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सात समंदर पार मातृभूमि की चिंता सताई, पौधरोपण के साथ शिक्षा की अलख जगाई

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jan 2022 11:36 PM IST
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Worried about the motherland across the seven seas, aroused the light of education with plantation
अग्रोहा। रामस्वरूप आर्य अपनी पत्नी संतोष आर्य के साथ। संवाद - फोटो : Hisar
राजबीर गोदारा श्यामसुख
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अग्रोहा। अपने देश से दूर जाने के बाद भी अपनी माटी से जुड़ा रहने का बड़ा महत्व है। दूसरे देश में रहकर अपने गांव के लिए कुछ करने से अलग ही सुकून मिलता है। कुछ लोग दूर जाकर भी अपने गांव में काम कर गांव के लोगों के दिलों में बसे रहते हैं। अनिवासी दिवस पर हम ऐसे ही एक व्यक्ति से रूबरू कराना चाहते हैं।
यहां हम बात कर रहे हैं हिसार जिले के कालीरावण गांव के रामस्वरूप आर्य की। रामस्वरूप आर्य ने शिक्षा की अलख जगाई। गांव कालीरावण में शिक्षा का मंदिर शुरू कर दिया है। जहां पर आज 800 से अधिक बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। जिसे नो प्रोफिट नो लोस के आधार पर संचालित किया जा रहा है। रामस्वरूप आर्य ने अपने देश के साथ-साथ विदेशों में अपने नाम की पहचान बना कर अपने देश का नाम रोशन कर रखा है। वर्तमान में अमेरिका में भी शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। कालीरावण गांव के मध्यम परिवार में जन्मे रामस्वरूप आर्य ने विदेश में जाने के बाद अपने गांव में शिक्षा की अलख जगाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर सुखराम मेमोरियल पब्लिक स्कूल का निर्माण करवाया। इस स्कूल में वर्ष 2003 में 40 बच्चों ने निशुल्क शिक्षा ग्रहण की थी। करीब 800 से ज्यादा बच्चे शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। रामस्वरूप आर्य ने अमेरिका में भी अपनी पहचान बनाई है। लाखों रुपये खर्च कर अपने गांव को शिक्षा क्षेत्र के साथ-साथ सुंदर व स्वस्थ बनाने में भी अहम भूमिका निभाई। जयवीर झाझाड़िया, महाबीर नेहरा, सरपंच प्रभु कस्वां आदि ग्रामीणों के अनुसार रामस्वरूप आर्य की पत्नी संतोष को कोई संतान की प्राप्ति नहीं हुई तो उन्होंने अपने भाई के पुत्र को गोद ले लिया। एमटेक करने के बाद एमडी यूनिवर्सिटी रोहतक में प्राइवेट जॉब की। बाद में अमेरिका में काम शुरू किया। वर्ष 2001 में गांव में स्कूल का निर्माण कार्य शुरू करवाया। सीबीएससी बोर्ड द्वारा मान्यता प्राप्त 12वीं तक का स्कूल बनवा दिया। गांव की बेटियों-बेटों को शिक्षा देने के लिए नो प्रोफिट नो लोस पर इस स्कूल को शुरू किया गया। संवाद
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रामस्वरूप आर्य ने गांव में ये करवाए कार्य
स्कूल का निर्माण, श्मशान भूमि की चहारदीवारी, गोशाला में चहारदीवारी, गोशाला में शेड का निर्माण, मंदिर पौधरोपण, लड़कियों की शिक्षा के लिए निशुल्क बस सेवा अग्रोहा से आदमपुर रूट के लिए उपलब्ध करवाई।
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