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छत्तीसगढ़

रविवार, 29 मार्च 2020

सिंधिया पर छत्तीसगढ़ के मंत्री ने साधा निशाना, बोले- मैं कभी नहीं बनूंगा भाजपाई

18 सालों तक कांग्रेस में रहने के बाद बुधवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके समर्थन में 22 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया है जिससे कमलनाथ सरकार संकट में आ गई है। कांग्रेस के कई नेताओं ने सिंधिया के फैसले का विरोध किया है। वहीं अब छत्तीसगढ़ के मंत्री ने उनपर निशाना साधते हुए कहा कि वह भाजपा में इसलिए शामिल हुए क्योंकि उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया।

छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता टीएस सिंह देव ने कहा, 'लोग दावा कर सकते हैं लेकिन मैं कभी भाजपा में शामिल नहीं होउंगा। यदि मुझे 100 जिंदगियां भी मिलती हैं तो भी मैं उस विचारधारा के साथ नहीं जाउंगा। एक शख्स जिसे मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया इसलिए वह भाजपा में शामिल हो गया। वह कभी भी मुख्यमंत्री नहीं बनेगा।'
 


सिंधिया पर तंज कसते हुए देव ने कहा, 'एक अकेला शख्स कभी हमेशा के लिए कैप्टन नहीं बन सकता है। कपिल देव को मौका तब मिला जब गावस्कर वहां मौजूद थे। वर्तमान में विराट कोहली कैप्टन हैं लेकिन टी20 के कैप्टन अलग-अलग हैं। क्या कैप्टन न बनाए जाने पर कोहली पाकिस्तान की टीम में शामिल हो जाएंगे। यह मेरी सोच से परे हैं।'

सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ने की बताई तीन वजहें
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह का शुक्रिया कि उन्होंने हमें अपने परिवार में स्थान दिया। मेरे जीवन में दो तारीख काफी अहम रही हैं, इनमें पहला 30 सितंबर 2001 जिस दिन मैंने अपने पिता को खोया, वह जिंदगी बदलने वाला दिन है। 

दूसरी तारीख 10 मार्च 2020 जो उनकी 75वीं वर्षगांठ थी जहां मैंने जीवन में एक बड़ा निर्णय लिया है। आज मन व्यथित है और दुखी भी है। जो कांग्रेस पहले थी वह आज नहीं रही, उसके तीन मुख्य बिंदु हैं। पहला कि वास्तविकता से इनकार करना, दूसरा नई विचारधारा और तीसरा नए नेतृत्व को मान्यता नहीं मिलना। 
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छत्तीसगढ़: संदिग्ध नक्सलियों ने पुलिस जवान की धारदार हथियार से की हत्या

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले में नक्सलियों ने एक बेहद जघन्य अपराध को अंजाम दिया है। जिले में संदिग्ध नागरिकों ने जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के एक जवान की हत्या कर दी। पुलिस ने इस बात की जानकारी दी है। 

सुकमा जिले के पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को यहां बताया कि जिले के दोरनापाल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आरगट्टा गांव के करीब संदिग्ध नक्सलियों ने सहायक आरक्षक कड़ती कन्ना की हत्या कर दी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बुधवार को कन्ना आरगट्टा गांव के ग्राम सभा में पत्नी के साथ शामिल हुए थे। कन्ना की पत्नी ग्राम पंचायत में वार्ड पंच हैं। कन्ना जब गांव में थे तब ग्रामीण की वेश में कुछ लोग वहां पहुंचे और कन्ना को अपने साथ ले गए। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों ने गुरुवार को कन्ना का शव गांव के करीब देखा और इसकी जानकारी पुलिस को दी।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सूचना मिलने के बाद घटनास्थल के लिए पुलिस दल रवाना किया। पुलिस ने कन्ना के शव को बरामद कर लिया है। उसके शव पर धारदार हथियार से हमला करने के निशान हैं।

अधिकारियों ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पुलिस को आशंका है कि नक्सलियों ने कन्ना की हत्या की है। क्षेत्र में खोज अभियान तेज कर दिया गया है तथा मामले की जांच की जा रही है।
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छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले एसटीएफ जवान ने की खुदकुशी

