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यूपी चुनाव 2022: 470 ने लड़ा निर्दलीय चुनाव, दो बार ही मिली विजयश्री
Mon, 31 Jan 2022 01:09 AM IST
गाजियाबाद ब्यूरो
शुभम गर्ग, अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
शुभम गर्ग, अमर उजाला नेटवर्क, गाजियाबाद
Published by: गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 31 Jan 2022 01:09 AM IST
सार
गाजियाबाद में पिछले 10 साल से किसी भी सीट पर कोई निर्दलीय प्रत्याशी विधायक नहीं चुना गया है। इस बार 13 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं, इसमें सबसे ज्यादा गाजियाबाद से छह, साहिबाबाद से दो, मुरादनगर से दो, लोनी से दो और मोदीनगर से एक प्रत्याशी है। जीत किसके खाते में आती है यह देखना दिलचस्प होगा।
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विस्तार
पिछले चार दशक में हुए 11 विधानसभा चुनावों में 470 प्रत्याशियों ने बिना दल के ही दावेदारी की, लेकिन जीत सिर्फ दो बार ही मिल सकी। 1989 और 2007 में मुरादनगर सीट से राजपाल त्यागी ने निर्दलीय जीत हासिल की है। राम मंदिर आंदोलन के बाद 1993 में हुए विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा 100 प्रत्याशियों ने दावेदारी की थी, इसी चुनाव में गाजियाबाद सीट से 43 में से 33 उम्मीदवार निर्दलीय थे।
1989 में मुरादनगर सीट पर नौ निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे और 76.31 प्रतिशत वोट इनके खाते में रही। इस चुनाव में पहले और दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी भी निर्दलीय थे। इनमें पहले स्थान पर रहे राजपाल त्यागी को 39.27 प्रतिशत और विवेक को 30.08 प्रतिशत वोट मिले। 2007 में आंकड़ा घटकर 29 प्रतिशत रह गया। इसमें राजपाल त्यागी को 27.67 प्रतिशत वोट मिले थे।
पिछले 10 साल से किसी भी सीट पर कोई निर्दलीय प्रत्याशी विधायक नहीं चुना गया है। इस बार 13 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं, इसमें सबसे ज्यादा गाजियाबाद से छह, साहिबाबाद से दो, मुरादनगर से दो, लोनी से दो और मोदीनगर से एक प्रत्याशी है। जीत किसके खाते में आती है यह देखना दिलचस्प होगा।
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1996 से घट गई संख्या
1993 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों का 100 था। 1996 में हुए चुनाव में यह घटकर सीधे 17 पहुंच गया। उसके बाद से यह संख्या 50 भी पार नहीं हुई। 2002 में 21 उम्मीदवार, 2007 में 35 उम्मीदवार, 2012 में 17 प्रत्याशी और 2017 में 20 प्रत्याशी मैदान में थे। 2022 में और घटकर 13 रह गया।
12 महिलाओं ने भी चुनीं कठिन राह
470 निर्दलीय प्रत्याशियों में 12 महिलाओं ने भी कठिन राह चुनीं है। जिला बनने के बाद पहली बार 1977 में हापुड़ विधानसभा क्षेत्र से शांति देवी ने दावेदारी की, उसके बाद से सिलसिला थमा नहीं। 1980 में गढ़मुक्तेश्वर से अकिला बेगम, 1989 में मुरादनगर से रीना देवी और गढ़मुक्तेश्वर से जन्नत, 1993 में हापुड़ से काका जोगिंदर सिंह अलिस धत्रि पकर, 1996 में गाजियाबाद से शोभा देवी और मोदीनगर से श्यामा देवी, 2002 में मोदीनगर से सुमन देवी, 2007 से मोदीनगर से सुनीता चौधरी, 2012 में गाजियाबाद से मधु सुनेजा, साहिबाबाद से अंशू देवी और मोदीनगर से सरोज देवी, 2017 में लोनी से नासिम मैदान में रहीं। 2022 के चुनाव के लिए भी तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें लोनी से बागी रंजीता धामा, साहिबाबाद से गितांजलि और गाजियाबाद से रानी देवश्री ने दावेदारी की है।
दूसरे और तीसरे नंबर पर भी रही दावेदारी
