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मलेरिया नियंत्रण के लिए आशा वर्कर्स गांवों में बनाएंगी स्लाइड
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झज्जर। ग्रामीण क्षेत्र में अब मलेरिया की रोकथाम के लिए आशा वर्कर्स अहम भूमिका निभाएंगी। जिले में विभाग के आंकड़ों के अनुसार 854 आशा वर्कर्स कार्यरत हैं। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जिले की सभी आशा वर्कर्स को बुखार के मरीजों की स्लाइड बनाने का कार्य सौंपा गया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने आशा
वर्कर्स को प्रशिक्षण भी दिया है। आशा वर्कर्स जो स्लाइड बनाएंगी उन्हें विभाग की तरफ से अस्पतालों में स्थापित की गई प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। अगर उनमें से कोई मरीज मलेरिया पॉजीटिव मिलता है तो उसे मलेरिया का इलाज दिया जाएगा। वहीं उसके घर के आसपास विभाग की तरफ से डेल्टा मैथरीन दवाई का छिड़काव भी किया जाएगा। ताकि मलेरिया और अधिक न फैले और उस पर नियंत्रण पाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आशा वर्कर्स को एक स्लाइड बनाने पर 15 रुपये और मलेरिया पॉजीटिव मरीज मिलने पर मरीज को दवाई उपलब्ध कराने पर विभाग की तरफ से 75 रुपये प्रति मरीज दिए जाएंगे। इतना ही नहीं विभाग की तरफ से मास सर्वे भी करवाया जा रहा है। इसके लिए विभाग की 103 टीमें घर-घर जाकर कूलर, गमले, पानी की टंकियों की जांच कर रही हैं। इनमें कहीं मच्छर का लारवा तो नहीं फैल रहा है।
जिले में मिल चुके हैं मलेरिया के दो मरीज
जिले के भालगढ़ और छुछकवास गांवों में दो मरीज मलेरिया पॉजीटिव पाए जा चुके हैं। मलेरिया पॉजीटिव मरीज पाए जाने पर विभाग की तरफ से गांव में एंटी लारवा एक्टीविटी शुरू कर दी गई हैं। वहीं दोनों गांवों में डेल्टा मैथरीन दवाई का छिड़काव भी शुरू कर दिया है। क्षेत्र में प्री मानसून की वर्षा के बाद मलेरिया के केसों में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। यह सिलसिला निरंतर मध्य नवंबर तक चलता है। क्योंकि उसके बाद सर्दी का मौसम होने के
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कारण मच्छरों की संख्या कम होनी शुरू हो जाती है। हालांकि पिछले साल मध्य जून तक जिला में मलेरिया के आठ मरीज पाए जा चुके थे। इस बार भी एक मलेरियां पॉजीटिव मरीज पहले भी मिल चुका है। लेकिन वह दूसरे शहर से बीमार होने पर झज्जर आया था। छुछकवास गांव पहले ही स्वास्थ्य विभाग के हाई रिस्क एरिया मेंशामिल है। क्योंकि पहले भी यहां पर कुछ मरीज मलेरिया पॉजीटिव पाए गए थे।
बुखार के हर मरीज की बनाई जाती है स्लाइड
अस्पतालों में आने वाले हर बुखार के मरीज की विभाग तरफ से स्लाइड बनाई जाती हैं और अस्पतालों में इनकी जांच की जाती है। जिले में तीन सामान्य अस्पताल, 6 सीएचसी व 22 पीएचसी हैं। जहां पर विभाग की तरफ से मलेरिया की जांच की व्यवस्था की गई है। ताकि मलेरिया की मुफ्त जांच के लिए दूर दराज के क्षेत्रों में चक्कर न
काटने पड़े।
अब मलेरिया की जांच के लिए आशा वर्कर्स भी अपनी भूमिका निभाएंगी। इसके लिए विभाग की तरफ से आशा वर्कर्स को विशेषतौर से प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
डॉ. कुलदीप, डीएमओ, झज्जर।
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वर्कर्स को प्रशिक्षण भी दिया है। आशा वर्कर्स जो स्लाइड बनाएंगी उन्हें विभाग की तरफ से अस्पतालों में स्थापित की गई प्रयोगशालाओं में भेजा जाएगा। अगर उनमें से कोई मरीज मलेरिया पॉजीटिव मिलता है तो उसे मलेरिया का इलाज दिया जाएगा। वहीं उसके घर के आसपास विभाग की तरफ से डेल्टा मैथरीन दवाई का छिड़काव भी किया जाएगा। ताकि मलेरिया और अधिक न फैले और उस पर नियंत्रण पाया जा सके। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से आशा वर्कर्स को एक स्लाइड बनाने पर 15 रुपये और मलेरिया पॉजीटिव मरीज मिलने पर मरीज को दवाई उपलब्ध कराने पर विभाग की तरफ से 75 रुपये प्रति मरीज दिए जाएंगे। इतना ही नहीं विभाग की तरफ से मास सर्वे भी करवाया जा रहा है। इसके लिए विभाग की 103 टीमें घर-घर जाकर कूलर, गमले, पानी की टंकियों की जांच कर रही हैं। इनमें कहीं मच्छर का लारवा तो नहीं फैल रहा है।
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जिले में मिल चुके हैं मलेरिया के दो मरीज
जिले के भालगढ़ और छुछकवास गांवों में दो मरीज मलेरिया पॉजीटिव पाए जा चुके हैं। मलेरिया पॉजीटिव मरीज पाए जाने पर विभाग की तरफ से गांव में एंटी लारवा एक्टीविटी शुरू कर दी गई हैं। वहीं दोनों गांवों में डेल्टा मैथरीन दवाई का छिड़काव भी शुरू कर दिया है। क्षेत्र में प्री मानसून की वर्षा के बाद मलेरिया के केसों में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है। यह सिलसिला निरंतर मध्य नवंबर तक चलता है। क्योंकि उसके बाद सर्दी का मौसम होने के
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कारण मच्छरों की संख्या कम होनी शुरू हो जाती है। हालांकि पिछले साल मध्य जून तक जिला में मलेरिया के आठ मरीज पाए जा चुके थे। इस बार भी एक मलेरियां पॉजीटिव मरीज पहले भी मिल चुका है। लेकिन वह दूसरे शहर से बीमार होने पर झज्जर आया था। छुछकवास गांव पहले ही स्वास्थ्य विभाग के हाई रिस्क एरिया मेंशामिल है। क्योंकि पहले भी यहां पर कुछ मरीज मलेरिया पॉजीटिव पाए गए थे।
बुखार के हर मरीज की बनाई जाती है स्लाइड
अस्पतालों में आने वाले हर बुखार के मरीज की विभाग तरफ से स्लाइड बनाई जाती हैं और अस्पतालों में इनकी जांच की जाती है। जिले में तीन सामान्य अस्पताल, 6 सीएचसी व 22 पीएचसी हैं। जहां पर विभाग की तरफ से मलेरिया की जांच की व्यवस्था की गई है। ताकि मलेरिया की मुफ्त जांच के लिए दूर दराज के क्षेत्रों में चक्कर न
काटने पड़े।
अब मलेरिया की जांच के लिए आशा वर्कर्स भी अपनी भूमिका निभाएंगी। इसके लिए विभाग की तरफ से आशा वर्कर्स को विशेषतौर से प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।
डॉ. कुलदीप, डीएमओ, झज्जर।