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) के एक जवान ने बृहस्पतिवार तड़के अपनी सर्विस राइफल से कथित रूप से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधिकारियों ने बृहस्तपतिवार को बताया कि जिले के अरनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पोटाली शिविर में एसटीएफ के जवान रामाराम स्वामी ने खुद को गोली मार ली।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि तड़के शिविर के जवानों ने बैरक में गोली चलने की आवाज सुनी। जब उन्होंने वहां जाकर देखा तब रामाराम गंभीर हालत में वहां पड़े हुए थे। उन्होंने बताया कि शिविर के जवानों ने घटना की जानकारी अपने अधिकारियों को दी और रामाराम को अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।

अधिकारियों ने बताया कि रामाराम ने खुदकुशी क्यों की है इस संबंध में जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष नवंबर महीने में धुर नक्सल प्रभावित अरनपुर के पोटली में छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल, डीआरजी और एसटीएफ के लिए शिविर की स्थापना की गई थी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रामाराम राजस्थान के सीकर जिले के चला गांव के निवासी थे। उनके परिजनों को घटना की जानकारी दे दी गई है।

बस्तर क्षेत्र के नारायणपुर जिले में इस महीने की चार तारीख को छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के जवान ने अपनी सर्विस राइफल से कथित रूप से खुद को गोली मार ली थी। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले महीने विधानसभा में बताया था कि राज्य में पिछले लगभग दो वर्ष के दौरान पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 50 जवानों ने आत्महत्या की है। इनमें से 18 जवानों ने राज्य के बस्तर क्षेत्र के छह जिलों में आत्महत्या की है।
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मां की मौत के बाद पैदल ही रायपुर से वाराणसी जा रहा है युवक, तीन दिन में पहुंचा बैकुंठपुर

देश में 21 दिनों की संपूर्ण देशबंदी जारी है। ऐसे में रेल, बस, विमान और सभी तरह की सेवाएं बंद हैं। जिसकी वजह से कई लोग पैदल ही अपने गांव लौट रहे हैं। हालांकि इस बीच कई ऐसे लोग हैं जो अपनों को खोने के बावजूद पैदल ही रास्ता तय कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला छत्तीसगढ़ में सामने आया है। जहां अपनी मां को खोने के बाद युवक रायपुर से पैदल चलकर वाराणसी जा रहा है।

इस युवक का नाम मुराकीम है। वह अपने दो दोस्तों विवेक और परवीन के साथ रायपुर से उत्तर प्रदेश के वारणसी पैदल चल रहे हैं। मुराकीम की मां की 25 मार्च को मौत हो गई थी। वे तीन दिनों में रायपुर के कोरिया जिले के बैकुंठपुर पहुंचे।

मुराकीम के एक दोस्त ने कहा, 'हम लगभग 20 किलोमीटर पैदल चल चुके हैं और हमने दो-तीन लोगों से रास्ते में लिफ्टी ली। जब हम बैंकुठपुर पहुंचे तो यहां मौजूद एक मेडिकल दुकान के मालिक ने हमारी मदद की।'
 


केवल मुराकीम ही नहीं कई लोग अपने गांव, राज्यों को लौट रहे हैं। ये लोग खुद को जिंदा रखने के लिए सैकड़ों मील का सफर पैदल ही तय कर रहे हैं। इनकी जद्दोजहद घर पहुंचने की है ताकि उन्हें भूख से न मरना पड़े। कुछ इसलिए वापस अपने घर कजा रहे हैं ताकि उनके बच्चों को भूख से तड़पना न पड़े। सरकार बेशक सभी लोगों की सहायता करने की कोशिश कर रही है लेकिन मौजूदा हालात में यह हालात नाकाफी साबित हो रहे हैं।
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मुराकीम रायपुर से पैदल वाराणसी जा रहे हैं मुराकीम रायपुर से पैदल वाराणसी जा रहे हैं

छत्तीसगढ़ में कोरोना वायरस के पांच नए मामले, प्रदेश में छह हुई संक्रमित मरीजों की सख्या

वैश्विक महामारी कोरोना वायरस भारत को तेजी से अपनी पकड़ में ले रहा है। शुक्रवार को स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक इस वायरस से देश में 17 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 700 ले ज्यादा लोग संक्रमित हैं। ये जानलेवा वायरस छत्तीसगड़ तक भी पहुंच गया है। 

