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यूपी: रात में सड़क किनारे नवजात को छोड़ गई निर्दयी मां, भूख से रोता रहा बच्चा

Fri, 21 Aug 2020 10:13 AM IST
vivek shukla धर्मेंद्र कुमार गुप्ता, महराजगंज।
धर्मेंद्र कुमार गुप्ता, महराजगंज। Published by: vivek shukla Updated Fri, 21 Aug 2020 10:13 AM IST
सार

  • निचलौल-सिंदुरिया मार्ग स्थित मधुबनी नहर पुल के पास मिली नवजात
  • लोगों ने चाइल्ड लाइन को दी सूचना

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ruthless mother left newborn on roadside at night in Maharajganj
प्रतीकात्मक तस्वीर

विस्तार

महराजगंज में बुधवार की रात एक मां-बेटी को जन्म देने के बाद छोड़कर चली गई। नवजात रात के अंधेरे में खुले आसमान के नीचे निचलौल सिंदुरिया मार्ग पर पड़ी रही। इसी बीच सड़क पर टहल रहे लोगों ने नवजात के रोने की आवाज सुनी। पास जाकर देखा तो पुराने कपड़े में एक बच्ची लिपटी हुई थी, जिसे खोन्हौली निवासी सावित्री ने तुरंत गोद में उठाकर लिया।

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बच्ची मिलने की सूचना मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। लेकिन सूचना पाकर मौके पर पहुंची चाइल्ड लाइन की टीम ने बच्ची को कब्जे में लेकर पुलिस को सूचना देते हुए उपचार के लिए सीएचसी निचलौल ले गई। जहां पर चिकित्सकों ने बच्ची का प्राथमिक उपचार कर जिला अस्पताल रेफर कर दिया। जहां पर बच्ची का स्वास्थ्य ठीक है।
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चाइल्ड लाइन टीम के सदस्य पिंटू ने बताया कि बुधवार की रात को काफी गर्मी के चलते खोन्हौली गांव के कुछ लोग निचलौल सिंदुरिया सड़क पर टहल रहे थे। अभी वह लोग नहर पुल पर पहुंचे थे। तभी बच्ची की रोने की आवाज सुनाई दी। इन लोगों ने पास पहुंचा तो देखा कि एक नवजात पुराने कपड़ों में लिपटी है।
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इन लोगों ने तुरंत बच्ची को गोद मे उठा लिया। बच्ची भूख से रो रही थी। उसे चुप कराने की कोशिश कर रहे थे। वही बच्ची मिलने की खबर मिलते ही दर्जनों लोग मौके पर पहुंचकर बच्ची को अपनाने की बात कहने लगे। लेकिन इस मामले की जानकारी उच्चधिकारियों देकर बच्ची को स्वास्थ्य जांच के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इंस्पेक्टर निर्भय कुमार ने बताया कि मामले कि जानकारी मिली है। कार्रवाई के बाद बच्ची के स्वास्थ्य जांच के लिए चाइल्ड लाइन टीम को सौंप दिया गया है।

पांच दिनों तक बच्ची अस्पताल में रहेगी

बाल कल्याण समिति के अध्य्क्ष विनोद तिवारी में बताया कि बच्ची मिलने की सूचना मिली है। उसके स्वास्थ में सुधार है। फिलहाल करीब पांच दिनों तक बच्ची अस्पताल में रहेगी। उसके बाद चिकित्सकों द्वारा बच्ची का फिटनेश जारी किया जाएगा, तो बच्ची को देखरेख करने के लिए दस्तक इकाई गोरखपुर में रखा जाएगा। जहां पर बच्ची 60 दिनों तक रहेगी। उसके बाद बच्ची को गोद लेने के लिए प्रकाशन किया जाएगा। अगर प्रकाशन के बाद भी बच्ची के माता पिता उसे दस्तक इकाई नहीं ले जाते हैं तो कोर्ट द्वारा आवेदन किए हुए व्यक्ति को कागजी कार्रवाई के साथ सौंप दिया जाएगा।  

योजनाएं हजार फिर भी बेटियां लाचार
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का प्रचार होने के बाद भी कुछ लोगों की दोहरी मानसिकता सामने आ रही है। निचलौल सिंदुरिया मार्ग स्थित मधुबनी नहर पुल के पास नवजात को छोड़ने के मामले में ऐसा ही कुछ देखने को मिला। बेटी के जन्म से लेकर पढ़ाई लिखाई और शादी तक के लिए सरकार की तरफ से भरपूर मदद दी जा रही है।

योजनाओं के बारे में बताते हुए सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजेश द्विवेदी ने कहा कि सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 10 वर्ष तक की बच्ची का किसी बैंक या पोस्टऑफिस में खाता खुलवाकर उसमें हर महीने 250 रुपये न्यूनतम जमा किए जा सकते हैं। सालाना डेढ़ लाख रुपये तक खाते में जमा किये जा सकते हैं।

बच्ची को 18 या फिर 21 वर्ष की आयु पर रकम को ब्याज के साथ निकाला जा सकता है। कन्या सुमंगला योजना के तहत एक अप्रैल 2019 के बाद जन्मी बेटियों को 15 हजार रुपये तक दिए जाएंगे। जननी सुरक्षा योजना के तहत बेटी को जन्म देने के बाद तीन किस्तों में पांच हजार मिलते हैं।

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