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सरकारी फंड के इस्तेमाल पर रियल-टाइम निगरानी: छत्तीसगढ़ में नया मॉडल मंजूर; जानें कैसे बदलेगी व्यवस्था?

Wed, 16 Sep 2026 08:18 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रायपुर Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Wed, 16 Sep 2026 08:18 PM IST
सार

छत्तीसगढ़ कैबिनेट ने राज्य वित्तपोषित चिह्नित योजनाओं के लिए S-SNA मॉडल को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था में योजनाओं की राशि का केंद्रीकृत प्रबंधन होगा और वास्तविक जरूरत के समय ही भुगतान किया जाएगा। सरकार फंड, खर्च और शेष राशि की रियल-टाइम निगरानी करेगी।

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Major Financial Reform in Chhattisgarh Govt Approves Real-Time Fund Monitoring Model
सीएम विष्णुदेव साय - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और आधुनिक बनाने के लिए राज्य वित्तपोषित चिह्नित योजनाओं के लिए स्टेट सिंगल नोडल एजेंसी (S-SNA) मॉडल लागू करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। इस व्यवस्था के माध्यम से सरकार योजनाओं के फंड की ऑनलाइन निगरानी करेगी और धन का वास्तविक उपयोग आवश्यकता के समय ही सुनिश्चित करेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में इस पर मुहर लगाई गई।
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केंद्रीकृत मदर अकाउंट खोला जाएगा
नई व्यवस्था के तहत पुरानी प्रणाली को बदलते हुए प्रत्येक योजना के लिए एक केंद्रीकृत मदर अकाउंट खोला जाएगा। पूर्व में विभिन्न क्रियान्वयन एजेंसियों के बैंक खातों में अग्रिम रूप से राशि जमा रखी जाती थी। अब सरकार केवल उसी स्थिति में राशि जारी करेगी, जब वास्तविक भुगतान की आवश्यकता होगी। भुगतान सीधे संबंधित लाभार्थी या वेंडर के बैंक खाते में स्थानांतरित किया जाएगा। इसमें प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और गैर-प्रत्यक्ष लाभ अंतरण, दोनों प्रकार के भुगतान शामिल होंगे।
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मदर अकाउंट से फंड का केंद्रीय प्रबंधन
सरकार जस्ट-इन-टाइम फंड रिलीज की नीति पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इससे विभिन्न विभागों या एजेंसियों के बैंक खातों में अप्रयुक्त रहने वाली सरकारी राशि में कमी आएगी। सरकार का लक्ष्य योजनाओं में उपलब्ध निधि के फ्लोट को लगभग शून्य के स्तर पर बनाए रखना है। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से योजना में प्राप्त राशि, जारी व्यय सीमा, वास्तविक खर्च और बची हुई शेष रकम की रियल-टाइम निगरानी की जाएगी। इस व्यवस्था में मेकर-चेकर आधारित ऑडिट ट्रेल भी शामिल है। यह प्रत्येक वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड सुरक्षित रखकर निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ बनाएगा। इससे अनधिकृत भुगतान, वित्तीय अनियमितताओं और बैंकिंग धोखाधड़ी को रोकने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार जिला, ब्लॉक, पंचायत और ग्राम स्तर की चिह्नित क्रियान्वयन एजेंसियों को भी इस नई प्रणाली से जोड़ेगी।
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निष्क्रिय खातों और ब्याज प्रबंधन पर फोकस
सीएम विष्णु देव साय ने बताया कि सरकार का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के लिए उपलब्ध प्रत्येक रुपये का प्रभावी और अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। नई व्यवस्था से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन की रियल-टाइम ट्रैकिंग भी संभव हो सकेगी। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के अनुसार, यह मॉडल राज्य के नकदी प्रबंधन को बेहतर बनाएगा। वर्तमान में विभागों के बैंक खातों में समय से पहले धन जारी होने के कारण बड़ी राशि लंबे समय तक अनुपयोगी पड़ी रहती है।

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निष्क्रिय खातों में करीब 530 करोड़ रुपये
राज्य में विभागीय निष्क्रिय खातों में करीब 530 करोड़ रुपये और भारतीय रिजर्व बैंक के डीईएएफ खातों में लगभग 100 करोड़ रुपये की निष्क्रिय राशि दर्ज की गई है। नई व्यवस्था के लागू होने से ऐसी निष्क्रिय राशि में कमी आएगी, जिससे सरकार को अनावश्यक ऋण लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी और ब्याज का बोझ भी घटेगा। इसके अतिरिक्त योजना की राशि पर मिलने वाले ब्याज को राज्य की संचित निधि में जमा किया जाएगा।

क्रियान्वयन की चरणबद्ध प्रक्रिया
राज्य सरकार इस मॉडल को एक साथ लागू करने के बजाय चरणबद्ध तरीके से क्रियान्वित करेगी। प्रथम चरण में योजना की पहचान के बाद वित्त विभाग की मंजूरी ली जाएगी। इसके पश्चात स्कीम कोड का आवंटन और ई-कोश मैपिंग की प्रक्रिया पूरी होगी। तत्पश्चात एस-एसएनए और जेडबीएसए खाते खोले जाएंगे तथा कोषालय के माध्यम से अंतिम भुगतान संपन्न होगा। राज्य वित्त विभाग ने S-SNA मॉडल के क्रियान्वयन के संबंध में 31 अगस्त 2026 को वित्त निर्देश भी जारी किया है। यह नई व्यवस्था केवल राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित चिह्नित योजनाओं और विभागीय योजनाओं पर लागू होगी। केंद्र प्रायोजित योजनाओं, केंद्रीय क्षेत्र की योजनाओं और उन व्यवस्थाओं को इस मॉडल से बाहर रखा गया है, जहां आहरण एवं संवितरण अधिकारी सीधे ई-कोश के माध्यम से भुगतान करते हैं।
 
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