गोरखपुर पुलिस की बेरहमी: कानपुर के रियल इस्टेट कारोबारी की पुलिस की पिटाई से मौत, हत्या का केस दर्ज
निलंबित इंस्पेक्टर जगतनारायण सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा और विजय यादव नामजद, तीन अन्य पर भी मुकदमा दर्ज हुआ है। घटना को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दुख जताया और पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की मदद का एलान किया।
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गुरुग्राम से दो दोस्तों के साथ गोरखपुर घूमने आए कानपुर के रियल इस्टेट कारोबारी मनीष गुप्ता (36) की सोमवार देर रात पुलिस की पिटाई से मौत हो गई। आरोप है कि जांच का विरोध करने पर पुलिस कर्मियों ने उनकी बेरहमी से पिटाई की थी। उनके दोस्तों को भी पीटा था। हालत खराब होने के बाद पुलिस मनीष को लेकर एक निजी अस्पताल गई थी, जहां से उन्हें रेफर कर दिया गया था। इसके बाद पुलिस ने उन्हें मेडिकल कॉलेज एंबुलेंस से अकेले ही भेज दिया था, जहां डॉक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। देर रात ही पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था।
उधर, मंगलवार पूरे दिन और देर रात तक काफी किंतु-परंतु के बाद पुलिस ने मामले में रामगढ़ताल थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज किया। इस मामले में निलंबित इंस्पेक्टर जगतनारायण सिंह, चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा और विजय यादव को नामजद किया गया है। तीन अन्य को भी आरोपी बनाया गया है। वहीं, इस घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गहरा दुख जताया है। साथ ही पीड़ित परिवार को दस लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने का एलान किया है।
इससे पहले, मंगलवार दोपहर में एसएसपी डॉ. विपिन ताडा ने घटना में लापरवाही बरतने की बात कहते हुए इंस्पेक्टर जगत नरायन सिंह और चौकी प्रभारी फलमंडी अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया था। साथ ही मामले की जांच एसपी नार्थ को सौंपी थी। एसएसपी का कहना था कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि पुलिस पूरे दिन मनीष और उनके दोस्तों की पिटाई से इनकार करती रही। उसका कहना था कि जांच के दौरान लड़खड़ाकर गिरने से मनीष को चोट लगी, जिससे उनकी मौत हो गई, लेकिन मनीष की पत्नी मीनाक्षी इसे हादसा मानने को तैयार नहीं थीं। हादसे की खबर पाकर गोरखपुर पहुंचीं मीनाक्षी ने आरोप लगाया कि होटल के कमरे में जांच करने पहुंचे पुलिसकर्मियों ने मनीष की बेरहमी से पिटाई की थी, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं थीं। इसी वजह से उनकी मौत हो गई। यह हत्या है और पुलिस कर्मियों पर हत्या का केस दर्ज किया जाना चाहिए। बाद में उन्होंने केस दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी। इसके बाद भी जब पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया तो वह परिजनों के साथ धरने पर बैठ गईं और शव ले जाने से इनकार कर दिया। इसके बाद जाकर पुलिस ने मामले में तीन पुलिस कर्मियों को नामजद करते हुए हत्या का केस दर्ज किया।
लखनऊ के दुर्गेश वाजपेयी को किया था अंतिम फोन
पहचान पत्र व सामानों की जांच करा दे।
इस पर मनीष ने कहा कि इतनी रात में पुलिस क्यों आई है? हम आतंकवादी थोड़े हैं। सोते इंसान को उठाकर परेशान कर रहे हैं। यह सुनते ही पुलिस कर्मी नाराज हो गए और मारपीट करने लगे।
