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अरे, इस जेल में कौन चार्ज करता है कैदियों के मोबाइल

Thu, 14 Sep 2017 09:49 AM IST
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद
ऐहतेशाम उद्दीन अहमद/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Thu, 14 Sep 2017 09:49 AM IST
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A Mobile found In average seven days in nimka jail at faridabad
डेमो पिक
जेल की बैरकों में लगातार मिल रहे अवैध सामान से सुरक्षा-व्यवस्था की पोल खुल खुलती रही है। लेकिन ये मामला कुछ ज्यादा ही संजीदा नजर आ रहा है...  
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हर सातवें दिन जेल में मिल रहा मोबाइल

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दरअसल, फरीदाबाद की नीमका जेल में औसतन हर सातवें दिन किसी न किसी कैदी के पास से मोबाइल बरामद किया जा रहा है। इस वर्ष 10 सितंबर तक जेल में बंद 35 कैदियों के पास से जेल प्रशासन ने मोबाइल, सिम आदि बरामद किए लेकिन उससे भी ज्यादा हैरानी भरी बात तो वो है जो अब हम आपको बताने जा रहे हैं... 

कैदियों के पास मोबाइल फोन तो मिले लेकिन शायद ही किसी कैदी के पास से चार्जर मिला हो। अब इस पर सवाल सामने आता है कि कैदी यह मोबाइल फोन कहां चार्ज करते हैं..? सच पूछो तो खुद जेल प्रशासन को भी इसकी खबर नहीं है।

स्थिति ये हकीकत बयां कर रही है कि कैदियों के लिए नीमका जेल की दीवारें शायद अब बाधा नहीं रहीं। यह अपराधी जेल के अंदर से मोबाइल फोन के जरिए अपना धंधा चला रहे हैं। हर साल नीमका जेल में कैदियों से 35-40 मोबाइल और सिम बरामद किए जाते हैं।

जेल प्रशासन मोबाइल तो जब्त कर लेता है लेकिन उसे यह नहीं मालूम होता कि कैदी उसका इस्तेमाल कब से कर रहा था। इस साल 10 सितंबर तक कैदियों से 35 मोबाइल बरामद किए गए। यह मोबाइल फोन जेल में पहुुंचते कैसे हैं यदि पहुंच गए तो इनकी बैटरी कहां और कब चार्ज की जाती है, जेल प्रशासन कभी इसकी जांच नहीं करता।  

जेल सूत्रों के मुताबिक जेल में बैट्री चार्जिंग का भी कारोबार चलता है। इसमें छोटे तबके के कर्मचारी मिले हुए हैं। यह काम बैरकों में नहीं हो सकता, क्योंकि यहां पंखे-बल्ब के स्विच तो होते हैं लेकिन उनमेें सॉकेट नहीं दिए जाते। दूसरे बैरिक में चार्जिंग करने पर विरोधी गुट के कैदी शिकायत कर देते हैं। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि मोबाइल फोन औचक निरीक्षण में कम मुखबिरी के जरिए ज्यादा बरामद होते हैं। सूत्रों के मुताबिक बैटरी चार्जिंग का खेल जेल के अंदर चोरी छिपे चलता है इसके लिए अच्छा खासा सुविधा शुल्क तय है।  

 
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क्या कटिया लगाकर हो रहें है कैदियों के मोबाइल चार्ज ?

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सुरक्षित है वायरिंग  
जेल में कैदी बिजली के तार का दुरुपयोग न कर सकें इसलिए वायरिंग सुरक्षित ढंग से की जाती है। अंडर ग्राउंड वायरिंग की वजह से मोबाइल चार्जिंग तक इन बिजली के तारों तक पहुंचना काफी मुश्किल होता है। ऐसे में मोबाइल फोन उन जगहों पर चार्ज किए जाते हैं जहां बिजली के सॉकेट या कटिया लगाने का जुगाड़ हो। हालांकि इन जगहों की कड़ी निगरानी होती है।  

कैदियों तक पहुंच जाता है मोबाइल  
सुरक्षित नीमका जेल में कैदियों तक मोबाइल फोन कैसे पहुंच जाता है यह भी जांच का विषय है। सदर बल्लभगढ़ थाने से मिली जानकारी के मुताबिक वर्ष 2014 में जेल में कैदियों को मोबाइल उपलब्ध कराने में दो बंदी रक्षकों की भूमिका सामने आई थी। इन दोनों बंदी रक्षकों को कैदी तक मोबाइल पहुंचाने का दोषी पाए जाने पर निलंबित कर दिया गया था। एक पुलिस अधिकारी का मानना है कि मोबाइल फोन और प्रतिबंधित वस्तुएं अंदर पहुंचाने मेें कुछ वार्डर और बंदी रक्षकों की भूूमिका हो सकती है।  

अपनों से बात करने के लिए हैं लैंडलाइन सुविधा  
अधिकारियों के मुताबिक कैदियों की सुविधा के लिए जेल में लैंड लाइन सुविधा है। कैदी एक सप्ताह में दो फोन नंबरों पर पैंतीस मिनट तक बात कर सकता है। दरअसल कैदी जो नंबर देता है जेल प्रशासन पहले उसका वेरिफिकेशन कराता है कि यह परिवार के सदस्य का है या नहीं, वेरिफाई होने पर ही बात कराई जाती है। यह पाबंदी ही अपराधियों के लिए परेशानी का कारण है, परिवार वालों के अलावा गुर्गों से बात करने के लिए उन्हेें मोबाइल फोन ही रखना पड़ता है। जेल सूत्रों ने बताया कि बड़े अपराधी जेल के अंदर से ही गिरोह के सदस्यों से जुड़े रहते हैं। हत्या, लूट, फिरौती आदि घटनाओं को अंजाम देने के लिए यह अपराधी अपने गुर्गों को निर्देश देते हैं और बाहर की आपराधिक गतिविधियों के बारे में जानकारी लेते रहते हैं।  

 
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इन आंकड़ों पर भी डालें नजर  

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वर्ष                          बरामद मोबाइल  
2014                             38 
2015                             25 
2016                             22 
2017 से आज तक             35 

समय समय पर निरीक्षण कर कैदियों से मोबाइल बरामद किए जाते हैं और उनके खिलाफ सदर बल्लभगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी जाती है। कैदी फोन कहां से लाते हैं और कहां चार्ज करते हैं यह पुलिस की जांच का विषय है। पुलिस जांच के बाद कार्रवाई करती है।  
प्रवक्ता, नीमका जेल   

-इस साल कैदियों से बरामद हो चुके हैं 35 मोबाइल फोन       
-बैटरी चार्जिंग करने की जगहों को नहीं खोज रहा जेल प्रशासन  
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