छत्तीसगढ़ में एक ही दिन में कोराना वायरस संक्रमण के पांच नए मामले सामने आने के बाद राज्य में कोरोना प्रभावित मरीजों की संख्या बढ़कर छह हो गई है। देर रात राज्य में तीन और नए मामले सामने आने के बाद प्रदेश में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या छह हो गई है। 

इन तीनों में से एक मरीज रायपुर, एक महिला बिलासपुर से और एक अन्य मरीज दुर्ग जिले से है। छह मरीजों में से रायपुर के तीन मरीजों और दुर्ग जिले के एक युवक का इलाज रायपुर के एम्स में किया जा रहा है। जबकि दो अन्य लोगों का इलाज उनके जिला मुख्यालय में स्थित अस्पतालों में किया जा रहा है। 

छत्तीसगढ़ में कोरोना का पहला मामला एक सप्ताह पहले सामने आया था। लंदन से लौटी 24 वर्षीय संक्रमित मिली थी। उसकी रिपोर्ट में वायरस के संक्रमण की पुष्टि होने के बाद उसे एम्स में भर्ती कराया गया था। वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य के सभी पत्रकारों से आग्रह किया है कि कोरोना वायरस महामारी के कवरेज के दौरान पूरी सावधानी बरतें, सुरक्षा प्रोटोकॉल का पूरा पालन करें और प्रेस कांफ्रेंस आदि से बचें। 
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सुकमा मुठभेड़ की अंतर्कथाः अति उत्साह में गईं 17 जिंदगियां

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुई नक्सलियों और सुरक्षाबलों की मुठभेड़ में डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी) के 12 लड़ाके और एसटीएफ के 5 जवानों की मौत एक बड़ी चूक का नतीजा थी। खुद को साबित करने और कुछ ज्यादा पाने के लालच में ये लड़ाके इतनी आगे निकल गए कि 'नक्सल के अजगर' कहे जाने वाले हिड़मा दस्ते ने आसानी से इनका शिकार कर लिया।

इनके पीछे सीआरपीएफ 'कोबरा' (कमांडो बटालियन फॉर रिजोल्यूट एक्शन) टीम और '150' बटालियन भी थी, लेकिन डीआरजी के लड़ाकों को भरोसा था कि वे अपने दम पर नक्सलियों को खत्म कर वाहवाही लूट लेंगे। इसी चक्कर में वे बाकी टीमों से काफी आगे निकल गए।

सीआरपीएफ के यूएवी में नक्सल गतिविधियों के फोटो भी नजर आए, इसके बावजूद बिना किसी तालमेल के वे लड़ाके बिल्कुल उसी दिशा में, उसी तरह आगे बढ़ गए, जैसा हिड़मा दस्ता चाहता था। और उनके घेरे में फंसकर जान गंवा बैठे।

डीआरजी में शामिल जवान, आखिर कौन हैं

बता दें कि डीआरजी में स्थानीय आदिवासियों को भर्ती किया गया है। ये लोग कभी नक्सलियों के बहुत निकट माने जाते थे। इनमें बहुत से ऐसे भी थे जो किसी न किसी तरह नक्सल कॉडर का हिस्सा रहे हैं। सरकार ने एक नीति के तहत इनका आत्मसमर्पण कराया। मुख्यधारा में लौटने के बाद इन्हें डीआरजी में शामिल कर लिया गया। ये भी कह सकते हैं कि डीआरजी इन्हीं लोगों के लिए बनाई गई थी।

नक्सल का टॉप कॉडर भी इनकी बहादुरी से परिचित है। यही वजह है कि अब वे डीआरजी को निशाना बनाने की फिराक में रहते हैं। दूसरी ओर, ये जवान भी सरकार और लोगों की नजरों में खुद को साबित करने के लिए सदैव दो कदम आगे चलना चाहते हैं।

नक्सल प्रभावित इलाके में लंबे समय से तैनात सीआरपीएफ के एक कमांडर बताते हैं, ऐसा नहीं है कि इनमें बहादुरी की कमी है। ये जंगलों के लड़ाके हैं। हालांकि इनके पास वैसे हथियार नहीं हैं, जो होने चाहिए। इनका अपना इंटेलिजेंस नेटवर्क है। हर ऑपरेशन में इनका जुनून यही रहता है कि किसी भी तरह से ये खुद को साबित करें।

