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Hisar News: अमेरिकी कंपनी की मदद से विकसित होगा हिसार एयरपोर्ट व एविएशन हब
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हिसार एयरपोर्ट का प्रवेश द्वार।
हिसार। अमेरिकी व्यापार एवं विकास एजेंसी (यूएसटीडीए) की मदद से हिसार एयरपोर्ट व इंटीग्रेटेड एविएशन हब (आईएएच) को विकसित किया जाएगा। इसे लेकर मंगलवार को नई दिल्ली में यूएसटीडीए व एचएडीसी (हरियाणा एयरपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के बीच समझौता हुआ। इस समझौते के अनुसार यूएसटीडीए न सिर्फ तकनीकी रूप से मदद करेगी, बल्कि 10.53 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता भी करेगी।
बता दें कि जुलाई में अमेरिका के न्यूयार्क में तीन दिवसीय अमेरिकी-भारत विमानन शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें यूएसटीडीए के साथ हिसार एयरपोर्ट को विमानन हब बनाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने पर सहमति बनी थी और यूएसटीडीए निदेशक एनोह टी एबोंग ने अनुदान निधि की मंजूरी की घोषणा की थी।
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इंटीग्रेटेड एविएशन हब की ये होंगी विशेषताएं
एनसीआर के तीसरे सबसे बड़े एयरपोर्ट के साथ इंटीग्रेटेड एविएशन हब विकसित किया जाएगा। हिसार एयरपोर्ट वर्ष 2024-25 से घरेलू उड़ान की मांग को पूरा करेगा और वर्ष 2030 तक पैसेंजर ट्रैफिक प्रति वर्ष 2.1 मिलियन से 3.6 मिलियन होने की संभावना है। धीरे-धीरे यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित की जाएंगी। वर्ष 2030 तक कार्गों प्रबंधन 20 हजार मीट्रिक टन से 70 हजार मीट्रिक टन तक होने की संभावना है। यहां इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर विकसित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न चरणों में एयरपोर्ट आधारित उद्योग स्थापित किए जाएंगे।
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इस तरह से विकसित किया जाएगा आईएएच
परिचालन अवधि- वर्ष 2024-2030
क्षमता-2.1 मिलियन पैसेंजर प्रति वर्ष
टर्निमल एरिया-36 हजार स्क्वेयर मीटर
कार्गों टर्निमल एरिया-2500 स्क्वेयर मीटर
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2988 एकड़ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर किया जाएगा विकसित
वहीं एयरपोर्ट के आसपास आईएमसी (इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) के लिए 2988 एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा, जिसके निर्माण पर 4694.46 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पहले चरण में इसमें से 1605 एकड़ जमीन पर आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा। यह हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व पंजाब के कच्चे माल को कांडला समुद्री कोर्ट तक जल्द पहुंचाने का कार्य करेगा। प्रस्तावित आईएमसी में एयरोस्पेस एंड डिफेंस के लिए 343.20 एकड़, फूड प्रोसेसिंग के लिए 172 एकड़, इंजीनियरिंग एंड फैब्रिकेशन के लिए 289.80 एकड़, रेडीमेड गारमेंट के लिए 92.20 एकड़, कॉमन रेडी शेड्स के लिए 12.73 एकड़, लॉजिस्टिक पार्क के लिए 70 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है।
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पहले फेज में किस कार्य के लिए कितनी जमीन का होगा इस्तेमाल
फेज 1 में कुल 1605 एकड़ भूमि में से इंडस्ट्री एवं लॉजिस्टिक के लिए 980.20 एकड़, कॉमर्शियल प्रयोग के लिए 39.02 एकड़, पब्लिक व सेमी पब्लिक के लिए 48.60 एकड़, रेजिडेंशियल के लिए 34.90 एकड़, सर्विसेज के लिए 28.50 एकड़, ग्रीन एंड वाटर बॉडी के लिए 242.52 एकड़, रोड व यूटिलिटीज के लिए 231.26 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
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परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए ये हो चुका है कार्य
राज्य सरकार एसएचए-एसएसए ड्राफ्ट को मंजूरी दे चुकी है। क्लस्टर के लिए 100 प्रतिशत जमीन कब्जे में ले ली गई है। एनपीजी की अनुशंसा मिल चुकी है। मास्टर प्लान पीडीआर और कॉस्ट एस्टीमेट तैयार हो चुके हैं। मास्टर प्लान को कभी भी अधिसूचित किया जा सकता है। राज्य सरकार से बिजली व पानी की आवश्यक स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा इनवायरमेंटल क्लीयरेंस लेने के लिए भी प्रक्रिया जारी है।
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आईएमसी परियोजना का विवरण
परियोजना का क्षेत्र-2988 एकड़ (फेज एक-1605 एकड़ व फेज दो-1383 एकड़)
परियोजना की लागत-4694.46 करोड़ रुपये (फेज एक-2435.95 करोड़ रुपये व फेज दो-2258.52 करोड़ रुपये)