आरोप है कि मारपीट के दौरान मनीष गुप्ता को गंभीर चोटें आईं। इससे पुलिस कर्मी घबरा गए। पुलिस कर्मी होटल के कमरे से मनीष को लिफ्ट में लाए, फिर पुलिस की जीप से उन्हें लेकर छात्रसंघ चौराहे के पास मानसी हॉस्पिटल ले गए। अस्पताल के चिकित्सकों ने मनीष की हालत गंभीर बताई। लिहाजा, पुलिस कर्मियों ने एंबुलेंस बुलाकर मनीष को अकेले ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज भेज दिया। एंबुलेंस से दोस्तों को जाने की इजाजत नहीं दी गई। दोस्तों का आरोप है कि रामगढ़ताल पुलिस का रवैया बेहद गैर जिम्मेदाराना था। पहचान पत्र दिखाने के बाद भी पिटाई की गई। रात में करीब 2:30 बजे बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने मनीष को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने परिजनों को जानकारी दी। जानकारी होने पर पत्नी मीनाक्षी गुप्ता अपने ससुर नंद किशोर गुप्ता व पिता के साथ मेडिकल कॉलेज पहुंचीं।
होटल कृष्णा पैलेस में ठहरे प्रदीप कुमार व हरवीर सिंह के मुताबिक सोमवार देर रात पुलिस जब अभद्रता व मारपीट कर रही थी, तब मनीष ने अंतिम फोन लखनऊ के दोस्त दुर्गेश वाजपेयी को किया था। फोन पर ही दुर्गेश को पुलिस की ज्यादती बताई थी। फोन पर बात करने के दौरान ही मनीष मुंह के बल गिरे और अचेत हो गए।
पुलिस छावनी में तब्दील पोस्टमार्टम हाउस
मेरे पति की हत्या की गई
कारोबारी मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने कहा कि जनता की रक्षा का दम भरने वाली पुलिस ने ही मेरे पति की जान ले ली। बिना वजह पुलिस जांच के नाम पर होटल के कमरे में देर रात घुस गई। जांच के दौरान पुलिस से कुछ सवाल पूछा गया तो तीनों दोस्तों की पिटाई की गई। पति को गंभीर चोटें आईं, लेकिन उन्हें समय से अस्पताल नहीं पहुंचाया गया और उनकी मौत हो गई। उनकी आंख के पास गंभीर चोट के निशान हैं, जिसे देखने से लग रहा है कि पुलिस ने बट से प्रहार किया है। कंधे के पास हाथ में बड़ा छेद हो गया है। लग रहा कि पुलिस ने रिवाल्वर की नाल धंसाई है। बाजू के पास भी चोट के निशान हैं। पुलिस ने बेरहमी से पिटाई करके हत्या की है।
तीन घंटे की बातचीत के बाद दर्ज हुआ केस
रियल इस्टेट कारोबारी मनीष की मौत के मामले में मंगलवार रात 9:00 बजे डीएम और एसएसपी बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उन्होंने मनीष की पत्नी और घरवालों से करीब तीन घंटे तक बातचीत की। इस दौरान एक बार मनीष की पत्नी बाहर आईं और धरने पर बैठ गईं। इसके बाद पुलिस उन्हें समझा कर अंदर ले गई और अफसरों से वार्ता शुरू हुई। काफी बातचीत के बाद मीनाक्षी ने तहरीर को बदला और तीन नामजद व तीन अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ तहरीर दी। इसके बाद पुलिस ने हत्या का केस दर्ज किया।
डीएम विजय किरन आनंद ने बताया कि मुख्यमंत्री ने मामले में पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और महिला से तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। इसके बाद मुकदमा दर्ज किया गया है।
एसएसपी गोरखपुर डॉ विपिन ताडा ने बताया कि पुलिस संदिग्ध लोगों की सूचना पर होटल में जांच करने गई थी। इस दौरान एक व्यापारी की मौत हो गई। प्रथम दृष्टया चेकिंग में लापरवाही पाए जाने पर 6 पुलिसवालों को निलंबित कर दिया गया। महिला की तहरीर पर हत्या का केस दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। पूरे प्रकरण की जांच एसपी नार्थ को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अपने ही थाने के मुलजिम हो गए इंस्पेक्टर व दरोगा
जिस थाने के इंचार्ज हुआ करते थे जगत नारायण सिंह आज उसी थाने में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। हत्या के मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिसकर्मी फरार बताए जा रहे हैं और उनकी तलाश शुरू कर दी गई है।