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असलहा माफिया के खिलाफ सख्ती की तैयारी: रुपये दो असलहे का लाइसेंस लो, अब नहीं चलेगा खेल

Fri, 15 Sep 2023 11:54 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Fri, 15 Sep 2023 11:54 AM IST
सार

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति डीएम से मिल गई है। जल्द ही पुलिस इस प्रकरण में चार्जशीट दाखिल करेगी और फिर सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई कर अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति को जब्त किया जाएगा।

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Preparations for strict action against arms mafia gangsters will be arrested
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

गोरखपुर जिले में तकरीबन 200 लोगों को असलहे का फर्जी लाइसेंस देने वाले धंधेबाजों पर अब जल्द ही बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। डीएम दफ्तर के दो असलहा बाबू और एक कंप्यूटर ऑपरेटर की मदद से रवि गन हाउस से फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण की जांच अब पूरी हो गई है।

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डीएम ने निलंबित कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति दे दी है। पुलिस इस गिरोह के सरगना पूर्व असलहा बाबू रहे राम सिंह, अशोक गुप्ता और कंप्यूटर ऑपरेटर अजय गिरी पर गैंगस्टर की कार्रवाई करेगी। खबर है कि धंधेबाजों की अवैध कमाई से हासिल संपत्ति पर बुलडोजर भी चल सकता है।
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जानकारी के मुताबिक, 4 अगस्त 2019 को फर्जी शस्त्र लाइसेंस का प्रकरण सामने आया था। गोरखनाथ थाना क्षेत्र के रहने वाले तनवीर अहमद को पुलिस ने गिरफ्तार कर जिले में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। तत्कालीन असलहा बाबू राम सिंंह ने इस मामले में केस दर्ज कराया था।
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पुलिस की जांच में पता चला कि असलहा बाबू रहे राम सिंह, पूर्व असलहा बाबू अशोक गुप्ता, सेवानिवृत्त बाबू विजय प्रताप श्रीवास्तव, संविदाकर्मी अजय प्रताप गिरी भी गिरोह से जुड़े थे। नाम प्रकाश में आने के बाद पुलिस ने इनके साथ ही मुख्य आरोपी रवि गन हाउस के संचालक रवि पांडेय समेत 15 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भिजवाया।
 

विवेचना में आरोप की पुष्टि होने पर विजय प्रताप, विकास तिवारी, तनवीर, शमशेर आलम, प्रणय प्रताप, शमशाद, विजय प्रताप श्रीवास्तव, आजम लारी, शाहिद अली, अशफाक अहमद, विवेक मद्धेशिया, रवि प्रताप पांडेय, राम सिंह, अशोक गुप्ता और अजय प्रताप गिरी को आरोपी बनाया। लेकिन कुछ सरकारी कर्मियों की संलिप्तता की वजह से कुछ लोगों के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की गई।

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20 जुलाई 2021 को तत्कालीन एसएसपी दिनेश कुमार पी ने दोबारा जांच के निर्देश दे दिए। इस प्रकरण के लिए उन्होंने एसआईटी भी गठित कर दी। तब से प्रकरण में पुलिस की जांच जारी थी, जो अब पूरी हो गई है। डीएम के पास इसकी संस्तुति के लिए पुलिस ने पत्राचार किया था। अब आदेश मिल गया है और पुलिस चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। पुलिस की जांच में सामने आया था कि करीब 200 लोगों को फर्जी लाइसेंस जारी किए गए थे, लेकिन सभी की बरामदगी नहीं हो पाई थी।

कुछ आरोपियों पर हो चुकी है गैंगस्टर की कार्रवाई
डीएम के निर्देश पर मार्च 2021 में तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक कैंट अनिल उपाध्याय ने विजय प्रताप सिंह, विकास तिवारी, तनवीर, शमशेर आलम, प्रणय प्रताप सिंह, शमशाद, आजम लारी, शाहिद अली, अशफाक अहमद, विवेक मद्धेशिया, रवि प्रताप पांडेय अजय प्रताप गिरी के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई करते हुए केस दर्ज कराया। लेकिन पूरा चार्जशीट न होने की वजह से सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई नहीं हो पाई।

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गन हाउस से चल रहा था फर्जीवाड़ा

फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनवाने का खेल टाउनहाल स्थित गन हाउस से चल रहा था। गिरोह के सदस्य कुछ प्रापर्टी डीलर व नवधनाढ्यों से मोटी रकम वसूल कर फर्जी लाइसेंस बनवाते थे। गिरोह से जुड़े गोपी के घर पर पुलिस ने छापा मारा तो फर्जी लाइसेंस बनाने के सामान बरामद हुए। उसके घर पर लाइसेंस की किताब, मजिस्ट्रेट की मुहर, कई रंग के पेन और फाइलें रखी गई थीं।

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शस्त्र कार्यालय: कभी पैर रखने की जगह नहीं थी, अब रहता है सन्नाटा
कलेक्ट्रेट स्थित जिस शस्त्र कार्यालय में चार साल पहले तक पूरे दिन पैर रखने की जगह नहीं मिलती थी, फर्जी शस्त्र लाइसेंस का मामला सामने आने के बाद से अब सन्नाटा पसरा रहता है। सिर्फ शस्त्र लाइसेंस के नवीनीकरण और वरासत संबंधी मामलों को लेकर ही कुछ लोग वहां पहुंच रहे हैं।

एसपी सिटी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि पुलिस को चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति डीएम से मिल गई है। जल्द ही पुलिस इस प्रकरण में चार्जशीट दाखिल करेगी और फिर सभी आरोपियों पर गैंगस्टर की कार्रवाई कर अवैध कमाई से बनाई गई संपत्ति को जब्त किया जाएगा।






 
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