1977 में हुए चुनाव में गाजियाबाद सीट से सुनील खन्ना तीसरे स्थान पर रहे हैं। सदर सीट से ही 1985 में सुरेंद्र कुमार मुन्नी तीसरे स्थान पर रहे हैं। 1985 में गाजियाबाद से ही भारत भूषण तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, मुरादनगर सीट से विवेक और मोदीनगर सीट से राम आश्रय शर्मा दूसरे स्थान पर रहे हैं। 1991 में मुरादनगर सीट में शहनवाज अंसारी तीसरे स्थान पर रहे। इसी साल सदर सीट से चुनाव लड़े धर्मवीर को 6 वोट मिले थे।
वर्ष प्रत्याशी
1977 25
1980 33
1985 55
1989 66
1991 81
1993 100
1996 17
2002 21
2007 35
2012 17
2017 20
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1989 में मुरादनगर सीट पर नौ निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में थे और 76.31 प्रतिशत वोट इनके खाते में रही। इस चुनाव में पहले और दूसरे स्थान पर रहे प्रत्याशी भी निर्दलीय थे। इनमें पहले स्थान पर रहे राजपाल त्यागी को 39.27 प्रतिशत और विवेक को 30.08 प्रतिशत वोट मिले। 2007 में आंकड़ा घटकर 29 प्रतिशत रह गया। इसमें राजपाल त्यागी को 27.67 प्रतिशत वोट मिले थे।
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पिछले 10 साल से किसी भी सीट पर कोई निर्दलीय प्रत्याशी विधायक नहीं चुना गया है। इस बार 13 निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में हैं, इसमें सबसे ज्यादा गाजियाबाद से छह, साहिबाबाद से दो, मुरादनगर से दो, लोनी से दो और मोदीनगर से एक प्रत्याशी है। जीत किसके खाते में आती है यह देखना दिलचस्प होगा।
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1996 से घट गई संख्या
1993 विधानसभा चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवारों का 100 था। 1996 में हुए चुनाव में यह घटकर सीधे 17 पहुंच गया। उसके बाद से यह संख्या 50 भी पार नहीं हुई। 2002 में 21 उम्मीदवार, 2007 में 35 उम्मीदवार, 2012 में 17 प्रत्याशी और 2017 में 20 प्रत्याशी मैदान में थे। 2022 में और घटकर 13 रह गया।
12 महिलाओं ने भी चुनीं कठिन राह
470 निर्दलीय प्रत्याशियों में 12 महिलाओं ने भी कठिन राह चुनीं है। जिला बनने के बाद पहली बार 1977 में हापुड़ विधानसभा क्षेत्र से शांति देवी ने दावेदारी की, उसके बाद से सिलसिला थमा नहीं। 1980 में गढ़मुक्तेश्वर से अकिला बेगम, 1989 में मुरादनगर से रीना देवी और गढ़मुक्तेश्वर से जन्नत, 1993 में हापुड़ से काका जोगिंदर सिंह अलिस धत्रि पकर, 1996 में गाजियाबाद से शोभा देवी और मोदीनगर से श्यामा देवी, 2002 में मोदीनगर से सुमन देवी, 2007 से मोदीनगर से सुनीता चौधरी, 2012 में गाजियाबाद से मधु सुनेजा, साहिबाबाद से अंशू देवी और मोदीनगर से सरोज देवी, 2017 में लोनी से नासिम मैदान में रहीं। 2022 के चुनाव के लिए भी तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। इनमें लोनी से बागी रंजीता धामा, साहिबाबाद से गितांजलि और गाजियाबाद से रानी देवश्री ने दावेदारी की है।
दूसरे और तीसरे नंबर पर भी रही दावेदारी
1977 में हुए चुनाव में गाजियाबाद सीट से सुनील खन्ना तीसरे स्थान पर रहे हैं। सदर सीट से ही 1985 में सुरेंद्र कुमार मुन्नी तीसरे स्थान पर रहे हैं। 1985 में गाजियाबाद से ही भारत भूषण तीसरे स्थान पर रहे। वहीं, मुरादनगर सीट से विवेक और मोदीनगर सीट से राम आश्रय शर्मा दूसरे स्थान पर रहे हैं। 1991 में मुरादनगर सीट में शहनवाज अंसारी तीसरे स्थान पर रहे। इसी साल सदर सीट से चुनाव लड़े धर्मवीर को 6 वोट मिले थे।
वर्ष प्रत्याशी
1977 25
1980 33
1985 55
1989 66
1991 81
1993 100
1996 17
2002 21
2007 35
2012 17
2017 20