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धोखाधड़ी में गिल्टी
Updated Fri, 16 Mar 2018 12:56 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
हिसार।
सीजेएम मनप्रीत सिंह की अदालत ने धोखाधड़ी और जालसाजी करने पर ढाणी श्यामलाल के राजेंद्र, लाहौरिया चौक एरिया के शिवकुमार और दिलबाग को दोषी करार दिया है। उनको शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी। अदालत ने आरोपी अभिषेक और राजन को बरी कर दिया है।
सिटी थाना पुलिस ने इस संबंध में 20 दिसंबर 2012 को केस दर्ज किया था। राजीव नगर के विवेक आनंद ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके मकान की रजिस्ट्री व कुछ अन्य कागजात शिवकुमार के पास रखे थे। उसे रुपयों की जरूरत थी। मैंने शिवकुुमार से जिक्र किया तो उसने सोसायटी से लोन दिलाने की बात कही। फिर वह उसे आजकल की बात कह टरकाता रहा। फिर मैंने उससे जोर देकर बात की तो उसने कहा कि जब तक लोन नहीं होता, वह उसे चार लाख रुपये दिला देता है। दो प्रतिशत के हिसाब से ब्याज देेना होगा। मैंने हां कर दी। तब उसने उसके कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए। उसके बाद वह कहने लगा कि वे कागजात डोगरान मोहल्ले में कहीं गुम हो गए हैं। विवेक ने इस पर डोगरान मोहल्ला चौकी में रपट दर्ज कराकर तहसील से रजिस्ट्री की नई कॉपी निकलवा ली। कुछ दिन बाद एक वकील ने उनको लीगल नोटिस भेजकर कहा कि आप अपना मकान 14 लाख में बेचकर 12.50 लाख रुपये हासिल कर चुके हैं। वे बाकी रकम लेकर मकान की रजिस्ट्री कराएं। विवेक ने कहा था कि कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर उक्त लोगों ने फर्जी एग्रीमेंट तैयार कर उसके साथ धोखाधड़ी और जालसाजी की है। पुलिस ने केस दर्ज किया था।
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हिसार।
सीजेएम मनप्रीत सिंह की अदालत ने धोखाधड़ी और जालसाजी करने पर ढाणी श्यामलाल के राजेंद्र, लाहौरिया चौक एरिया के शिवकुमार और दिलबाग को दोषी करार दिया है। उनको शुक्रवार को सजा सुनाई जाएगी। अदालत ने आरोपी अभिषेक और राजन को बरी कर दिया है।
सिटी थाना पुलिस ने इस संबंध में 20 दिसंबर 2012 को केस दर्ज किया था। राजीव नगर के विवेक आनंद ने पुलिस को शिकायत दी थी कि उसके मकान की रजिस्ट्री व कुछ अन्य कागजात शिवकुमार के पास रखे थे। उसे रुपयों की जरूरत थी। मैंने शिवकुुमार से जिक्र किया तो उसने सोसायटी से लोन दिलाने की बात कही। फिर वह उसे आजकल की बात कह टरकाता रहा। फिर मैंने उससे जोर देकर बात की तो उसने कहा कि जब तक लोन नहीं होता, वह उसे चार लाख रुपये दिला देता है। दो प्रतिशत के हिसाब से ब्याज देेना होगा। मैंने हां कर दी। तब उसने उसके कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराए। उसके बाद वह कहने लगा कि वे कागजात डोगरान मोहल्ले में कहीं गुम हो गए हैं। विवेक ने इस पर डोगरान मोहल्ला चौकी में रपट दर्ज कराकर तहसील से रजिस्ट्री की नई कॉपी निकलवा ली। कुछ दिन बाद एक वकील ने उनको लीगल नोटिस भेजकर कहा कि आप अपना मकान 14 लाख में बेचकर 12.50 लाख रुपये हासिल कर चुके हैं। वे बाकी रकम लेकर मकान की रजिस्ट्री कराएं। विवेक ने कहा था कि कोरे कागजों पर हस्ताक्षर कराकर उक्त लोगों ने फर्जी एग्रीमेंट तैयार कर उसके साथ धोखाधड़ी और जालसाजी की है। पुलिस ने केस दर्ज किया था।
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