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5 साल पहले लगाया आरओ प्लांट आज तक नहीं हो सका चालू
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कुलदीप जांगड़ा
हिसार। गांव बुड़ाक में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2016 में आरओ प्लांट लगाया गया था। पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आरओ प्लांट शुरू नहीं हो पाया है। जनस्वास्थ्य विभाग के जरिये जिला प्रशासन ने यह आरओ प्लांट लगवाया था। आरओ प्लांट को संचालित करने के लिए गांव के लोगों को ही सौंपा जाना था।
इस प्लांट का निर्माण वर्ष 2016 में ही पूरा हो गया था। इस आरओ प्लांट की लागत करीब 20 लाख रुपये आई थी। आरओ प्लांट का अभी तक न उद्घाटन हो पाया है, न ही किसी को सौंपा गया है। पांच साल से प्लांट पर ताला ही लटका हुआ है। प्लांट के अंदर लगी मशीनें जंग खा रही हैं। बिना देखरेख के कारण कुछ हिस्से खराब भी हो चुके हैं। बालसमंद माइनर में पानी कम आने के कारण लोगों को पानी के टैंकर खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। इस समस्या का निदान करने के लिए आरओ प्लांट लगाया था। भू-जल से निकले पानी को पीने लायक बनाने के लिए यह प्लांट बनाया गया था। ग्रामीणों को यह पानी निशुल्क उपलब्ध कराया जाना था।
सामान भी आया पर इस्तेमाल नहीं हो रहा
प्लांट में पानी को आरओ करने के लिए फिल्टर एवं मशीन, पानी भंडारण के लिए तीन बड़ी 5-5 हजार लीटर की प्लास्टिक की टंकियां सहित अन्य सामान आया हुआ है। इन उपकरणों के इस्तेमाल न होने से खराब होने की आशंका है। इसके अलावा प्लांट में आरओ पानी के लिए एक ट्यूबवेल भी लगाया हुआ है। प्लांट के भवन पर गेट और बिजली के लिए मीटर तक लगाए गए हैं।
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दो माह ट्रायल के लिए चला था
ग्रामीणों ने बताया कि यह आरओ प्लांट बनने के बाद दो महीने के लिए ट्रायल पर चलाया गया था। ग्रामीणों ने भी इस प्लांट से पानी की आपूर्ति भी ली थी। सरपंच की निगरानी में दो-तीन महीनों तक ग्रामीणों ने खुद ही चलवाया था। उसके बाद पांच साल से यह प्लांट बंद है।
पानी की मांग के लिए चला लंबे समय तक धरना
साल 2015 में बुड़ाक सहित बालसमंद, बांडाहेड़ी, डोबी, खारिया, सरसाना, भिवानी रोहिल्ला, सुण्डावास, रावलवास खुर्द, गोरछी, बासड़ा, धीरणवास सहित अन्य गांव के ग्रामीणों ने पानी की किल्लत को दूर कराने के लिए धरना प्रदर्शन भी किया था। पानी की मांग को लेकर चलने वाला यह धरना कई महीनों तक चला था। माइनर बनने का प्रोजेक्ट दो से तीन साल लंबा था। ऐसे में लोगों को तत्काल राहत देने के लिए प्लांट लगाया गया था। धरने के समय तात्कालिक उपायुक्त चंद्रशेखर खरे गांव में आए थे। ग्रामीणों से पानी की किल्लत के बारे में जानकारी ली थी। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए गांव में आरओ प्लांट लगाने की मंजूरी दी थी, मगर उसके बाद कोई सुध नहीं ली गई। (संवाद)
आरओ प्लांट के लिए पंचायत की ओर से वीडियो ब्लॉक में मांग की हुई थी। प्रशासन की ओर से अनुमति मिलने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने साल 2015 में गांव में प्लांट बनाना शुरू कर दिया था। मेरा कार्यकाल उस समय पूरा हो चुका था, प्लांट का काम भी पूरा होने को था। पंचायत से प्लांट बनाने के लिए जमीन मांगी गई थी। बजट जनस्वास्थ्य विभाग ने खर्च किया था। - कृष्ण कुमार जांगड़ा, पूर्व सरपंच, बुड़ाक
यह करीब 5 साल पुरानी बातें हैं। उस समय एक्सईएन केके गिल के निर्देशन में यह आरओ प्लांट बनाया गया था। मैंने इस बारे में अभी पता किया है। जहां तक जानकारी है कि यह हमें बनाना था और बनाकर पंचायत को सौंपना था। विभाग ने प्लांट का काम पूरा करवा कर पंचायत को सौंपा था। पंचायत की ओर से इस प्लांट का बिजली का बिल नहीं भरा गया। जिस कारण यह प्लांट बंद है। - एसके त्यागी, एक्शन, जन स्वास्थ्य विभाग, हिसार