अनुभवी नेतृत्व की भी चुनौती

यहां एक बड़ी दिक्कत नेतृत्व की है। बड़े ऑपरेशन में भी डीआरजी का नेतृत्व हवलदार या एएसआई करता है। वह सभी मुठभेड़ की रणनीति बनाने में कुशल होगा, ये हर जगह संभव नहीं होता।

सीआरपीएफ में नक्सलियों को मारने पर कोई प्रमोशन नहीं मिलता, जबकि डीआरजी में हर नक्सली की मौत पर कुछ भत्ते और प्रमोशन देने का प्रावधान है। यही वो लालच या चाहत है, जो उन्हें सामंजस्य और नेतृत्व जैसी बातों से दूर ले जाती है। सीआरपीएफ में इस तरह के ऑपरेशन के दौरान डिप्टी कमांडेंट और दो सहायक कमांडेंट साथ रहते हैं।

चार टीमें, दो सौ जवान, मगर होती गई चूक दर चूक ...
शनिवार को मिनपा के जंगलों में कोबरा, सीआरपीएफ बटालियन, एसटीएफ और डीआरजी की संयुक्त टीम विशेष ऑपरेशन के लिए निकली थी और इसमें दो सौ से अधिक जवान थे। कोराजगुड़ा के चिंतागुफा इलाके में इन टीमों ने नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

सीआरपीएफ के मुताबिक, इलाके में नक्सलियों की भारी मौजूदगी का अहसास था। यूएवी से मिली तस्वीर और लोकल इंटेलिजेंस रिपोर्ट से भी यह पुष्टि हो गई थी। उधर, हिड़मा कमांडर का दस्ता, जिसमें नक्सल की सेंट्रल टीम के सदस्य होते हैं, ये कॉडर में टॉप माना जाता है। इनका इंटेलिजेंस नेटवर्क भी बेहद मजबूत है।

इन्होंने डीआरजी को अपने जाल में फंसाया। ये जंगल में उन रास्तों पर अपने सबूत छोड़ते चले गए, जहां से डीआरजी को निकलना था। डीआरजी ने देखा, तो उसके जवान खुश हो गए। उन्होंने यह जानकारी पीछे चल रही सीआरपीएफ तक नहीं पहुंचाई।

चूंकि ये लोग लड़ना तो जानते हैं, लेकिन ऑपरेशन के दौरान कब कौन सा निर्णय लेना है, इसमें ये मार खा जाते हैं। स्थानीय हैं, इन्हें भी जंगलों के चप्पे-चप्पे का हाल मालूम है। कितना आगे जाना है और पीछे स्पोर्ट है या नहीं, दूरी कितनी है, इन बातों की परवाह किए बिना ये लड़ाके बहुत आगे निकल गए।

नतीजा, हिड़मा दस्ते ने इन्हें चारों तरफ से घेर लिया। बाकी टीमों का कोई अता-पता नहीं था। हालांकि एसटीएफ के कुछ जवान डीआरजी के साथ थे। नक्सलियों ने रणनीति के तहत डीआरजी की गोलियां बर्बाद कराईं। उन्होंने जंगल में पटाखे छोड़कर डीआरजी को फायर के लिए मजबूर किया।

डीआरजी बिना किसी नियमों का पालन किए आगे बढ़ते रहे और गुरिल्ला नक्सलियों के चक्रव्यूह में फंस कर रह गए।

नक्सलियों के पास बीपी जैकेट व पटके भी थे

हिड़मा के पास सीजीआरएल, रॉकेट लांचर और मोर्टार जैसे घातक हथियार थे। वे सभी बीपी जैकेट और सिर पर पटका पहने हुए थे। अभी तक जैकेट और पटका केवल सुरक्षाबलों के पास ही होते थे। अब नक्सली भी इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। दूसरी ओर, डीआरजी व एसटीएफ के पास बड़े हथियार नहीं थे।

उनके पास ज्यादातर एके 47 थीं, जिसकी गोलियां नक्सलियों ने अपनी खास रणनीति से व्यर्थ करा दीं। नक्सलियों ने जवानों पर चारों तरफ से फायरिंग की। रॉकेट लांचर और मोर्टार का भी जमकर इस्तेमाल किया।

