झारखंड के टॉप शूटरों में से एक था गोरखपुर का 'सर्वेश', पुलिस के मुताबिक अपहरण नहीं इस वजह से हुई थी हत्या
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गोरखपुर जिले के रामगढ़ताल इलाके के फुलवरिया से अपहरण के तीन दिन बाद तक सर्वेश परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों से मोबाइल फोन के माध्यम से संपर्क में था। पुलिस के मुताबिक, अपहरण की तिथि छह अगस्त और हत्या यानी नौ अगस्त के बीच कुल 47 बार उसने परिवार और जानने वालों से अपने मोबाइल फोन से लंबी-लंबी बातें कीं। इस वजह से रामगढ़ताल पुलिस अपहरण की बात को हजम नहीं कर पा रही है। सर्वेश की हत्या की छानबीन में बिहार की गया पुलिस भी लगी हुई है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार सर्वेश उर्फ राज सिंह झारखंड के टॉप शूटरों में से एक था। घरवालों का कहना है कि तीन लोगों की हत्या में नाम सामने आने के बाद घरवालों को उसके अपराधी होने की जानकारी मिली थी। वहीं पुलिस का कहना है कि घरवाले उसकी हर हरकत के बारे में पहले से जानते थे।
जमानत पर छूटने के बाद सर्वेश गोरखपुर आ गया था। यहां वह माता-पिता के साथ किराए के मकान में रह रहा था। छह अगस्त को कुछ लोग बोलेरो से आए और उसे साथ लेकर चले गए। इस घटना के बाद मां किशोरी ने अपहरण का आरोप लगाया था। पुलिस को दी गई पहली सूचना में खुद मां ने भी माना था कि वह मित्रों के साथ अपनी मर्जी से गया है।
सर्वेश की हत्या की छानबीन तो बिहार पुलिस कर रही है। अपहरण का मामला गोरखपुर में सामने आने की वजह से पुलिस ने छानबीन कर अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है, जिसके मुताबिक उसका अपहरण नहीं हुआ था बल्कि वह स्वेच्छा से अपने दोस्तों के साथ गया था।
बेलघाट के पिपरसंडी गांव निवासी सर्वेश के पिता देव नारायण सिंह फौज से रिटायर होने के बाद एक प्राइवेट स्कूल में गार्ड का काम करते हैं। इसी वजह से वह गोरखपुर शहर में ही रहने लगे। सर्वेश उर्फ राज सिंह कम उम्र में ही मुंबई कमाने चला गया।
बताया जाता है कि यहीं पर उसकी दोस्ती कई अपराधियों से हो गई। सर्वेश का गोरखपुर में कोई आपराधिक इतिहास नहीं था। 12 जून 2015 को सुल्तानपुर के कादीपुर गांव के पास प्रशांत सिंह, देवनारायन और शिव कुमार की हत्या कर दी गई थी।
22 जून को सुल्तानपुर पुलिस ने सर्वेश उर्फ राज के अलावा अखिलेश तिवारी और अजय पांडेय को इस मामले में आरोपी बनाकर गिरफ्तार किया था। हालांकि मां किशोरी देवी को अब भी लगता है कि उनके बेटे को फंसाया गया था।
कहीं बड़ी साजिश को अंजाम देने तो नहीं गया था सर्वेश
सर्वेश सिंह शूटर था इसमें पुलिस को कोई संदेह नहीं है। मोबाइल पर लगातार उसकी बातचीत करीबियों से हुई है यानी कि उसका अपहरण नहीं हुआ था। पुलिस सूत्रों के अनुसार सर्वेश किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए दोस्तों के साथ निकला था लेकिन उसके ही किसी दोस्त ने उसकी हत्या कर दी।
यह हुआ था
छह अगस्त को कुछ बोलेरो सवार सर्वेश को लेकर गए थे। सर्वेश की मां किशोरी ने बताया कि असलहे के बल पर उसका अपहरण कर लिया गया था। फिर दस अगस्त को बिहार के गया में उसका सिर कटा शव मिला। बिहार पुलिस तलाश करते हुए एक महीने बाद गोरखपुर पहुंची और फिर उसकी शिनाख्त हो पाई थी।