मुख्य न्यायाधीश बोले : यहां न आता तो एक अच्छी बार के साथ काम करने से वंचित रह जाता
मुख्य न्यायाधीश ने अपनी विदाई के समय बार बेंच के संबंधों पर चर्चा की और यहां बिताए समय को शानदार बताया। इसके पहले फुल कोर्ट रिफरेंस में नियुक्त किए गए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अगुवाई में उन्हें विदाई दी गई।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने कहा कि अगर वह यहां न आते तो एक अच्छी बार के साथ काम करने से वंचित रह जाते। इलाहाबाद हाईकोर्ट की बार ने उन्हें उम्मीद के मुताबिक दिया। उन्हें हाईकोर्ट बार से प्रेम, सम्मान सबकुछ मिला। वह इसे कभी नहीं भूल पाएंगे।
मुख्य न्यायाधीश ने अपनी विदाई के समय बार बेंच के संबंधों पर चर्चा की और यहां बिताए समय को शानदार बताया। इसके पहले फुल कोर्ट रिफरेंस में नियुक्त किए गए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता की अगुवाई में उन्हें विदाई दी गई। अपर महाधिवक्ता मनीष कुमार गोयल, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन अध्यक्ष अशोक सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने उनके कार्यकाल को याद किया।
इस दौरान कहा कि अधिवक्ताओं के साथ उनका व्यवहार हमेशा ही विनम्र रहा। जूनियर अधिवक्ता भी उनकी कोर्ट से निराश नहीं होता था। उधर, लखनऊ खंडपीठ के न्यायमूर्तिगणों ने भी ऑनलाइन उपस्थित होकर मुख्य न्यायमूर्ति को विदाई दी। फुल कोर्ट रिफरेंस के बाद उच्च न्यायालय कर्मचारी-अधिकारी एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश चंद्र त्रिपाठी, न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा, न्यायमूर्ति अजय भनोट, महासचिव बृजेश कुमार शुक्ला सहित अन्य पदाधिकारियों ने उन्हें पुष्पगुच्छ देकर उनकी दीर्घायु की कामना की। इस मौके पर आलोक कुमार निरंजन, बृजेश कुमार यादव आदि मौजूद रहे।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने अपने विदाई समारोह में कहा कि न्यायिक क्षेत्र में काम करने वाले जिस-जिस व्यक्ति ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के दर्शन न किए, उसने कुछ नहीं किया। यहां के वकीलों में मां गंगा जैसी पवित्रता और योग्यता है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से सोमवार को रखे गए विदाई समारोह में उन्होंने कहा कि मैं उन सौभाग्यशाली लोगों में से एक हूं जिसे एशिया के सबसे बड़े हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के रूप में काम करने का अवसर मिला। यहां वकीलों की न्यायिक सक्रियता किसी अन्य हाईकोर्ट की तुलना में अद्भुत और सराहनीय है। पांच वर्षों के कार्यकाल में हासिल हुए अनुभव धरोहर सरीखे हैं। वे 2018 में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से यहां आए थे। 26 मार्च 2023 को उन्हें मुख्य न्यायाधीश बनाया गया।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि आलोचना से पहले मुकदमों के निपटारे का प्रबंधन करने और समझने की जरूरत है। बिना प्रशासनिक व्यवस्था में शामिल हुए हाईकोर्ट की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करना उचित नहीं है। बड़ी संख्या में आए वकीलों को देखकर भावुक मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि छत्तीसगढ़ से इलाहाबाद हाईकोर्ट तबादला उनके लिए वरदान साबित हुआ। जनवरी 2024 के बाद वह नए सफर को शुरू करेंगे।
छह महीने में आएंगे वकीलों के अच्छे दिन
विदाई समारोह में मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर ने एशिया की सबसे बड़ी बार एसोसिएशन के लिए विशाल सभागार की घोषणा की। उन्होंने बताया कि अगले छह महीने के भीतर वकीलों को एक विशाल सभागार तैयार मिलेगा, जिसमें एक हजार से ज्यादा लोग किसी भी कार्यक्रम में शामिल हो सकेंगे। इसके बाद वकीलों के अच्छे दिन आ जाएंगे।
प्रगति में हिंदी माध्यम नहीं, हड़ताल है बाधक
मुख्य न्यायाधीश ने हिंदी माध्यम के सरकारी स्कूल में पढ़कर हाईकोर्ट के मुखिया बनने तक की मंजिल तक पहुंचने का श्रेय अपने शिक्षक पिता को समर्पित किया। उन्होंने नए वकीलों को हिंदी और अंग्रेजी का चक्कर छोड़कर अध्ययन की निरंतरता बनाए रखने की सलाह दी। उन्होंने कहा अपने हक के लिए आवाज उठाना गलत नहीं है, लेकिन हड़ताल से बचने की जरूरत है। एक दिन की हड़ताल कई दिनों की प्रगति में बाधक साबित होती है।