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Hisar News: मां की प्रेरणा, अखाड़े की मेहनत, पदकों से सजा पारस का सफर
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पहलवान पारस सैनी खासा महाजन
अग्रोहा। खासा महाजन गांव के 16 वर्षीय पहलवान पारस सैनी ने मां की प्रेरणा और अखाड़े में कड़ी मेहनत के दम पर कुश्ती में राष्ट्रीय स्तर तक पहचान बनाई है। पारस अब तक राष्ट्रीय स्तर पर दो रजत समेत आधा दर्जन से अधिक पदक जीत चुके हैं और स्वर्ण पदक हासिल करने के लक्ष्य के साथ सुबह-शाम अभ्यास कर रहे हैं।
उन्होंने करीब पांच साल पहले दोस्तों को स्कूल के मैदान में कुश्ती करते देखकर इस खेल में कदम रखा था। पारस की मां सुमन ने उन्हें कुश्ती में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह गांव के ब्राइट फ्यूचर स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र हैं और गांव स्थित एकेडमी में कोच रवि रायपुर से प्रशिक्षण ले रहे हैं। पारस मिट्टी के अखाड़े में रोजाना सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। उनके पिता रोहतास कुमार बिजली का कार्य करते हैं जबकि मां सुमन घर संभालती हैं।
स्कूल के मैदान से राष्ट्रीय मंच तक
करीब पांच साल पहले दोस्तों को कुश्ती करते देखकर पारस के मन में भी दांव-पेच सीखने की जिज्ञासा जगी। मां की प्रेरणा और कोच रवि रायपुर के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रशिक्षण शुरू किया। लगातार अभ्यास के साथ वह अपने खेल में सुधार करते हुए स्कूल के मैदान से मिट्टी के अखाड़े और फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचे।
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ये हैं पारस की प्रमुख उपलब्धियां
2023: हांसी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक। उमरा, हांसी में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक। इसी वर्ष महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक।
2025: पंचकूला में राज्य स्तरीय केसरी दंगल में कांस्य पदक। सिसाय, हिसार में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक।
2026: रोहतक में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में रजत पदक।
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उन्होंने करीब पांच साल पहले दोस्तों को स्कूल के मैदान में कुश्ती करते देखकर इस खेल में कदम रखा था। पारस की मां सुमन ने उन्हें कुश्ती में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह गांव के ब्राइट फ्यूचर स्कूल में 11वीं कक्षा के छात्र हैं और गांव स्थित एकेडमी में कोच रवि रायपुर से प्रशिक्षण ले रहे हैं। पारस मिट्टी के अखाड़े में रोजाना सुबह-शाम अभ्यास करते हैं। उनके पिता रोहतास कुमार बिजली का कार्य करते हैं जबकि मां सुमन घर संभालती हैं।
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स्कूल के मैदान से राष्ट्रीय मंच तक
करीब पांच साल पहले दोस्तों को कुश्ती करते देखकर पारस के मन में भी दांव-पेच सीखने की जिज्ञासा जगी। मां की प्रेरणा और कोच रवि रायपुर के मार्गदर्शन में उन्होंने प्रशिक्षण शुरू किया। लगातार अभ्यास के साथ वह अपने खेल में सुधार करते हुए स्कूल के मैदान से मिट्टी के अखाड़े और फिर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं तक पहुंचे।
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ये हैं पारस की प्रमुख उपलब्धियां
2023: हांसी में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक। उमरा, हांसी में जिला स्तरीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक। इसी वर्ष महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक में राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक।
2025: पंचकूला में राज्य स्तरीय केसरी दंगल में कांस्य पदक। सिसाय, हिसार में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में रजत पदक।
2026: रोहतक में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में रजत पदक।