हिड़मा इन जवानों को अपने चक्रव्यूह में फंसा कर इतनी दूर ले गया कि बाद में सीआरपीएफ जवानों को वहां तक पहुंचने में ही कई घंटे लग गए। यही वजह रही कि नक्सली, डीआरजी और एसटीएफ जवानों के सभी हथियार लूट ले गए।

सीआरपीएफ कमांडर के अनुसार, इस घटना को टाला जा सकता था, बशर्तें डीआरजी के लड़ाके एक समन्वयपूर्ण नीति से आगे बढ़ते। लेकिन इलाके के सबसे बड़े नक्सल लीडर हिड़मा, जिसका अपना बहुत सटीक इंटेलिजेंस नेटवर्क है, द्वारा बनाई गई रणनीति में लड़ाके फंस गए।
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छत्तीसगढ़: नक्सली हमले में शहीद जवानों को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने दी श्रद्धांजलि

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सली हमले में शहीद जवानों को सुकमा में श्रद्धांजलि दी। मुख्यमंत्री बघेल 23 मार्च को रायपुर से हेलीकॉप्टर से सुकमा पहुंचें। सुकमा जिले में शनिवार को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बल के 17 जवान लापता हो गए थे तथा 15 जवान घायल हो गए थे। आज सभी लापता जवानों के शव बरामद कर लिए गए हैं।

राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने जवानों की शहादत पर गहरा दुःख प्रकट किया है। उन्होंने शहीद जवानों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए घटना में घायल जवानों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की है। 

बस्तर क्षेत्र के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुकमा जिले के मिनपा गांव के जंगल में 250 की संख्या में नक्सलियों ने लगभग 1.5 किलोमीटर तक घात लगाकर जवानों पर हमला किया था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को जिले के एलमागुड़ा में नक्सली गतिविधियों की सूचना के बाद चिंतागुफा, बुरकपाल और तिमेलवाड़ा से डीआरजी, एसटीएफ और सीआपीएफ के कोबरा बटालियन के छह सौ जवानों को रवाना किया गया था।

उन्होंने बताया कि जब सुरक्षा बल के जवान मिनपा गांव के जंगल में थे तब लगभग 250 की संख्या में नक्सलियों ने जवानों पर हमला कर दिया। इस घटना में 15 जवान घायल हो गए थे। देर तक दोनों ओर से गोलीबारी के बाद नक्सली वहां से फरार हो गए थे।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना के बाद 17 जवान लापता हो गए थे। बाद में सुरक्षा बलों ने लापता जवानों की खोज में खोजी अभियान चलाया था। आज लापता जवानों का शव बरामद कर लिया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस को जानकारी मिली है कि इस मुठभेड़ के दौरान नक्सलियों के बटालियन नंबर एक का कमांडर हिड़मा अपने दल का नेतृत्व कर कर रहा था। इस दौरान सुरक्षा बलों ने नक्सलियों का जमकर मुकाबला किया और लगभग चार घंटों तक गोलबारी होती रही।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने मुठभेड़ के दौरान आठ से नौ नक्सलियों को मार गिराया है और इतने ही संख्या में नक्सली घायल भी हुए हैं। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस मुठभेड़ के बाद से कम से कम 15 हथियार गायब हैं जिनमें एके 47 और अंडर बैरल ग्रेनेड लांचर जैसे हथियार भी शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि मुठभेड़ में घायल जवानों को रायपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सुकमा जिले में यह नक्सली हमला इस वर्ष का सबसे बड़ा नक्सली हमला है। इससे पहले 2017 में करीब के बुरकापाल क्षेत्र में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 25 जवानों की हत्या कर दी थी।
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छत्तीसगढ़ के सुकमा में 17 जवान शहीद, सुरक्षा बलों की 15 राइफल भी ले उड़े नक्सली

शहीदों को श्रद्धांजलि देते सीएम भूपेश बघेल
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में 17 जवान शहीद हो गए हैं। शनिवार को मुठभेड़ के बाद से ही ये जवान लापता थे। छत्तीसगढ़ पुलिस ने रविवार को यह जानकारी दी। 
पुलिस ने बताया कि नक्सलियों से मुठभेड़ में 5 एसटीएफ और 12 डीआरजी के जवान शहीद हुए हैं। सुरक्षा बल को शनिवार से इन जवानों की तलाश थी। 
 


