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Hisar News: निगमायुक्त मुख्य सचिव के सामने आईसीसीसी प्रोजेक्ट करेंगे प्रस्तुत
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हिसार। निगमायुक्त नीरज मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी सामने इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सिस्टम (आईसीसीसी) प्रोजेक्ट को प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान वह मुख्य सचिव को प्रोजेक्ट की विस्तृत कार्य योजना (डीपीआर) से अवगत करवाएंगे। मुख्य सचिव की हरी झंडी मिलने के बाद ही इस प्रोजेक्ट को मंजूर देने के लिए मुख्यमंत्री के समक्ष पेश किया जाएगा।
प्रदेश सरकार की तरफ से गुरुग्राम, फरीदाबाद और करनाल में यह प्रोजेक्ट लागू किया गया है। करनाल व फरीदाबाद में स्मार्ट सिटी के तहत यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया, जबकि गुरुग्राम ने अपने स्तर पर इस प्रोजेक्ट को लागू किया। इसके बाद प्रदेश सरकार की तरफ से सभी नगर निगमों में इस प्रोजेक्ट को लागू करने की योजना है। इसके तहत पहले हिसार नगर निगम में इसे लागू किया जाएगा।
यह होता है इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर
आईसीसीसी सिस्टम नागरिक सेवाओं को एक जगह पर ला देता है। इसके जरिये यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहरों में हो रहे कामों की एक जगह से निगरानी की जा सके। इस सिस्टम की मदद से शहर के ट्रैफिक, नागरिक सुविधाओं, चिकित्सीय संसाधनों और आपराधिक घटनाओं की निगरानी की जा सकेगी।
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शहर में 296 जगहों का किया चयन
इस प्रोजेक्ट के तहत शहर में 296 जगहों पर एक हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसमें 85 सार्वजनिक जगह, 12 रेलवे साइट, 16 धार्मिक स्थल, 64 स्कूल, 18 पार्किंग, 5 पार्क, 33 बाजार शामिल हैं।
इन सेवाओं की होगी निगरानी
यातायात-इसके लिए सभी ट्रैफिक लाइट पर सीसीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनकी मदद से यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों का चालान किया जा सकेगा। साथ ही ट्रैफिक लाइटों का संचालन भी किया जा सकेगा।
सफाई-सीसीटीवी कैमरों की मदद से मेन डंपिंग स्टेशन व सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट की निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियों की भी निगरानी इस सेंटर की मदद से हो सकेगी।
स्ट्रीट लाइट-शहर की सभी स्ट्रीट लाइट को इस सेंटर से जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद इनका संचालन एक ही जगह से किया जा सकेगा। साथ ही अगर कोई स्ट्रीट लाइट खराब हो जाती है तो उसका भी तुरंत पता लगाया जा सकेगा।
सीवर व पेयजल-इस सेंटर के जरिये सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की भी निगरानी की जा सकेगी। इसके जरिये यह पता लगाया जा सकेगा कि कितना पानी शहर में सप्लाई किया जा रहा है। साथ ही पानी की शुद्धता भी पता लगेगा। इसके अलावा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में कितना पानी पहुंच रहा है, इसकी भी जानकारी मिल सकेगी।
सुरक्षा-इस प्रोजेक्ट की मदद से सार्वजनिक जगहों जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, जिला नागरिक अस्पताल, कॉलेज, स्कूल, धार्मिक स्थल, सामुदायिक केंद्र, बाजार आदि की निगरानी की जा सकेगी।
प्रदूषण-इससे शहर की वायु गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा सकेगी। अगर वायु प्रदूषण ज्यादा मिलता है तो तुरंत राहत के लिए कदम उठाए जा सकेंगे।
फीडबैक-इस सिस्टम के जरिये शहरवासी का फीडबैक भी लिया जा सकेगा। वह अपनी शिकायतें व समस्याएं भी दर्ज करवा सकेंगे।
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निगमायुक्तों की कमेटी का भी किया था गठन
मुख्य सचिव ने इस प्रोजेक्ट के संबंध में चार-पांच निगमों के निगमायुक्तों की एक कमेटी का गठन भी किया था। इस कमेटी ने करनाल, गुरुग्राम व फरीदाबाद का दौरा कर वहां लागू किए इस प्रोजेक्ट का अवलोकन किया था। इस दौरान कमेटी ने कुछ सुझाव और दिए। इन सुझावों को निगम ने अपनी डीपीआर में शामिल किया है। यह कमेटी भी अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव के सामने रखेगी।
