{"_id":"592c69624f1c1bed14bdbddc","slug":"fathebad-scam-3-caror-dispute-fatehabad","type":"story","status":"publish","title_hn":"तहसील कार्यालय में घोटाले की आशंका, 3 करोड़ के रजिस्टर्ड स्टांप 6 सौ रुपये में दिए डेवलपर को ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तहसील कार्यालय में घोटाले की आशंका, 3 करोड़ के रजिस्टर्ड स्टांप 6 सौ रुपये में दिए डेवलपर को
ब्यूरो/अमर उजाला/फतेहाबाद
Updated Tue, 30 May 2017 12:03 AM IST
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तहसील कार्यालय में स्टांप चोरी के नाम पर घोटाले की आशंका सामने आई है। प्रथम दृष्टया इस मामले में तहसीलदार की ओर से नियमों को ताक पर रखकर एक ही जमीन के आठ टुकड़े करके डेवलेपर को जमीन के टुकड़े को विकसित करने के अधिकार सौंपने का मामला सामने आ रहा है।
इतना ही नहीं, महज 35 मिनट के समय में तहसीलदार द्वारा इन 8 एमओयू को रजिस्टर्ड कर दिया। इतना ही नहीं, सात टुकड़ों को विकसित करने का एमओयू महज सौ-सौ रुपये के स्टांप पर रजिस्टर्ड कर दिए गए। जबकि एक तो महज 10 रुपये के स्टांप पर भी जारी किया गया। तहसील कार्यालय के सूत्रों की मानें तो नियमानुसार जमीन के इन टुकड़ों की रजिस्ट्री की जाती तो सरकार को लगभग 3 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हो सकती थी।
स्टांप ड्यूटी को नजरअंदाज करके एमओयू करने का ये मामला खुद आरटीआई के जवाब में तहसील कार्यालय द्वारा दिए गए जवाब के बाद सामने आया है। (तहसील कार्यालय द्वारा खुद तहसीलदार के हस्ताक्षर युक्त जारी दस्तावेजों की प्रति अमर उजाला के पास भी है) सोमवार को सीपीएस सीमा त्रिखा के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने अब इस मामले की जांच उपायुक्त एनके सोलंकी को सौंप दी है जो चार दिन में इस मामले की रिपोर्ट सौंपेंगे। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुशील बिश्रोई ने इस मामले की शिकायत सोमवार को मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा को सौंपी है।
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250 कनाल भूमि के आठ एमओयू में खामियां ही खामियां, लेकिन सब नजरअंदाज
एक आरटीआई के जवाब में तहसील कार्यालय ने खुद ही जानकारी दी है कि ये सारी आवासीय जमीन धांगड़ के रामकिशन के नाम थी जिसमें फतेहाबाद न्यू टाउन की 122 कनाल 7 मरले भूमि रजिस्ट्रेशन नंबर 5773 व 5778 में एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेडिंग) किया गया। इसके अलावा अचाना न्यू टाऊन की कुल 63 कनाल 7 मरले भूमि का रजिस्ट्रेशन नंबर 5771, 5780 व 5781 से एमओयू, सिरसा न्यू टाऊन की कुल 64 कनाल भूमि का रजिस्ट्रेशन नंबर 5772, 5779 और 5782 के तहत एमओयू विकास बिल्ड मार्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया गया है। इस एमओयू के तहत विकास बिल्ड मार्ट को इस 250 कनाल भूमि के आठों टुकड़ों को विकसित करने (कॉलोनी बनाने) का अधिकार दे दिया गया, दरअसल कन्वेंस डीड में जो अधिकार दिए जाते हैं, वही अधिकार एमओयू में ही दे दिए गए हैं। इसके तहत जमीन के टुकड़ों को विकसित करने, उनकी मार्किटिंग करने व उसे बेचने के अधिकार भी शामिल हैं। हैरानी की बात ये है कि इन आठ एमओयू में से 7 महज सौ रूपए के स्टांप पेपर पर करवाए गए जबकि एक एमओयू तो महज 10 रूपए के स्टांप पेपर पर करवा दिया गया। इसके अलावा एमओयू नंबर 5780 में विकास बिल्ड मार्ट के प्रतिनिधि अशोक व नंबरदार जगदीप के अंगूठों की जगह पर महज अशोक कुमार के ही अंगूठे के निशान दोनों जगहों पर लगा दिए गए। इसी तरह इससे अगले रजिस्टर्ड एमओयू में विकास बिल्ड मार्ट के प्रतिनिधि अशोक कुमार के हस्ताक्षर के बिना ही एमओयू रजिस्टर्ड कर दिया गया। ये भी गंभीर लापरवाही है। हैरानी की बात ये है कि ये सभी आठों एमओयू 6 जनवरी 2017 को महज 35 मिनट के अंतराल में किए गए हैं। ये बात भी इस सारे मसले को संदेहास्पद बनाती है।
