गोरखपुर में खून माफिया: लिट्टी-चोखा वाला लाता था डोनर, जरूरतमंद से मिलवाते थे कर्मचारी
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में अवैध रूप से मजदूरों को पैसा का लालच देकर खून बेचने का काम चल रहा है। गुलरिहा पुलिस ने 27 अगस्त को मजदूर गोरख चौहान निवासी कमता बुजुर्ग थाना पनियरा महराजगंज की शिकायत पर केस दर्ज करते हुए सरगना समेत तीन को जेल भिजवा दिया।
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गोरखपुर में खून माफिया गिरोह में शामिल बीआरडी मेडिकल काॅलेज में कार्यरत दो संविदा कर्मचारी समेत तीन लोगों को पुलिस ने बृहस्पतिवार को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया कि आरोपियों में एक पहले लिट्टी-चोखा की दुकान चलाता था।
वह दुकान पर आने वाले मजदूरों को खून देने के लिए रुपयों का लालच देता था तो अंदर के संविदा कर्मचारी खून के जरूरतमंदों को खून माफिया का नंबर देकर उनसे मिलवाने की व्यवस्था करते थे। फिर गिरोह में शामिल सभी एक दूसरे से संपर्क करने के बाद ही डोनर को ब्लड बैंक में भेजकर खून निकलवाकर कर बेच देते थे। पुलिस ने आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान देवरिया जनपद के कोतवाली बोडियास सुल्तान निवासी रजनीश यादव, गुलरिहा के मोगलहा निवासी रामअशीष और बिहार के गोपालगंज निवासी शिवातुल्लाह के रूप में हुई है। रजनीश यादव और राम अशीष संविदा कर्मचारी हैं, जबकि शिवातुल्लाह पास में ही लिट्टी-चोखा की दुकान चलाता है।
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जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंक में अवैध रूप से मजदूरों को पैसा का लालच देकर खून बेचने का काम चल रहा है। गुलरिहा पुलिस ने 27 अगस्त को मजदूर गोरख चौहान निवासी कमता बुजुर्ग थाना पनियरा महराजगंज की शिकायत पर केस दर्ज करते हुए सरगना समेत तीन को जेल भिजवा दिया।
पुलिस ने पूछताछ और मोबाइल नंबर की सीडीआर की मदद से जांच की तो दो कर्मचारियों और एक अन्य के नाम सामने आए। जांच के बाद पुलिस ने मेडिकल कॉलेज के स्लीपर काॅलोनी में कमरा नंबर 100 में रहने वाले रजनीश यादव, राम आशीष और गिरोह में शामिल शिवातुल्लाह उर्फ अब्दुल को दबोच लिया।
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पूछताछ में पता चला कि संविदा कर्मचारी बीआईएस संस्था के माध्यम से रखे गए थे। यह वार्ड स्वीपर और मरीज अटेंडेंट का काम करते थे। इस वजह से किस मरीज को खून की जरूरत है, इसकी जानकारी इन्हें होती थी। मरीज से पहले ये लोग सीधे बात करते थे। बताते थे, कुछ रुपये में खून मिल सकता है। परेशान तीमारदार तत्काल तैयार हो जाता था। फिर खून माफिया वसील का नंबर दिया जाता था।
रुपयों की सेटिंग होने के बाद केशरदेव या फिर शिवातुल्लाह से डोनर के लिए संपर्क करते थे। इसके बाद केशरदेव डोनर को ब्लड बैंक में पहुंचाता था और खून को निकालकर बेच दिया जाता था। रकम में कमीशन शिवातुल्लाह और कर्मचारियों को दी जाती थी। चौकी इंचार्ज विवेक मिश्रा ने बताया कि आरोपियों से पूछताछ में भी पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं, जिसके आधार पर पुलिस आगे की जांच कर रही है।
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