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सरकारी तंत्र की मनमानी, खामी और नाकामी बनी आमजन की परेशानी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 10 Nov 2022 11:42 PM IST
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The arbitrariness, flaws and failure of the government machinery became the problem of the common man
हिसार प्रॉपर्टी डीलर वेलफेयर एसोसिएशन के पदाधिकारी पत्रकारों से बातचीत करते हुए। संवाद - फोटो : Hisar
हिसार। हिसार प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन ने वीरवार को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी), नगर निगम व तहसील कार्यालय में आ रही परेशानियों को लेकर पत्रकारवार्ता की। एसोसिएशन के मुताबिक एचएसवीपी में लागू किए गए नए सॉफ्टवेयर में खामियों के कारण 10 दिनों से ऑनलाइन काम बाधित पड़े हैं। नगर निगम में जरूरी कार्यों के लिए तत्काल सेवा के नाम पर मोटी फीस वसूली जा रही है। वहीं, तहसील कार्यालय में भी अव्यवस्था फैली है, जिससे लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
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एसोसिएशन के पदाधिकारियों की मानें तो इसे लेकर जल्द ही नगर निगम व जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपे जाएंगे। अगर निर्धारित समय सीमा में समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वह आंदोलन करने पर मजबूर होंगे। इस मौके पर हिसार प्रॉपर्टी डीलर एसोसिएशन के संरक्षक पवन कुमार, प्रधान प्रवीण जैन, महासचिव दिनेश सिहाग, उपप्रधान निशांत बेरवाल, प्रवीण सिंघल, बाबूराम मित्तल, कोषाध्यक्ष अरविंद कुमार, सुनील आदि मौजूद रहे।
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नगर निगम
1. हर बार सर्वे में बदल दिया जाता है प्रॉपर्टी आईडी नंबर : प्रॉपर्टी आईडी को लेकर आमजन परेशान है। हर बार सर्वे में प्रॉपर्टी आईडी नंबर बदल दिया जाता है। फिर कहा जाता है पुराना प्रॉपर्टी आईडी लेकर आओ।
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2. टैक्सधारकों को किया जाता है परेशान : कार्यालय में टैक्सधारकों को बेवजह परेशान किया जाता है। अगर किसी व्यक्ति ने तीन साल पहले हाउस टैक्स जमा करवा दिया और उससे रसीद गुम हो गई, लेकिन वह निगम के पास रिकॉर्ड में है। मगर निगम टैक्सधारक से कहता है कि भरा हुआ टैक्स कम करवाना है तो रसीद लेकर आओ। हम नहीं ढूंढेंगे।
3. सर्वे के बाद भी पुराना डाटा किया अपलोड : याशी कंपनी ने दो साल पहले सर्वे किया था। इसके बाद कई प्रॉपर्टी सेल हो गई, सब डिवाइड हो गई व प्रॉपर्टी मालिक के नाम चेंज हो गए। याशी कंपनी ने पुराना अपलोड कर दिया। जो दो साल पहले डाटा था वो ही अब दिखा रहा है। एचएसवीपी का डाटा अगर निगम अपने पोर्टल पर अपलोड कर दे तो कम से कम सेक्टरवासियों को निगम कार्यालय नहीं जाना पड़ेगा।
4. 5 हजार फीस भरकर कोई काम दो दिन में हो जाता है तो बाकी क्यों नहीं : कोई काम जल्दी करवाना है तो निगम तत्काल के नाम पर 5 हजार रुपये फीस लेता है, जिसके बाद वह काम दो से तीन दिन में हो जाता है तो बाकी काम क्यों नहीं होते। अगर रिकॉर्ड में मोबाइल नंबर नहीं है तो उसके लिए 5 हजार रुपये फीस दो। नंबर के बिना टैक्स नहीं भरा जाएगा। बिना टैक्स भरे एनडीसी नहीं मिलेगी।
एचएसवीपी
1. सप्लीमेंटर डीड के लिए किया जाता है परेशान : एन्हांसमेंट की सप्लीमेंटरी डीड प्रदेश में हिसार के अलावा कहीं नहीं होती, जिसका कोई ऑनलाइन रिकॉर्ड भी नहीं होता। इसमें स्टॉम्प 100 के लगते हैं, लेकिन इसके लिए डेढ़ से दो महीने तक चक्कर काटने पड़ते हैं। इसकी काई समय सीमा निर्धारित नहीं है।