पहले डेवलेपर को खुद सौंप दिए रजिस्टर्ड स्टांप, फिर चोरी के बारे एसडीएम को दी सूचना
इस सारे मसले में एक अजीबो गरीब बात ये भी निकल कर आई है कि खुद तहसीलदार नवजीत कौर बराड़ ने 6 जनवरी 2017 को इन आठों एमओयू को रजिस्टर्ड किया और सभी ओरिजनल स्टांप रजिस्ट्रेशन अशोक कुमार को सौंप दिए गए। फिर इसके ठीक 15 दिन बाद तहसीलदार कार्यालय की ओर से एक पत्र एसडीएम कार्यालय को भेजा गया, जिसमें इन्हीं आठों स्टांप ड्यूटी चोरी की सूचना दी गई और उनसे सलाह मांगी गई कि कितने स्टांप ड्यूटी चोरी हुई। यहीं से मामले का खुलासा हुआ। दरअसल जिस समय इन 8 एमओयू का रजिस्ट्रेशन किया गया, उसी समय स्थानीय सोमा टाऊन के एक प्लाट धारक के प्लाट की रजिस्ट्री भी हुई जिसने 20 मरले के प्लाट की रजिस्ट्री के स्टांप डयूटी के तौर पर 1 लाख 29 हजार और रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 15 हजार रुपये चुकाए हुए थे। उसके स्टांप चोरी की सूचना भी एसडीएम को दी गई जबकि उसने पूरे पैसे चुका कर स्टांप हासिल किए थे। जब उसके पास एसडीएम का नोटिस भेजा गया तो उसने पेश होकर बताया कि उसके पास ओरिजिनल स्टांप हैं जो तहसीलदार कार्यालय ने उसे दिए हैं।
डीसी को दो एकड़ तक एनओसी की पावर, इसलिए एक ही जमीन के हुए आठ टुकड़े
जानकारी के अनुसार इस मामले में 250 कनाल भूमि का एक साथ एमओयू हो सकता था। लेकिन ऐसा होने की सूरत में फाइल को चंडीगढ़ भेजना पड़ता और इस पर डवलपेंट चार्ज बहुत ज्यादा देने पड़ते लेकिन जमीन के आठ टुकड़े करके एमओयू करने में ये फाइल डीसी दफ्तर में रही क्योंकि दो एकड़ तक सीएलयू देने की पावर उपायुक्त के पास भी होती है।
स्टांप चोरी का ये मामला मेरे सामने आया है। इसलिए इस मामले की जांच डीसी एनके सोलंकी को सौंप दी गई है। उन्हें कहा गया है कि चार दिनों में इसकी रिपोर्ट सौंपी जाए। अगर तहसीलदार दोषी पाई गई तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
सीमा त्रिखा, मुख्य संसदीय सचिव, हरियाणा सरकार।
इस मामले में पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी का पत्र बाद में आया था। इसलिए सभी रजिस्ट्रियां इंपाउंड कर दी गई थी।
नवजीत कौर बराड़, तहसीलदार, फतेहाबाद।
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इतना ही नहीं, महज 35 मिनट के समय में तहसीलदार द्वारा इन 8 एमओयू को रजिस्टर्ड कर दिया। इतना ही नहीं, सात टुकड़ों को विकसित करने का एमओयू महज सौ-सौ रुपये के स्टांप पर रजिस्टर्ड कर दिए गए। जबकि एक तो महज 10 रुपये के स्टांप पर भी जारी किया गया। तहसील कार्यालय के सूत्रों की मानें तो नियमानुसार जमीन के इन टुकड़ों की रजिस्ट्री की जाती तो सरकार को लगभग 3 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हो सकती थी।
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स्टांप ड्यूटी को नजरअंदाज करके एमओयू करने का ये मामला खुद आरटीआई के जवाब में तहसील कार्यालय द्वारा दिए गए जवाब के बाद सामने आया है। (तहसील कार्यालय द्वारा खुद तहसीलदार के हस्ताक्षर युक्त जारी दस्तावेजों की प्रति अमर उजाला के पास भी है) सोमवार को सीपीएस सीमा त्रिखा के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने अब इस मामले की जांच उपायुक्त एनके सोलंकी को सौंप दी है जो चार दिन में इस मामले की रिपोर्ट सौंपेंगे। बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान सुशील बिश्रोई ने इस मामले की शिकायत सोमवार को मुख्य संसदीय सचिव सीमा त्रिखा को सौंपी है।
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250 कनाल भूमि के आठ एमओयू में खामियां ही खामियां, लेकिन सब नजरअंदाज
