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Hisar News: डिग्री के लिए दाखिला मिला, छात्रावास में जगह नहीं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 20 Sep 2026 11:11 PM IST
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Got admission for the degree, but no space in the hostel.
जीजेयू का ब्वॉयज हॉस्टल 2
हिसार। उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिलों का ग्राफ बढ़ रहा है लेकिन बेहतर भविष्य का सपना संजोए विद्यार्थियों के लिए छात्रावासों में जगह कम पड़ रही है। जीजेयू में इसकी तस्वीर साफ नजर आती है।
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करीब 11 हजार विद्यार्थियों वाले विश्वविद्यालय में छात्राओं के चार छात्रावासों की क्षमता करीब 1200 है जबकि इनमें 3000 से अधिक छात्राएं रह रही हैं। जगह की कमी के कारण दो की क्षमता वाले कमरों में तीन से छह छात्राओं को रहना पड़ रहा है।
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जीजेयू में छात्र और छात्राओं के लिए चार-चार छात्रावास हैं। महिला कर्मचारियों के लिए भी एक छात्रावास है। छात्रों के चार छात्रावासों की क्षमता करीब 1185 है जबकि इनमें करीब 1200 से 1400 छात्र रह रहे हैं। एक सीट के लिए करीब 30 छात्र आवेदन करते हैं।
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छात्राओं के लिए स्थिति और गंभीर है। एक सीट के लिए करीब 50 आवेदन आते हैं। छात्रावास में जगह नहीं मिलने पर छात्राओं को पीजी या निजी आवास में रहना पड़ता है जिससे परिवार पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता है।
सीटें कम, दावेदार ज्यादा... रोज सफर मजबूरी
राजकीय पीजी कॉलेज के भारती महिला छात्रावास में 21 कमरों में 56 छात्राएं रह रही हैं। वर्ष 1983 में बने इस छात्रावास में एक सीट के लिए करीब 10 छात्राएं आवेदन करती हैं। कॉलेज में करीब 200 छात्राओं की क्षमता वाले नए छात्रावास के निर्माण की प्रक्रिया चल रही है। राजकीय महिला महाविद्यालय में 60 छात्राओं की क्षमता वाला एक छात्रावास है, जिसमें फिलहाल 50 छात्राएं रह रही हैं। यहां एक सीट के लिए औसतन दो आवेदन आते हैं। करीब 50 छात्राएं छात्रावास की सुविधा से वंचित हैं और रोज अपने गांव से सफर कर कॉलेज पहुंचती हैं। वर्ष 2006 में यहां कोई छात्रावास नहीं था।

सीटों के साथ छात्रावासों का विस्तार जरूरी
बीते दो दशक में उच्च शिक्षा संस्थानों में पाठ्यक्रमों और विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है, लेकिन कई संस्थानों में छात्रावासों की क्षमता मांग से काफी पीछे है। ऐसे में सीटों के विस्तार के साथ छात्रावास सुविधाएं बढ़ाना भी जरूरी हो गया है।
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