2. दो साल से स्कैनर नहीं आई : सरकार ने करीब 4-5 साल पहले सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया था, जहां बायोमीट्रिक हाजिरी लगती है। कई बार बुजुर्गों के अंगूठों के निशान नहीं आ पाते तो आई स्कैनर का भी विकल्प होता है। मगर यहां दो साल से कार्यालय में आई स्कैनर नहीं है।
3. निर्धारित समय से 10 मिनट पहले रद्द कर दी जाती है टीपी : ट्रांसफर परमिशन के लिए दोनों पार्टियों को कार्यालय आना होता है। मान लिजिए डेट 10 नवंबर है तो उस दिन दोनों पार्टियां को आना होता है, लेकिन वह फाइल सिंगल विंडो पर नहीं आती। किसी न किसी कर्मचारी के पास पड़ी रहती है। बड़ी मुश्किल से उसे सिंगल विंडो पर लेकर आते हैं। नियमानुसार फाइल एक दिन पहले सिंगल विंडो पर पहुंचनी चाहिए। अगर फाइल किसी कारण से सिंगल विंडो पर नहीं पहुंची तो टीपी नहीं हो पाती। कई बार पार्टी को 10 मिनट पहले ही पता चलता है कि टीपी रद्द् कर दी। इस कारण पार्टी को परेशानी झेलनी पड़ती है।
4. नया सॉफ्टवेयर बना परेशानी का कारण : सरकार ने एक नया सॉफ्टवेयर लागू किया है। इसके अंदर आधार कार्ड, फैमिली आईडी व अलॉटमेंट में नाम तीनों में एक जैसा होना चाहिए। उन्हें नया सॉफ्टवेयर लागू करने में कोई एतराज नहीं है, लेकिन पहले एक जिले में लागू करके उसका ट्रायल करना चाहिए। इसके बाद प्रदेश में लागू करे। पिछले 10 दिनों में कोई काम नहीं हो रहा है। अभी तक टीपी शुरू नहीं हुई। नए सॉफ्टवेयर में कई एप्लीकेशन नहीं है। नए सॉफ्टवेयर में री-अलॉटमेंट की सुविधा नहीं है। पहले पता चेंज करने का भी विकल्प था, अब नहीं है। टीपी का री-शेड्यूल का ऑप्शन भी नहीं है।
5. मेल पर नहीं आ रहे दस्तावेज : पहले मेल आईडी पर अप्रूव्ड होने के बाद दस्तोवज आ जाते थे। मगर पिछले छह माह से वो भी नहीं आ रहे हैं। उसके लिए एचएसवीपी कार्यालय में जाना पड़ता है। पहले रजिस्ट्री होने के बाद तुरंत ऑटोमेटिक अलॉटमेंट लग जाता था। वह अलॉटमेंट अब लगना बंद हो गया। अब दस्तोवज जमा करवाओ। इसके बाद अलॉटमेंट होगा।
6. विक्रेता के पास ओटीपी जाने से हो रही परेशानी : रजिस्ट्री होने के बाद अगर विक्रेता पार्टी बाहर की है और उसकी पेमेंट कर दी। अलॉटमेंट अप्लाई करने के लिए ओटीपी उससे लेना पड़ता है। अगर किसी कारण से वह ओटीपी नहीं देता तो क्रेता को अलॉटमेंट भी नहीं मिलता।
7. ड्रॉ सिस्टम लागू किया जाए : ड्रॉ सिस्टम अच्छा था। इससे आम जनता को प्लॉट मिल जाता था। सरकार ड्रॉ लागू करे। ई-पेमेंट के समय को बढ़ाए।
तहसील कार्यालय
1. टोकन कटने के साथ शुरू हो रजिस्ट्री का काम : टोकन 9 बजे कटने शुरू हो जाते हैं, लेकिन रजिस्ट्री का काम 11 बजे के बाद शुरू होता है। रजिस्ट्री का काम सुबह 9 बजे शुरू किया जाए ताकि शाम को देरी न हो।
2. सुविधाओं की कमी : बैठने की व्यवस्था नहीं है। कैफेटेरिया नहीं है। जनरेटर तक नहीं है। लाइट चली जाए तो रजिस्ट्री का काम तक बंद हो जाता है। इसके अलावा कार्यालय ग्राउंड लेवल पर हो ताकि बुजुर्ग व दिव्यांग भी आसानी से आ सके।
3. रजिस्ट्री के लिए कम से कम हो दो विंडो : कार्यालय में आज तक एक ही कंप्यूटर है, जबकि 100 से ऊपर टोकन कटते हैं। रेवाड़ी कार्यालय में भी एक साथ चार-चार रजिस्ट्री होती है। सरकार से मांग है कि रजिस्ट्री की दो विंडो की जाए।

4. एक सप्ताह में ऑटोमैटिक हो इंतकाल : सरकार ने नियम बनाया था कि रजिस्ट्री होते ही इंतकाल चढ़ जाना चाहिए, लेकिन वह लागू नहीं हो रहा है। इंतकाल चार से 6 माह तक नहीं होते। इंतकाल न होने से न तो व्यक्ति प्रॉपर्टी को बेच सकता, न ही एनओसी के लिए अप्लाई कर सकता और न ही लोन ले सकता। सरकार या तो इंतकाल को खत्म कर दे अन्यथा ऐसी व्यवस्था की जाए कि रजिस्ट्री होने के एक सप्ताह में अपने आप इंतकाल हो जाए।
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