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UP: हाईकोर्ट ने एम्स के छात्रों के निलंबन पर लगाई रोक, 27 और 28 मार्च को किया था प्रदर्शन

Wed, 19 Apr 2023 11:10 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 19 Apr 2023 11:10 AM IST
सार

 छात्रों ने न्यायालय को बताया कि एम्स प्रशासन की इस कार्रवाई से उनका कॅरियर बर्बाद हो जाएगा। आगामी 19 अप्रैल से परीक्षाएं संभावित हैं। उनका भविष्य खराब हो सकता है। इस पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय भनोट ने मंगलवार को ही सुनवाई की।

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HC stays suspension of Gorakhpur AIIMS students
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया।

विस्तार

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चार छात्रों को निलंबित करने और हॉस्टल से निकालने का मामला हाईकोर्ट इलाहाबाद पहुंच गया। मंगलवार को छात्रों ने फैसले के विरोध में हाईकोर्ट में अपील की थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने मंगलवार को ही सुनवाई की।

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कोर्ट ने एम्स प्रशासन के फैसले पर रोक लगाते हुए चारों छात्रों को दोबारा कक्षा में शामिल होने और हॉस्टल में रहने देने के आदेश दिए हैं। साथ ही अदालत के फैसले की सूचना एम्स प्रशासन तक पहुंचाने के लिए शासन के अधिवक्ता के साथ ही रजिस्ट्रार जनरल को स्टे ऑर्डर फैक्स करने का भी आदेश दिया है।
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एम्स में 27 और 28 मार्च को हॉस्टल गेट को देर रात तक खोले जाने की मांग करते हुए छात्रों ने प्रदर्शन किया था। एम्स प्रशासन ने छात्राें पर आरोप लगाया कि उन्होंने सुरक्षाकर्मियों से बदसलूकी की। इस आंदोलन को लेकर एम्स प्रशासन ने शिकायत निवारण समिति और अनुशासन समिति का गठन करते हुए जांच कराई।

समिति में एमएमएमयूटी के प्रॉक्टर भी शामिल थे। अनुशासन समिति ने 13 अप्रैल को फैसला देते हुए एमबीबीएस-2019 बैच के चार छात्रों को निलंबित कर दिया। इनमें से तीन छात्रों को हॉस्टल से भी कुछ दिनों के लिए बाहर निकाल दिया गया था। जबकि, एक छात्र को हॉस्टल से हमेशा के लिए बाहर कर दिया गया था।
 

मंगलवार को छात्रों ने दाखिल की थी अपील

एम्स प्रशासन की इस कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को तीन छात्रों ने हाईकोर्ट की प्रयागराज बेंच में अपील की थी। छात्रों ने न्यायालय को बताया कि एम्स प्रशासन की इस कार्रवाई से उनका कॅरियर बर्बाद हो जाएगा। आगामी 19 अप्रैल से परीक्षाएं संभावित हैं। उनका भविष्य खराब हो सकता है। इस पर हाईकोर्ट के न्यायाधीश अजय भनोट ने मंगलवार को ही सुनवाई की।

उन्होंने छात्रों के भविष्य को देखते हुए एम्स प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी। साथ ही छात्रों को कैंपस के हॉस्टल में रहने और कक्षा में पढ़ने की अनुमति भी दी है। मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल तय हुई है।

हाईकोर्ट ने साफ किया है कि इस दौरान छात्रों को किसी भी प्रकार परेशान न किया जाए। मंगलवार को ही इस सुनवाई की कॉपी तत्काल एम्स प्रशासन को उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए उन्होंने रजिस्ट्रार जनरल और शासन के अधिवक्ता मनोज कुमार सिंह को भी आदेश दिया है।

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