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हिसार। गांव बुड़ाक में ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2016 में आरओ प्लांट लगाया गया था। पांच साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आरओ प्लांट शुरू नहीं हो पाया है। जनस्वास्थ्य विभाग के जरिये जिला प्रशासन ने यह आरओ प्लांट लगवाया था। आरओ प्लांट को संचालित करने के लिए गांव के लोगों को ही सौंपा जाना था।
इस प्लांट का निर्माण वर्ष 2016 में ही पूरा हो गया था। इस आरओ प्लांट की लागत करीब 20 लाख रुपये आई थी। आरओ प्लांट का अभी तक न उद्घाटन हो पाया है, न ही किसी को सौंपा गया है। पांच साल से प्लांट पर ताला ही लटका हुआ है। प्लांट के अंदर लगी मशीनें जंग खा रही हैं। बिना देखरेख के कारण कुछ हिस्से खराब भी हो चुके हैं। बालसमंद माइनर में पानी कम आने के कारण लोगों को पानी के टैंकर खरीदने को मजबूर होना पड़ता है। इस समस्या का निदान करने के लिए आरओ प्लांट लगाया था। भू-जल से निकले पानी को पीने लायक बनाने के लिए यह प्लांट बनाया गया था। ग्रामीणों को यह पानी निशुल्क उपलब्ध कराया जाना था।
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सामान भी आया पर इस्तेमाल नहीं हो रहा
प्लांट में पानी को आरओ करने के लिए फिल्टर एवं मशीन, पानी भंडारण के लिए तीन बड़ी 5-5 हजार लीटर की प्लास्टिक की टंकियां सहित अन्य सामान आया हुआ है। इन उपकरणों के इस्तेमाल न होने से खराब होने की आशंका है। इसके अलावा प्लांट में आरओ पानी के लिए एक ट्यूबवेल भी लगाया हुआ है। प्लांट के भवन पर गेट और बिजली के लिए मीटर तक लगाए गए हैं।
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दो माह ट्रायल के लिए चला था
ग्रामीणों ने बताया कि यह आरओ प्लांट बनने के बाद दो महीने के लिए ट्रायल पर चलाया गया था। ग्रामीणों ने भी इस प्लांट से पानी की आपूर्ति भी ली थी। सरपंच की निगरानी में दो-तीन महीनों तक ग्रामीणों ने खुद ही चलवाया था। उसके बाद पांच साल से यह प्लांट बंद है।
पानी की मांग के लिए चला लंबे समय तक धरना
साल 2015 में बुड़ाक सहित बालसमंद, बांडाहेड़ी, डोबी, खारिया, सरसाना, भिवानी रोहिल्ला, सुण्डावास, रावलवास खुर्द, गोरछी, बासड़ा, धीरणवास सहित अन्य गांव के ग्रामीणों ने पानी की किल्लत को दूर कराने के लिए धरना प्रदर्शन भी किया था। पानी की मांग को लेकर चलने वाला यह धरना कई महीनों तक चला था। माइनर बनने का प्रोजेक्ट दो से तीन साल लंबा था। ऐसे में लोगों को तत्काल राहत देने के लिए प्लांट लगाया गया था। धरने के समय तात्कालिक उपायुक्त चंद्रशेखर खरे गांव में आए थे। ग्रामीणों से पानी की किल्लत के बारे में जानकारी ली थी। इसके बाद उन्होंने ग्रामीणों को पीने के पानी के लिए गांव में आरओ प्लांट लगाने की मंजूरी दी थी, मगर उसके बाद कोई सुध नहीं ली गई। (संवाद)
आरओ प्लांट के लिए पंचायत की ओर से वीडियो ब्लॉक में मांग की हुई थी। प्रशासन की ओर से अनुमति मिलने के बाद जन स्वास्थ्य विभाग ने साल 2015 में गांव में प्लांट बनाना शुरू कर दिया था। मेरा कार्यकाल उस समय पूरा हो चुका था, प्लांट का काम भी पूरा होने को था। पंचायत से प्लांट बनाने के लिए जमीन मांगी गई थी। बजट जनस्वास्थ्य विभाग ने खर्च किया था। - कृष्ण कुमार जांगड़ा, पूर्व सरपंच, बुड़ाक
यह करीब 5 साल पुरानी बातें हैं। उस समय एक्सईएन केके गिल के निर्देशन में यह आरओ प्लांट बनाया गया था। मैंने इस बारे में अभी पता किया है। जहां तक जानकारी है कि यह हमें बनाना था और बनाकर पंचायत को सौंपना था। विभाग ने प्लांट का काम पूरा करवा कर पंचायत को सौंपा था। पंचायत की ओर से इस प्लांट का बिजली का बिल नहीं भरा गया। जिस कारण यह प्लांट बंद है। - एसके त्यागी, एक्शन, जन स्वास्थ्य विभाग, हिसार