निवेश की संभावना-15727 करोड़ रुपये
रोजगार की संभावना-1.25 लाख
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यूएसटीडीए व एचएडीसी के बीच एमओयू हुआ है। यूएसटीडीए हिसार एयरपोर्ट व एविएशन हब को अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिसाब से तैयार करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध करवाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी रैंकिंग बढ़ाने में भी मदद करेगी।
विपुल गोयल, नागरिक उड्डयन मंत्री, हरियाणा सरकार
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बता दें कि जुलाई में अमेरिका के न्यूयार्क में तीन दिवसीय अमेरिकी-भारत विमानन शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें यूएसटीडीए के साथ हिसार एयरपोर्ट को विमानन हब बनाने के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करने पर सहमति बनी थी और यूएसटीडीए निदेशक एनोह टी एबोंग ने अनुदान निधि की मंजूरी की घोषणा की थी।
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इंटीग्रेटेड एविएशन हब की ये होंगी विशेषताएं
एनसीआर के तीसरे सबसे बड़े एयरपोर्ट के साथ इंटीग्रेटेड एविएशन हब विकसित किया जाएगा। हिसार एयरपोर्ट वर्ष 2024-25 से घरेलू उड़ान की मांग को पूरा करेगा और वर्ष 2030 तक पैसेंजर ट्रैफिक प्रति वर्ष 2.1 मिलियन से 3.6 मिलियन होने की संभावना है। धीरे-धीरे यहां से अंतरराष्ट्रीय उड़ानें संचालित की जाएंगी। वर्ष 2030 तक कार्गों प्रबंधन 20 हजार मीट्रिक टन से 70 हजार मीट्रिक टन तक होने की संभावना है। यहां इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग कलस्टर विकसित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न चरणों में एयरपोर्ट आधारित उद्योग स्थापित किए जाएंगे।
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इस तरह से विकसित किया जाएगा आईएएच
परिचालन अवधि- वर्ष 2024-2030
क्षमता-2.1 मिलियन पैसेंजर प्रति वर्ष
टर्निमल एरिया-36 हजार स्क्वेयर मीटर
कार्गों टर्निमल एरिया-2500 स्क्वेयर मीटर
2988 एकड़ में इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर किया जाएगा विकसित
वहीं एयरपोर्ट के आसपास आईएमसी (इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) के लिए 2988 एकड़ जमीन पर विकसित किया जाएगा, जिसके निर्माण पर 4694.46 करोड़ रुपये की लागत आएगी। पहले चरण में इसमें से 1605 एकड़ जमीन पर आधारभूत ढांचा विकसित किया जाएगा। यह हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान व पंजाब के कच्चे माल को कांडला समुद्री कोर्ट तक जल्द पहुंचाने का कार्य करेगा। प्रस्तावित आईएमसी में एयरोस्पेस एंड डिफेंस के लिए 343.20 एकड़, फूड प्रोसेसिंग के लिए 172 एकड़, इंजीनियरिंग एंड फैब्रिकेशन के लिए 289.80 एकड़, रेडीमेड गारमेंट के लिए 92.20 एकड़, कॉमन रेडी शेड्स के लिए 12.73 एकड़, लॉजिस्टिक पार्क के लिए 70 एकड़ भूमि निर्धारित की गई है।
पहले फेज में किस कार्य के लिए कितनी जमीन का होगा इस्तेमाल
फेज 1 में कुल 1605 एकड़ भूमि में से इंडस्ट्री एवं लॉजिस्टिक के लिए 980.20 एकड़, कॉमर्शियल प्रयोग के लिए 39.02 एकड़, पब्लिक व सेमी पब्लिक के लिए 48.60 एकड़, रेजिडेंशियल के लिए 34.90 एकड़, सर्विसेज के लिए 28.50 एकड़, ग्रीन एंड वाटर बॉडी के लिए 242.52 एकड़, रोड व यूटिलिटीज के लिए 231.26 एकड़ जमीन का इस्तेमाल किया जाएगा।
परियोजना को सिरे चढ़ाने के लिए ये हो चुका है कार्य
राज्य सरकार एसएचए-एसएसए ड्राफ्ट को मंजूरी दे चुकी है। क्लस्टर के लिए 100 प्रतिशत जमीन कब्जे में ले ली गई है। एनपीजी की अनुशंसा मिल चुकी है। मास्टर प्लान पीडीआर और कॉस्ट एस्टीमेट तैयार हो चुके हैं। मास्टर प्लान को कभी भी अधिसूचित किया जा सकता है। राज्य सरकार से बिजली व पानी की आवश्यक स्वीकृति मिल चुकी है। इसके अलावा इनवायरमेंटल क्लीयरेंस लेने के लिए भी प्रक्रिया जारी है।
आईएमसी परियोजना का विवरण
परियोजना का क्षेत्र-2988 एकड़ (फेज एक-1605 एकड़ व फेज दो-1383 एकड़)
परियोजना की लागत-4694.46 करोड़ रुपये (फेज एक-2435.95 करोड़ रुपये व फेज दो-2258.52 करोड़ रुपये)
निवेश की संभावना-15727 करोड़ रुपये
रोजगार की संभावना-1.25 लाख
यूएसटीडीए व एचएडीसी के बीच एमओयू हुआ है। यूएसटीडीए हिसार एयरपोर्ट व एविएशन हब को अंतरराष्ट्रीय स्तर के हिसाब से तैयार करने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की सेवाएं उपलब्ध करवाएगी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी रैंकिंग बढ़ाने में भी मदद करेगी।
विपुल गोयल, नागरिक उड्डयन मंत्री, हरियाणा सरकार