असलहा माफिया: असलहे के शौकीन...अब लाइसेंस के लिए दूसरे जिलों में किराएदार बनकर कर रहे आवेदन
एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि असलहे के लाइसेंस के लिए किसी भी जिले से आवेदन किया जा सकता है, लेकिन उसकी जांच निवास स्थान वाले जिले से ही की जाएगी। यहां से संस्तुति मिलने के बाद ही उसे लाइसेंस मिल सकता है।
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असलहे के शौकीनों ने अब लाइसेंस हासिल करने के लिए ठिकाना बदल दिया है। वे दूसरे जिलों में लाइसेंस पाने के लिए आवेदन कर रहे हैं। कोई लखनऊ तो कोई पड़ोसी जिले संतकबीरनगर, देवरिया से आवेदन कर रहा है। इसके लिए एक साल से किरायेदार भी बने हैं। अब इनकी फाइल गृह जनपद में जांच के लिए आई है तो ये पुलिस ऑफिस में जुगाड़ तलाश रहे हैं। दूसरे जिलों से आवेदन करने वालों में कई जनप्रतिनिधि भी शामिल हैं।
जानकारी के मुताबिक, फर्जी शस्त्र लाइसेंस प्रकरण आने के बाद से असलहे का लाइसेंस गोरखपुर में नहीं बन रहा है, जबकि आसपास के जिलों में रोक नहीं है। पिछले करीब चार साल में महज सात लाइसेंस ही जारी किए गए हैं। इसमें भी एक खिलाड़ी है, जिसे शूटिंग प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए जाना था। वहीं दूसरा झंगहा थाना क्षेत्र में ढाई लाख के इनामी द्वारा हत्या किए जाने पर पीड़ित परिवार को असलहे का लाइसेंस दिया गया था।
इन दोनों चर्चित मामलों के अलावा चार और लोग लाइसेंस बनवा पाए हैं। बताया जा रहा है कि ये लोग पुलिसकर्मी हैं। एसपी नार्थ मनोज अवस्थी ने बताया कि असलहे के लाइसेंस के लिए किसी भी जिले से आवेदन किया जा सकता है, लेकिन उसकी जांच निवास स्थान वाले जिले से ही की जाएगी। यहां से संस्तुति मिलने के बाद ही उसे लाइसेंस मिल सकता है। कुछ लोगों ने दूसरे जिले से आवेदन किया है। इसकी जांच जारी है।
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केस - एक
सहजनवां क्षेत्र के निवासी जनप्रतिनिधि ने लखनऊ से लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। एक कॉलोनी में पिछले एक साल से किराए पर मकान भी लिए हैं, जिसके आधार पर उन्होंने आवेदन किया है। इन दिनों वह पुलिस ऑफिस में आकर अपनी फाइल को आगे बढ़ाने के लिए पैरवी कर रहे हैं।
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केस - दो
गोरखपुर में रहने वाले एक शख्स ने संतकबीरनगर में असलहे के लाइसेंस के लिए आवेदन किया है। विभिन्न थानों से संस्तुति मिलने के बाद उनकी फाइल पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंची है। जांच के दौरान कुछ शिकायतें मिलने के बाद उनकी फाइल को एक बार फिर गोरखनाथ थाने को जांच के लिए भेज दिया गया है।