दिल्ली में 12वीं की छात्रा ने छेड़खानी से तंग हो उठाया ऐसा कदम..
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पुलिस के अनुसार, मूलरूप से बिहार निवासी 17 वर्षीय किशोरी परिजनों के साथ यहां अलीपुर के बख्तावरपुर गांव में रहती थी। वह सरकारी स्कूल की 12वीं कक्षा की छात्रा थी। उसके पिता की इलाके में चाय-पान की दुकान है। शुक्रवार को किशोरी की मां दो बेटों के साथ दुकान पर गई थी। घर में किशोरी अकेली थी। इसी दौरान उसने कमरे में फंदा लगाकर खुदकुशी कर ली।
बताया जाता है कि आरोपी मयंक मुखर्जी नगर स्थित एक कोचिंग इंस्टीट्यूट से एसएससी परीक्षा की तैयारी कर रहा है। उक्त युवक छात्रा को भी पुलिस में भर्ती के लिए परीक्षा की तैयारी में सहायता कर रहा था।
‘दिल्ली के लोग मुझे जीने नहीं दे रहे थे’
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, किशोरी के कमरे से सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने लिखा है कि मैने कोई गलती नहीं की है, पर अब मैं जी नहीं सकती। इधर जाओ तो लड़के उधर जाओ तो लड़के। सभी मेरी जिंदगी को खराब कर रहे थे, ताकि मैं कुछ न कर सकूं।
ये दिल्ली के लोग मुझे जीने नहीं दे रहे थे। मेरी वजह से पापा आपको कमरा खाली करना पड़ रहा है ना, अब मैं नहीं होऊंगी तो आपको कमरा खाली करना नहीं पड़ेगा। मैंने कोई गलती नहीं की है। अगर कोई गलती हुई हो तो मुझे माफ कर देना।
कमरा खाली करने को कहा था
दो दिन पहले ही परिवार वालों को बेटी के साथ छेड़छाड़ किए जाने की जानकारी मिली थी। उन लोगों ने लड़के के परिवार वालों से इसकी शिकायत की थी। परिवार वालों का आरोप है कि लड़के के परिवार वाले उल्टा उन्हें धमकी देने लगे। उन्होंने किशोरी के परिजनों को कमरा जल्द खाली करके चले जाने की बात कही। पुलिस का कहना है कि छात्रा के परिजनों ने पुलिस से इसकी शिकायत नहीं की थी।
हरकतों का कई बार विरोध किया था
परिजनों का आरोप है कि मयंक नाम का युवक उसकी बेटी के साथ काफी समय से छेड़छाड़ कर रहा था। वह उसकी बेटी को पुलिस में भर्ती में सहयोग देने के बहाने ट्रेनिंग देता था। परिजनों ने युवक की हरकतों का कई बार विरोध किया था, लेकिन गांव के दबंग होने की वजह से उनकी बात नहीं सुनी गई। आखिरकार उनकी लड़की ने खुदकुशी कर ली।
लोकतंत्र की मौत हुई : मालीवाल
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल ने किशोरी की मौत पर दुख जताते हुए कहा कि किशोरी की मौत नहीं हुई, बल्कि यह पूरे लोकतंत्र की मौत है। वह दिल्ली में अपने को असुरक्षित महसूस कर रही थी, इसलिए उसने मौत को गले लगा लिया।
37 दिन तक हमने बच्चियों को प्रताड़ित करने वालों को छह माह के अंदर सजा दिलवाने के लिए सत्याग्रह किया। प्रधानमंत्री को पांच लाख पत्र भिजवाए, लेकिन बच्चियों की मन की बात कहीं नहीं सुनी गई। नेताओं से हाथ जोड़कर अपील है कि ऐसी कोई दुबारा निर्भया न हो, इसके लिए एकजुट होकर लड़िए और छह माह के अंदर केस का निपटारा किया जाए।