास भेजा जाएगा।
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पूर्व में ऐसे मामलों में मजिस्ट्रेट को अग्रिम जमानत देने का प्रावधान नहीं था और एफआईआर दर्ज होने के बाद गिरफ्तारी का प्रावधान था। यही परिभाषा इस कानून की आत्मा थी लेकिन अब कोर्ट के फैसले के बाद यह कानून मृत प्राय: हो गया है। यह तथ्य छिपा नहीं है कि अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार हो रहे हैं। ऐसे में यदि कानून ही कमजोर हो जाएगा तो गरीब व कमजोर तबके को न्याय कैसे मिलेगा। फौजी ने कहा कि आज जरूरत तो गरीब व कमजोर वर्ग पर अत्याचार रोकने के लिए कानून को और सख्त बनाने की है और सरकार की अनदेखी व गलत मंशा के चलते कानून ही कमजोर हो रहे हैं। इस प्रदर्शन में गुरु रविदास सभा, बाबा साहेब डाक्टर भीमराव अंबेडकर सभा, डाक्टर अंबेडकर फाउंडेशन सांखोल व मूल निवासी संघ के पदाधिकारी शामिल रहे।