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Hisar News: नशे के दलदल से निकलकर महकने लगी जिंदगी

Sun, 01 Dec 2024 11:32 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Sun, 01 Dec 2024 11:32 PM IST
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Life started smelling after coming out of the swamp of drugs.
हिसार। नशे से जिंदगी कैसे नासूर बन जाती है...इसकी कल्पना से ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। नशा मुक्ति केंद्रों में अपनों को नशे के लिए चिल्लाते देखकर परिजन खून के आंसू रोते हैं। वे लाचार हैं, खुद को भी कोसते हैं और सिस्टम को भी। कच्ची उम्र में ही नशे की लत लगने से उसे छोड़ना मुश्किल होता है पर कुछ ऐसे लोग भी हैं जो इस दलदल से निकलकर आज औरों को भी नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक कर रहे हैं।
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जिले में नशे का जाल तेजी से बढ़ रहा है। शहर ही नहीं गांवों तक इसकी सहज उपलब्धता है। नशा मुक्ति के लिए पुलिस अभियान चला रही है, वहीं कई सामाजिक संस्थाएं भी अपने स्तर पर प्रयास कर रही है। इसका असर भी दिख रहा है। युवा नशा छोड़कर मुख्यधारा में आ रहे हैं। काम धंधा कर परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं।
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केस 1: जिंदगी नासूर बन गई थी...
मैं और मेरे दो भाई दस साल से स्मैक और चिट्टे का नशा करते थे। जिंदगी नासूर बन गई थी। नशे की लत पूरी करने के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी शुरू कर दी। जेवरात भी गिरवी रख दिए। परिवार के सदस्य परेशान थे। उन्होंने नशा छुड़वाने के लिए भूना के एक क्लीनिक में दाखिल करवाया। दस दिन तक इलाज लिया। घर आने पर पूरी देखभाल की। परिजनों ने हर वक्त नजर रखी। संतुलित खानपान और दवाओं की वजह से धीरे-धीरे तीनों भाई नशे की फांस से आजाद हो गए। आज एक भाई सेल्समैन का काम करता है। गिरवी रखे जेवरात भी छुड़वा लिए। एक भाई गाड़ी चलाता है और दूसरा खेतीबाड़ी कर रहा है। मैं नशा मुक्ति अभियान में शामिल होकर युवाओं को नशा छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा हूं। गांव में भी कैंप लगाकर युवाओं को नशा छोड़ने की शपथ दिला रहा हूं।
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केस 2: नशे की वजह से अकेला पड़ गया था
मैं गलत संगत में पड़ने के कारण चिट्टे और स्मैक का नशा करने लगा। नशे की लत ऐसी पड़ी की घर का सामान तक बेच डाला। परिवार वाले काफी परेशान थे। नशा करने के लिए रुपये नहीं होते तो तस्करों के कहने पर नशीले पदार्थ सप्लाई करना शुरू कर दिया। जो रुपये मिलते उससे चिट्टा खरीद लेता था। नशे के कारण घर के लोगों और रिश्तेदारों ने दूरी बना ली थी। नशा मुक्ति अभियान चलाने वाली टीम संपर्क में आया तो नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया। करीब दस दिन तक भर्ती रहा। इसके बाद नशा छोड़ने की सोची और छोड़ भी दिया। अब मजदूरी कर परिवार का सहयोग कर रहा हूं। नशा करने वालों को आपबीती बताकर उन्हें ऐसा न करने के लिए कहता हूं।
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