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प्रबोधिनी एकादशी का है ये खास महत्व, शुरू होंगे मांगलिक कार्य, ये हैं इस साल के लग्न मुहूर्त

Mon, 23 Nov 2020 01:58 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Mon, 23 Nov 2020 01:58 PM IST
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Prabodhini Ekadashi 2020 special celebration with tulsi vivah and starts will marriage programme
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
प्रबोधिनी एकादशी का पर्व बुधवार को मनाया जाएगा। इसे देवउठनी एकादशी भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि चार माह तक शयन करने के बाद भगवान विष्णु इस दिन नींद से जागते हैं। इन चार महीनों तक किसी भी तरह के मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। प्रबोधिनी एकादशी के साथ ही मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। इस दिन व्रत के साथ भगवान विष्णु के पूजन-अर्चन का विशेष महत्व है।


क्या है महत्व
पंडित प्रियरंजन त्रिपाठी के अनुसार, प्रबोधिनी एकादशी व्रत करने से व्रतियों को सहस्रों अश्वमेध और सैकड़ों राजसूर्य यज्ञों का फल प्राप्त होता है। व्रत के प्रभाव से उसे वीर, पराक्रमी और यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापनाशक, पुण्यवर्धक तथा ज्ञानियों को मुक्तिदायक सिद्ध होता है। यह व्रत भगवान विष्णु को प्रसन्नता देने वाला और विष्णु धाम की प्राप्ति कराने वाला है। इस व्रत को करने से समस्त तीर्थों का घर में निवास हो जाता है।
Prabodhini Ekadashi 2020 special celebration with tulsi vivah and starts will marriage programme
ज्योतिष पं. शरद चंद्र मिश्र।(file) - फोटो : अमर उजाला
रात्रि जागरण का विशेष महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, इस तिथि को रात्रि जागरण का विशेष महत्व है। रात्रि में कीर्तन, वाद्य यंत्रों, नृत्य और पुराणों का वाचन करना चाहिए। धूप, दीप, नैवेद्य, पुष्प, गंध, चंदन, फल आदि से पूजन करके घंटा, शंख, मृदंग आदि वाद्यों की मांगलिक ध्वनि से भगवान से जागने की प्रार्थना करें। इसके बाद भगवान की आरती करें और पुष्पांजलि अर्पण करके प्रह्लाद, नारद, परशुराम, पुण्डरीक, व्यास, अंबरीष, शुक, शौनक और भीष्मादि भक्तों का स्मरण करके चरणामृत और प्रसाद का वितरण करना चाहिए।
Prabodhini Ekadashi 2020 special celebration with tulsi vivah and starts will marriage programme
पंडित डॉ. जोखन पांडेय।(file) - फोटो : अमर उजाला
तुलसी विवाह का होगा आयोजन
पंडित जोखन पांडेय के अनुसार, कार्तिक शुक्ल एकादशी के दिन ही श्रद्धालु तुलसी विवाह का आयोजन करते हैं। इस दिन भगवान विष्णु के श्रीविग्रह के साथ तुलसी का विवाह धूमधाम से किया जाता है। तुलसी के पौधे को गमला आदि में रखकर उसे सजाकर, उसके चारों ओर ईख का मंडप बनाकर उसके ऊपर ओढ़नी या सुहाग की प्रतीक चुनरी चढ़ाएं। वृक्ष को साड़ी में लपेटकर टुकड़ी पहनाकर उसका शृंगार करें। गणपति आदि देवों के साथ भगवान शालिग्राम का पूजन करें और भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसी की सात परिक्रमा कराएं और आरती के साथ विवाह का उत्सव पूर्ण करें।
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Prabodhini Ekadashi 2020 special celebration with tulsi vivah and starts will marriage programme
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
शुरू हो जाएंगे वैवाहिक कार्य
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुुसार, भगवान विष्णु चार महीने के अखंड निद्रा का परित्याग कर बुधवार को जग जाएंगे। ऐसी पौराणिक मान्यता है कि समस्त मांगलिक कार्य विष्णु शयन में निषिद्ध है। भगवान के जाग्रत हो जाने के पश्चात ही विवाह सहित समस्त मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाएंगे।
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Prabodhini Ekadashi 2020 special celebration with tulsi vivah and starts will marriage programme
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
ये हैं इस साल के लग्न मुहूर्त
नवंबर : 26 व 30 नवंबर
दिसंबर : 01, 02, 06, 07, 08, 09, 11 एवं 15 दिसंबर

16 दिसंबर से लगेगा खरमास
16 दिसंबर से खरमास प्रारंभ हो जाएगा। इस मास में वैवाहिक कार्य सहित मांगलिक कार्य नहीं होते हैं। मेष की संक्रांति से पुन: मांगलिक कार्य प्रारंभ होंगे।
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