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Hisar News: आर्यनगर की मुक्केबाज सोनिया का रजत पदक पक्का
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आर्यनगर की मुक्केबाज सोनिया का रजत पदक पक्का।
हिसार। उज्बेकिस्तान के ताशकंद में 1 से 16 मई तक अंडर-15 और अंडर-17 की एशियाई बॉक्सिंग चैंपियनशिप आयोजित की जा रही है। इसमें गांव आर्यनगर निवासी अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज सोनिया भी अंडर-15 आयु वर्ग में खेल रही हैं।
उन्होंने शनिवार को आयोजित सेमीफाइनल मैच जीतकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस सफलता के साथ ही उन्होंने भारत के लिए रजत पदक पक्का कर लिया है। उनके कोच मेवा सिंह ने बताया कि सोनिया का फाइनल मुकाबला 12 मई को होगा। उन्होंने सोनिया के अच्छे प्रदर्शन की कामना की है।
गांव शाहपुर स्थित न्यू मानव इंटरनेशनल स्कूल, शाहपुर के निदेशक कुलदीप राजलीवाल और प्रधानाचार्य शिव कुमार शर्मा ने बताया कि सोनिया उनके विद्यालय में कक्षा नौ की छात्रा हैं। कोच मेवा सिंह ने बताया कि सोनिया ने पहले एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में भी खेला था, लेकिन कोच के सुझाव पर उन्होंने मुक्केबाजी को चुना। वह एमएस स्पोर्ट्स ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में दो साल से प्रशिक्षण ले रही हैं।
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मां ने बताया मातृ दिवस का उपहार
सोनिया दो बहनों में बड़ी हैं। उनकी छोटी बहन तानिया नौ साल की है। मां सुशीला नर्स हैं और पिता कलाधर बिजली का काम करते हैं। सुशीला ने बताया कि शुरुआत में बेटी को खेलों में भेजना आर्थिक और सामाजिक चुनौतीपूर्ण था। कुछ लोग उन्हें बेटियों को घर में रखने की सलाह देते थे। लेकिन अब बेटी की सफलता उनके लिए मातृ दिवस का खास तोहफा बन गई है। इसलिए गांव लौटने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया जाएगा।
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उन्होंने शनिवार को आयोजित सेमीफाइनल मैच जीतकर फाइनल में प्रवेश कर लिया है। इस सफलता के साथ ही उन्होंने भारत के लिए रजत पदक पक्का कर लिया है। उनके कोच मेवा सिंह ने बताया कि सोनिया का फाइनल मुकाबला 12 मई को होगा। उन्होंने सोनिया के अच्छे प्रदर्शन की कामना की है।
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गांव शाहपुर स्थित न्यू मानव इंटरनेशनल स्कूल, शाहपुर के निदेशक कुलदीप राजलीवाल और प्रधानाचार्य शिव कुमार शर्मा ने बताया कि सोनिया उनके विद्यालय में कक्षा नौ की छात्रा हैं। कोच मेवा सिंह ने बताया कि सोनिया ने पहले एथलेटिक्स और वेटलिफ्टिंग में भी खेला था, लेकिन कोच के सुझाव पर उन्होंने मुक्केबाजी को चुना। वह एमएस स्पोर्ट्स ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट में दो साल से प्रशिक्षण ले रही हैं।
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मां ने बताया मातृ दिवस का उपहार
सोनिया दो बहनों में बड़ी हैं। उनकी छोटी बहन तानिया नौ साल की है। मां सुशीला नर्स हैं और पिता कलाधर बिजली का काम करते हैं। सुशीला ने बताया कि शुरुआत में बेटी को खेलों में भेजना आर्थिक और सामाजिक चुनौतीपूर्ण था। कुछ लोग उन्हें बेटियों को घर में रखने की सलाह देते थे। लेकिन अब बेटी की सफलता उनके लिए मातृ दिवस का खास तोहफा बन गई है। इसलिए गांव लौटने पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया जाएगा।