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इंजेक्शन कक्ष में बैठे थे आउटसाइडर, जगह-जगह लगे थे कचरे के ढ़ेर
Updated Sat, 22 Sep 2018 01:10 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
भिवानी। सामान्य अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय से निदेशक डॉ. रमेश धनखड़ पहुंचे। निरीक्षण में खामियां मिली तो उनके चेहरे पर नाराजगी थी और सिविल सर्जन डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता कर्मचारियों को फटकार लगा रहे थे। ओपीडी के इंजेक्शन कक्ष में आउटसाइडर बैठे थे तो कुछ स्टाफ सदस्य अपनी सीट से गायब थे। गंदगी का मुद्दा छाया रहा। गंदगी से खफा सिविल सर्जन ने स्टाफ नर्स को चेतावनी दी कि गंदगी मिली तो उन पर भी कार्रवाई होगी। ठेकेदार के माध्यम से लगे 178 कर्मचारियों का मुद्दा भी उठा और डायरेक्टर ने स्थानीय अधिकारियों को बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य विभाग से डायरेक्टर और भिवानी जिले के नोडल ऑफिसर डॉ. रमेश धनखड़ शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे सामान्य अस्पताल पहुंचे। जहां सिविल सर्जन डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार व अन्य स्टाफ सदस्यों ने उनका स्वागत किया। डायरेक्टर डॉ. धनखड़ ने सिविल सर्जन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी को साथ लेकर सबसे पहले इमरजेंसी का निरीक्षण किया। ओपीडी में अत्यधिक भीड़ देख यहां व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। जब इंजेक्शन कक्ष में पहुंचे तो वहां पांच-छह युवा बैठे थे। वहां पूछताछ की तो उनमें एक को छोड़ सभी आउटसाइडर थे जो बिना किसी कार्य के बैठे थे। यह देख सिविल सर्जन भड़क गए और कर्मचारी की खासी क्लास लगाई। इसके बाद ओपीडी में गए। वहां गंदगी देखते ही उनके चेहरे पर भी नाराजगी छाई। यह भांपते हुए सिविल सर्जन डॉ. गुप्ता आगे आए और कर्मचारियों की अच्छी खासी क्लास लगाई। ब्लड बैंक पहुंचे तो यहां एलटी तो थी मगर इंचार्ज पैथालॉजिस्ट चिकित्सक नहीं थी। यहां डायरेक्टर करीब 15 से 20 मिनट रूके और रिकॉर्ड जांचा।
यहां के बाद नीकू वार्ड और फिर जच्चा-बच्चा वार्ड का निरीक्षण किया। वार्ड के पीछे जहां दो दिन पहले डीसी ने निरीक्षण किया था, वहां भी निरीक्षण किया जहां अनुबंध आधार पर लगे सफाई कर्मी सफाई करते नजर आए।
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ठेके के कर्मचारियों की ज्यादा शिकायतें
डायरेक्टर जब वार्ड के पिछले हिस्से में निरीक्षण कर रहे थे तो वहां पर झाडू़ थामे कुछ कर्मचारी सफाई कर रहे थे। उन्हें देख डायरेक्टर ने कहा कि इन्हें देख साफ लग रहा है कि खानापूर्ति हो रही है। इसके बाद स्टाफ सदस्यों ने बताया कि पहले जो ठेके पर कर्मचारी थे, उन्हें कुछ ट्रेनिंग दी गई थी। मगर ये तो बिल्कुल ही बेकार हैं। इसके अलावा काम की कहने पर विरोध करते है और काम तक को इंकार कर देते हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के बिना बताए लापता होने की भी शिकायत हुई।
चिकित्सकों और कर्मचारियों का जाना हालचाल
डायरेक्टर रमेश धनखड़ करीब छह साल पहले भिवानी में सिविल सर्जन थे। अब वे डायरेक्टर बन चुके हैं और भिवानी जिले के नोडल ऑफिसर हैं। यहां निरीक्षण के लिए आए तो पुराने चिकित्सकों और कर्मचारियों से भी मिले और उनका हालचाल जाना। उनकी समस्याएं भी सुनी और समाधान का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य विभाग ही है बीमार
डायरेक्टर के समक्ष कर्मचारियों ने बताया कि स्टाफ क्वार्टर ऐसे हैं कि हर समय छत टपकती रहती है। कीचन में खाना बनाओ तो भी ऊपर से पानी टपकता रहता है। हम मरीजों का इलाज करते हैं मगर स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार है।
वर्जन:::
अस्पताल का निरीक्षण किया है और कुछ खामियां मिली है, जिन्हें दूर किया जाएगा। इस बारे में सीएमओ और पीएमओ से बातचीत की है। ठेके पर लगे कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था की जाएगी। दवाइयों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
