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रात के अंधेरे में फेंक गए नवजात
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हिसार। अस्पताल के लेडिज टॉयलेट से बरामद नवजात के मामले में फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि उसे फेंकने वाले हाथ महिला के थे या पुरुष के, लेकिन इतना जरूर है कि यह कुकृत्य रात को किया गया होगा। भले ही वह लेडिज टॉयलेट है, लेकिन उसका डस्टबिन जहां रखा है, वहां कोई पुरुष भी गलियारे से गुजरते हुए आसानी से कुछ भी डाल सकता है।
जिसने भी यह काम किया हो, उसने पहले तो इस स्थान को कई बार यहां से गुजर कर जांचा-परखा होगा और रात का ऐसा समय चुना, जब हर कोई नींद में होता है। यह सारा मामला अब अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज पर टिक गया है। अस्पताल के गलियारे में स्थित लेडिज टॉयलेट का गेट दो सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। एक कैमरा इमरजेंसी के बाहर लगा है, जिससे यह टॉयलेट मात्र 12 से 15 मीटर की दूरी पर है। दूसरा कैमरा करीब 25 से 30 मीटर की दूरी पर मुख्य प्रवेश द्वार की ओर लगा है और यह गलियारे को कवर करता है।
पुलिस जांच की सूई सीसीटीवी पर टिकी
फिलहाल पुलिस ने इस मामले में 174 के तहत इत्तफाकिया कार्रवाई की है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया है। पुलिस के पास नवजात की मौत का कारण अहम रहेगा, जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हो जाएगा। इसके बावजूद उसके पास ठोस सुराग के लिए सीसीटीवी फुटेज ही अहम रहेगी। इसके लिए पुलिस को सोमवार तक का इंतजार करना होगा, क्योंकि रविवार को छुट्टी के कारण पुलिस को सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पाई।
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बाहर से ही लाया जा सकता है नवजात
नवजात को बाहर से लाकर फेंकने की आशंका ज्यादा है, क्योंकि यदि अस्पताल के अंदर से नवजात को फेंका गया होगा तो अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के दाखिल किए जाने का पूरा रिकॉर्ड मौजूद होगा। ऐसे में अस्पताल के अंदर से संभावना कम है। कोई बाहर से ही आया होगा, जिसने या तो स्वयं ही पॉलिथीन को टॉयलेट के डस्टबिन में डाला या फिर अस्पताल के स्टाफ की मदद से ऐसा काम किया हो सकता है।
हो सकता है अवैध संबंधों का परिणाम
नवजात को फेंका जाना अवैध संबंधों का परिणाम हो सकता है। गलत काम को छिपाने के लिए ही नवजात को इस तरीके से फेंके जाने की आशंका है। इसका कारण ये है कि नवजात फीमेल न होकर मेल था। यदि फीमेल होता तो संभवत: कहा जा सकता था कि कन्या भ्रूण हत्या की गई होगी, लेकिन यह मेल था, जिसके चलते इस बात को बल मिलता है कि यह अवैध संबंधों का ही परिणाम होगा।
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जिसने भी यह काम किया हो, उसने पहले तो इस स्थान को कई बार यहां से गुजर कर जांचा-परखा होगा और रात का ऐसा समय चुना, जब हर कोई नींद में होता है। यह सारा मामला अब अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज पर टिक गया है। अस्पताल के गलियारे में स्थित लेडिज टॉयलेट का गेट दो सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में है। एक कैमरा इमरजेंसी के बाहर लगा है, जिससे यह टॉयलेट मात्र 12 से 15 मीटर की दूरी पर है। दूसरा कैमरा करीब 25 से 30 मीटर की दूरी पर मुख्य प्रवेश द्वार की ओर लगा है और यह गलियारे को कवर करता है।
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पुलिस जांच की सूई सीसीटीवी पर टिकी
फिलहाल पुलिस ने इस मामले में 174 के तहत इत्तफाकिया कार्रवाई की है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम करवाया है। पुलिस के पास नवजात की मौत का कारण अहम रहेगा, जो पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हो जाएगा। इसके बावजूद उसके पास ठोस सुराग के लिए सीसीटीवी फुटेज ही अहम रहेगी। इसके लिए पुलिस को सोमवार तक का इंतजार करना होगा, क्योंकि रविवार को छुट्टी के कारण पुलिस को सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल पाई।
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बाहर से ही लाया जा सकता है नवजात
नवजात को बाहर से लाकर फेंकने की आशंका ज्यादा है, क्योंकि यदि अस्पताल के अंदर से नवजात को फेंका गया होगा तो अस्पताल में गर्भवती महिलाओं के दाखिल किए जाने का पूरा रिकॉर्ड मौजूद होगा। ऐसे में अस्पताल के अंदर से संभावना कम है। कोई बाहर से ही आया होगा, जिसने या तो स्वयं ही पॉलिथीन को टॉयलेट के डस्टबिन में डाला या फिर अस्पताल के स्टाफ की मदद से ऐसा काम किया हो सकता है।
हो सकता है अवैध संबंधों का परिणाम
नवजात को फेंका जाना अवैध संबंधों का परिणाम हो सकता है। गलत काम को छिपाने के लिए ही नवजात को इस तरीके से फेंके जाने की आशंका है। इसका कारण ये है कि नवजात फीमेल न होकर मेल था। यदि फीमेल होता तो संभवत: कहा जा सकता था कि कन्या भ्रूण हत्या की गई होगी, लेकिन यह मेल था, जिसके चलते इस बात को बल मिलता है कि यह अवैध संबंधों का ही परिणाम होगा।