सुरक्षा बल के लिए यह बड़ा झटका है। पुलिस को जवानों के शव मिनपा के जंगलों में मिले। शनिवार को इसी जगह पर नक्सलियों से मुठभेड़ हुई थी। इसके बाद छत्तीसगढ़ पुलिस ने बताया था कि दर्जनों सुरक्षा बल लापता हैं जबकि 14 जवान घायल हैं। 

छत्तीसगढ़ के डीजीपी डीएम अवस्थी के मुताबिक 17 जवानों के शवों को राज्य पुलिस की रेस्क्यू टीम ने ढूंढ निकाला है। सुरक्षा बलों की 10 एके-47 समेत 15 ऑटोमैटिक राइफल्स लापता हैं।  पुलिस ने बताया कि चिंतागुफा क्षेत्र में कोरोजगुडा पहाड़ियों के पास शनिवार दोपहर एक बजे मुठभेड़ हुई थी। शाम तक सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच कई मुठभेड़ हुईं। नक्सलियों के खिलाफ आपरेशन पुलिस की डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (डीआरजी), स्पेशल टास्क फोर्स और कोबरा टीम के 150 जवानों ने मिलकर किया था। रविवार को बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों को जवानों की तलाश के लिए भेजा गया था।  ... और पढ़ें

छत्तीसगढ़ में नक्सलियों से मुठभेड़ में 11 जवान घायल

छत्तीसगढ़ के उग्रवाद प्रभावित सुकमा जिले के जंगलों में शनिवार को नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में ग्यारह जवान घायल हो गए। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एल्मगुंदा के पास नक्सलियों की मौजूदगी की जानकारी के आधार पर पुलिस की जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी), स्पेशल टास्क फोर्स और कोबरा (कमांडो बटालियन फॉर रिजॉल्यूट एक्शन) की एक संयुक्त टीम के जवानों ने चिंतागुफा, बुरकापाल और तिमेलवाड़ा शिविरों से तलाशी अभियान शुरू किया।

टीम के रायपुर से लगभग 450 किलोमीटर दूर स्थित चिंतागुफा इलाके में खजगुड़ा पहाड़ियों पर दोनों तरफ से गोलीबारी शुरू हो गई। अधिकारी ने बताया कि इस मुठभेड़ में डीआरजी के ग्यारह जवान घायल हो गए। उनमें से दो की हालत गंभीर बनी हुई है। उन्होंने बताया कि प्राप्त जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों के जोरदार हमले में कम से कम चार से पांच नक्सली मारे गए, जबकि इतने ही नक्सली घायल हुए हैं। 
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नक्सली हिंसा में शहीद के परिजनों को अब मिलेंगे 20 लाख रुपये

छत्तीसगढ़ सरकार ने नक्सली हिंसा में शहीद जवानों के परिजनों को दी जाने वाली राशि को बढ़ाकर 20 लाख रुपये कर दिया है। आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इससे पहले नक्सल हिंसा में शहीद जवानों के परिजनों को तीन लाख रुपये एक्सग्रेशिया राशि (अनुग्रह अनुदान) दिया जाता था। अब इसमें 17 लाख की वृद्धि की गई है।

छत्तीसगढ़ सरकार के गृह विभाग द्वारा बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है। राज्य शासन द्वारा पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव पर भारत सरकार की नवीन एसआरई गाइडलाइन के अनुसार नक्सली हिंसा में शहीद जवानों के परिजनों को दी जाने वाली एक्सग्रेशिया राशि में यह वृद्धि की गई है।
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छत्तीसगढ़ में पहले कोरोना वायरस मामले की पुष्टि, लंदन से लौटी 24 वर्षीय युवती संक्रमित

छत्तीसगढ़ में लंदन से लौटी 24 वर्षीय एक युवती के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि की गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को बताया कि राज्य में कोरोना वायरस का यह पहला मामला है। युवती और उसके माता पिता को रायपुर के एम्स में निगरानी में रखा गया है। रायपुर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के अधीक्षक करन पीपरे ने बताया कि रायपुर निवासी 24 वर्षीय एक युवती के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई है।