-डॉ. रमेश धनखड़, डायरेक्टर स्वास्थ्य विभाग
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भिवानी। सामान्य अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा लेने शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग मुख्यालय से निदेशक डॉ. रमेश धनखड़ पहुंचे। निरीक्षण में खामियां मिली तो उनके चेहरे पर नाराजगी थी और सिविल सर्जन डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता कर्मचारियों को फटकार लगा रहे थे। ओपीडी के इंजेक्शन कक्ष में आउटसाइडर बैठे थे तो कुछ स्टाफ सदस्य अपनी सीट से गायब थे। गंदगी का मुद्दा छाया रहा। गंदगी से खफा सिविल सर्जन ने स्टाफ नर्स को चेतावनी दी कि गंदगी मिली तो उन पर भी कार्रवाई होगी। ठेकेदार के माध्यम से लगे 178 कर्मचारियों का मुद्दा भी उठा और डायरेक्टर ने स्थानीय अधिकारियों को बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था करने के निर्देश दिए।
स्वास्थ्य विभाग से डायरेक्टर और भिवानी जिले के नोडल ऑफिसर डॉ. रमेश धनखड़ शुक्रवार सुबह करीब 11 बजे सामान्य अस्पताल पहुंचे। जहां सिविल सर्जन डॉ. आदित्य स्वरूप गुप्ता, कार्यकारी प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार व अन्य स्टाफ सदस्यों ने उनका स्वागत किया। डायरेक्टर डॉ. धनखड़ ने सिविल सर्जन, प्रधान चिकित्सा अधिकारी को साथ लेकर सबसे पहले इमरजेंसी का निरीक्षण किया। ओपीडी में अत्यधिक भीड़ देख यहां व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। जब इंजेक्शन कक्ष में पहुंचे तो वहां पांच-छह युवा बैठे थे। वहां पूछताछ की तो उनमें एक को छोड़ सभी आउटसाइडर थे जो बिना किसी कार्य के बैठे थे। यह देख सिविल सर्जन भड़क गए और कर्मचारी की खासी क्लास लगाई। इसके बाद ओपीडी में गए। वहां गंदगी देखते ही उनके चेहरे पर भी नाराजगी छाई। यह भांपते हुए सिविल सर्जन डॉ. गुप्ता आगे आए और कर्मचारियों की अच्छी खासी क्लास लगाई। ब्लड बैंक पहुंचे तो यहां एलटी तो थी मगर इंचार्ज पैथालॉजिस्ट चिकित्सक नहीं थी। यहां डायरेक्टर करीब 15 से 20 मिनट रूके और रिकॉर्ड जांचा।
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यहां के बाद नीकू वार्ड और फिर जच्चा-बच्चा वार्ड का निरीक्षण किया। वार्ड के पीछे जहां दो दिन पहले डीसी ने निरीक्षण किया था, वहां भी निरीक्षण किया जहां अनुबंध आधार पर लगे सफाई कर्मी सफाई करते नजर आए।
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ठेके के कर्मचारियों की ज्यादा शिकायतें
डायरेक्टर जब वार्ड के पिछले हिस्से में निरीक्षण कर रहे थे तो वहां पर झाडू़ थामे कुछ कर्मचारी सफाई कर रहे थे। उन्हें देख डायरेक्टर ने कहा कि इन्हें देख साफ लग रहा है कि खानापूर्ति हो रही है। इसके बाद स्टाफ सदस्यों ने बताया कि पहले जो ठेके पर कर्मचारी थे, उन्हें कुछ ट्रेनिंग दी गई थी। मगर ये तो बिल्कुल ही बेकार हैं। इसके अलावा काम की कहने पर विरोध करते है और काम तक को इंकार कर देते हैं। इसके अलावा कर्मचारियों के बिना बताए लापता होने की भी शिकायत हुई।
चिकित्सकों और कर्मचारियों का जाना हालचाल
डायरेक्टर रमेश धनखड़ करीब छह साल पहले भिवानी में सिविल सर्जन थे। अब वे डायरेक्टर बन चुके हैं और भिवानी जिले के नोडल ऑफिसर हैं। यहां निरीक्षण के लिए आए तो पुराने चिकित्सकों और कर्मचारियों से भी मिले और उनका हालचाल जाना। उनकी समस्याएं भी सुनी और समाधान का आश्वासन दिया।
स्वास्थ्य विभाग ही है बीमार
डायरेक्टर के समक्ष कर्मचारियों ने बताया कि स्टाफ क्वार्टर ऐसे हैं कि हर समय छत टपकती रहती है। कीचन में खाना बनाओ तो भी ऊपर से पानी टपकता रहता है। हम मरीजों का इलाज करते हैं मगर स्वास्थ्य विभाग खुद बीमार है।
वर्जन:::
अस्पताल का निरीक्षण किया है और कुछ खामियां मिली है, जिन्हें दूर किया जाएगा। इस बारे में सीएमओ और पीएमओ से बातचीत की है। ठेके पर लगे कर्मचारियों की बायोमेट्रिक हाजिरी की व्यवस्था की जाएगी। दवाइयों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी।
-डॉ. रमेश धनखड़, डायरेक्टर स्वास्थ्य विभाग