20 जुलाई को मुख्य सचिव के सामने आईसीसीसी की डीपीआर मंजूरी के लिए रखी जाएगी। मुख्य सचिव की मंजूरी मिलने के बाद बजट के प्रावधान के लिए इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- नीरज, निगमायुक्त।
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प्रदेश सरकार की तरफ से गुरुग्राम, फरीदाबाद और करनाल में यह प्रोजेक्ट लागू किया गया है। करनाल व फरीदाबाद में स्मार्ट सिटी के तहत यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया, जबकि गुरुग्राम ने अपने स्तर पर इस प्रोजेक्ट को लागू किया। इसके बाद प्रदेश सरकार की तरफ से सभी नगर निगमों में इस प्रोजेक्ट को लागू करने की योजना है। इसके तहत पहले हिसार नगर निगम में इसे लागू किया जाएगा।
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यह होता है इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर
आईसीसीसी सिस्टम नागरिक सेवाओं को एक जगह पर ला देता है। इसके जरिये यह सुनिश्चित किया जाएगा कि शहरों में हो रहे कामों की एक जगह से निगरानी की जा सके। इस सिस्टम की मदद से शहर के ट्रैफिक, नागरिक सुविधाओं, चिकित्सीय संसाधनों और आपराधिक घटनाओं की निगरानी की जा सकेगी।
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शहर में 296 जगहों का किया चयन
इस प्रोजेक्ट के तहत शहर में 296 जगहों पर एक हजार से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इसमें 85 सार्वजनिक जगह, 12 रेलवे साइट, 16 धार्मिक स्थल, 64 स्कूल, 18 पार्किंग, 5 पार्क, 33 बाजार शामिल हैं।
इन सेवाओं की होगी निगरानी
यातायात-इसके लिए सभी ट्रैफिक लाइट पर सीसीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इनकी मदद से यातायात नियम तोड़ने वाले वाहनों का चालान किया जा सकेगा। साथ ही ट्रैफिक लाइटों का संचालन भी किया जा सकेगा।
सफाई-सीसीटीवी कैमरों की मदद से मेन डंपिंग स्टेशन व सेकेंडरी डंपिंग प्वाइंट की निगरानी की जा सकेगी। इसके अलावा निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियों की भी निगरानी इस सेंटर की मदद से हो सकेगी।
स्ट्रीट लाइट-शहर की सभी स्ट्रीट लाइट को इस सेंटर से जोड़ दिया जाएगा। इसके बाद इनका संचालन एक ही जगह से किया जा सकेगा। साथ ही अगर कोई स्ट्रीट लाइट खराब हो जाती है तो उसका भी तुरंत पता लगाया जा सकेगा।
सीवर व पेयजल-इस सेंटर के जरिये सभी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट व वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की भी निगरानी की जा सकेगी। इसके जरिये यह पता लगाया जा सकेगा कि कितना पानी शहर में सप्लाई किया जा रहा है। साथ ही पानी की शुद्धता भी पता लगेगा। इसके अलावा सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में कितना पानी पहुंच रहा है, इसकी भी जानकारी मिल सकेगी।
सुरक्षा-इस प्रोजेक्ट की मदद से सार्वजनिक जगहों जैसे रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, जिला नागरिक अस्पताल, कॉलेज, स्कूल, धार्मिक स्थल, सामुदायिक केंद्र, बाजार आदि की निगरानी की जा सकेगी।
प्रदूषण-इससे शहर की वायु गुणवत्ता पर भी नजर रखी जा सकेगी। अगर वायु प्रदूषण ज्यादा मिलता है तो तुरंत राहत के लिए कदम उठाए जा सकेंगे।
फीडबैक-इस सिस्टम के जरिये शहरवासी का फीडबैक भी लिया जा सकेगा। वह अपनी शिकायतें व समस्याएं भी दर्ज करवा सकेंगे।
निगमायुक्तों की कमेटी का भी किया था गठन
मुख्य सचिव ने इस प्रोजेक्ट के संबंध में चार-पांच निगमों के निगमायुक्तों की एक कमेटी का गठन भी किया था। इस कमेटी ने करनाल, गुरुग्राम व फरीदाबाद का दौरा कर वहां लागू किए इस प्रोजेक्ट का अवलोकन किया था। इस दौरान कमेटी ने कुछ सुझाव और दिए। इन सुझावों को निगम ने अपनी डीपीआर में शामिल किया है। यह कमेटी भी अपनी रिपोर्ट मुख्य सचिव के सामने रखेगी।
20 जुलाई को मुख्य सचिव के सामने आईसीसीसी की डीपीआर मंजूरी के लिए रखी जाएगी। मुख्य सचिव की मंजूरी मिलने के बाद बजट के प्रावधान के लिए इसे मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा। वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- नीरज, निगमायुक्त।