एक आरटीआई के जवाब में तहसील कार्यालय ने खुद ही जानकारी दी है कि ये सारी आवासीय जमीन धांगड़ के रामकिशन के नाम थी जिसमें फतेहाबाद न्यू टाउन की 122 कनाल 7 मरले भूमि रजिस्ट्रेशन नंबर 5773 व 5778 में एमओयू (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टेडिंग) किया गया। इसके अलावा अचाना न्यू टाऊन की कुल 63 कनाल 7 मरले भूमि का रजिस्ट्रेशन नंबर 5771, 5780 व 5781 से एमओयू, सिरसा न्यू टाऊन की कुल 64 कनाल भूमि का रजिस्ट्रेशन नंबर 5772, 5779 और 5782 के तहत एमओयू विकास बिल्ड मार्ट प्राइवेट लिमिटेड के साथ किया गया है। इस एमओयू के तहत विकास बिल्ड मार्ट को इस 250 कनाल भूमि के आठों टुकड़ों को विकसित करने (कॉलोनी बनाने) का अधिकार दे दिया गया, दरअसल कन्वेंस डीड में जो अधिकार दिए जाते हैं, वही अधिकार एमओयू में ही दे दिए गए हैं। इसके तहत जमीन के टुकड़ों को विकसित करने, उनकी मार्किटिंग करने व उसे बेचने के अधिकार भी शामिल हैं। हैरानी की बात ये है कि इन आठ एमओयू में से 7 महज सौ रूपए के स्टांप पेपर पर करवाए गए जबकि एक एमओयू तो महज 10 रूपए के स्टांप पेपर पर करवा दिया गया। इसके अलावा एमओयू नंबर 5780 में विकास बिल्ड मार्ट के प्रतिनिधि अशोक व नंबरदार जगदीप के अंगूठों की जगह पर महज अशोक कुमार के ही अंगूठे के निशान दोनों जगहों पर लगा दिए गए। इसी तरह इससे अगले रजिस्टर्ड एमओयू में विकास बिल्ड मार्ट के प्रतिनिधि अशोक कुमार के हस्ताक्षर के बिना ही एमओयू रजिस्टर्ड कर दिया गया। ये भी गंभीर लापरवाही है। हैरानी की बात ये है कि ये सभी आठों एमओयू 6 जनवरी 2017 को महज 35 मिनट के अंतराल में किए गए हैं। ये बात भी इस सारे मसले को संदेहास्पद बनाती है।
पहले डेवलेपर को खुद सौंप दिए रजिस्टर्ड स्टांप, फिर चोरी के बारे एसडीएम को दी सूचना
इस सारे मसले में एक अजीबो गरीब बात ये भी निकल कर आई है कि खुद तहसीलदार नवजीत कौर बराड़ ने 6 जनवरी 2017 को इन आठों एमओयू को रजिस्टर्ड किया और सभी ओरिजनल स्टांप रजिस्ट्रेशन अशोक कुमार को सौंप दिए गए। फिर इसके ठीक 15 दिन बाद तहसीलदार कार्यालय की ओर से एक पत्र एसडीएम कार्यालय को भेजा गया, जिसमें इन्हीं आठों स्टांप ड्यूटी चोरी की सूचना दी गई और उनसे सलाह मांगी गई कि कितने स्टांप ड्यूटी चोरी हुई। यहीं से मामले का खुलासा हुआ। दरअसल जिस समय इन 8 एमओयू का रजिस्ट्रेशन किया गया, उसी समय स्थानीय सोमा टाऊन के एक प्लाट धारक के प्लाट की रजिस्ट्री भी हुई जिसने 20 मरले के प्लाट की रजिस्ट्री के स्टांप डयूटी के तौर पर 1 लाख 29 हजार और रजिस्ट्रेशन फीस के तौर पर 15 हजार रुपये चुकाए हुए थे। उसके स्टांप चोरी की सूचना भी एसडीएम को दी गई जबकि उसने पूरे पैसे चुका कर स्टांप हासिल किए थे। जब उसके पास एसडीएम का नोटिस भेजा गया तो उसने पेश होकर बताया कि उसके पास ओरिजिनल स्टांप हैं जो तहसीलदार कार्यालय ने उसे दिए हैं।
डीसी को दो एकड़ तक एनओसी की पावर, इसलिए एक ही जमीन के हुए आठ टुकड़े
जानकारी के अनुसार इस मामले में 250 कनाल भूमि का एक साथ एमओयू हो सकता था। लेकिन ऐसा होने की सूरत में फाइल को चंडीगढ़ भेजना पड़ता और इस पर डवलपेंट चार्ज बहुत ज्यादा देने पड़ते लेकिन जमीन के आठ टुकड़े करके एमओयू करने में ये फाइल डीसी दफ्तर में रही क्योंकि दो एकड़ तक सीएलयू देने की पावर उपायुक्त के पास भी होती है।
स्टांप चोरी का ये मामला मेरे सामने आया है। इसलिए इस मामले की जांच डीसी एनके सोलंकी को सौंप दी गई है। उन्हें कहा गया है कि चार दिनों में इसकी रिपोर्ट सौंपी जाए। अगर तहसीलदार दोषी पाई गई तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
सीमा त्रिखा, मुख्य संसदीय सचिव, हरियाणा सरकार।
इस मामले में पांच प्रतिशत स्टांप ड्यूटी का पत्र बाद में आया था। इसलिए सभी रजिस्ट्रियां इंपाउंड कर दी गई थी।
नवजीत कौर बराड़, तहसीलदार, फतेहाबाद।