डाक्टर पीपरे ने बताया, युवती इस महीने की 15 तारीख को लंदन से मुंबई होते हुए रायपुर लौटी थी। युवती लंदन में पढ़ाई करती है। युवती को जब सर्दी, खांसी की शिकायत हुई तब 17 तारीख को युवती का नमूना लिया गया था। उन्होंने बताया कि चिकित्सकों ने उसे और उसके माता-पिता को घर में रहने की सलाह दी थी। बुधवार को युवती के कोरोना वायरस से संक्रमित होने की पुष्टि हुई तब युवती और उसके माता पिता को तत्काल एम्स में भर्ती कर लिया गया। परिवार को पृथक वार्ड में रखा गया है।

वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि युवती का इलाज किया जा रहा है तथा उसकी स्थिति सामान्य है। वहीं उसके माता पिता के भी नमूने ले लिए गए हैं और जांच कराई जा रही है। परिवार एम्स में चिकित्सकों की निगरानी में है। डाक्टर पीपरे ने बताया कि एम्स में राज्य भर से आए कोरोना वायरस के नमूनों की जांच की जा रही है तथा इलाज की व्यवस्था की गई है। उन्होंने लोगों से कहा है कि वे डरे नहीं बल्कि सावधानी बरतें।

इधर राज्य के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बुधवार को बताया था कि राज्य से 114 लोगों के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं जिनमें से 102 की रिपोर्ट मिल चुकी है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि कोरोना वायरस से बचाव के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक होगी। बैठक में कोविड-19 के संबंध में कार्ययोजना आदि पर चर्चा की जाएगी।
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दीपेंदर-तुलसी सहित ये उम्मीदवार पहुंचे राज्यसभा, कई निर्विरोध निर्वाचित

राज्यसभा चुनाव प्रक्रिया संपन्न होने के बाद अब नतीजे आने लगे हैं। छत्तीसगढ़ से कांग्रेस नेता फूलू देवी नेताम और केटीएस तुलसी निर्विरोध चुने गए हैं। हरियाणा में दीपेंदर सिंह हूडा भी निर्विरोध निर्वाचित हुए हैं। 
 
 

वहीं, तमिलनाडु में नामांकन दाखिल करने वाले सभी छह उम्मीदवार जीते हैं। डीएमके के त्रिची शिवा, एआर एलांगो और एंथियुर सेलवराज, एआईएडीएमके के केपी मुनुसामी और एम थंबीदुरई व तमिल मनिला कांग्रेस के जीके वासन ने जीत हासिल की है। 
 
बिहार से पांच उम्मीदवार चुने गए
बिहार से पांच राज्यसभा सीटों के लिए नामांकन दाखिल करने वाले पांच उम्मीदवारों का चुनाव किया गया है। जिनमें हरिवंश नारायण सिंह (उपसभापति, राज्यसभा), जेडीयू से रामनाथ ठाकुर, भाजपा से विवेक ठाकुर, राष्ट्रीय जनता दल से प्रेमचंद गुप्ता और अमरेन्द्र धारी सिंह।
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छत्तीसगढ़: रायगढ़ जिले में पिकअप वैन पलटा, चार की मौत, 22 घायल

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में एक पिअकप वैन के पलट जाने से उसमें सवार तीन महिलाओं और पांच साल के एक बच्चे की मौत हो गई और 22 अन्य घायल हो गए। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी।

एक अधिकारी ने बताया कि दुर्घटना धरमजयगढ़ पुलिस थानांतर्गत क्षेत्र में शनिवार को हुई जब तीस की संख्या में लैलूंगा के निवासी गांव वाले एक मंदिर में दर्शन करने के बाद लौट रहे थे।

उन्होंने बताया कि चरखापारा गांव के समीप चालक ने वाहन पर नियंत्रण खो दिया जिसके बाद वाहन सड़क पर फिसल कर पलट गया। तीन महिलाओं और पांच साल के एक बच्चे की दुर्घटनास्थल पर ही मौत हो गई।  उन्होंने कहा कि 22 घायलों को पड़ोस के जशपुर जिले के पत्थलगांव में एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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