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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Twenty-five years ago, a farmer went to Mumbai to become a cricketer. Eighteen martyrs live on his farm

25 साल पहले क्रिकेटर बनने मुंबई गया था किसान: अब उसी शहर से जुड़ी है ऐसी कहानी कि खेत में बसते हैं 18 बलिदान

Thu, 17 Sep 2026 07:33 PM IST
अमन कोशले अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रायपुर Published by: अमन कोशले Updated Thu, 17 Sep 2026 07:33 PM IST
सार

बालोद के इस किसान का खेत सिर्फ फसल नहीं उगाता, यहां देश के लिए बलिदान हुए 18 जवानों की यादें भी जिंदा हैं। 10 लाख खर्च कर प्रतिमाएं बनवाने वाले लोकेंद्र की कहानी क्रिकेट प्रेम, देशभक्ति और सम्मान का अनोखा संगम है।

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Twenty-five years ago, a farmer went to Mumbai to become a cricketer. Eighteen martyrs live on his farm
सूर्यकुमार से मिले किसान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

क्रिकेट के जुनून ने किसी को खिलाड़ी बना दिया, तो किसी ने इसी जुनून को सम्मान और देशभक्ति से जोड़ दिया। हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के देवगहन गांव के किसान लोकेंद्र कुमार साहू की। क्रिकेटर बनने का सपना लेकर करीब 25 साल पहले  मुंबई पहुंचे लोकेंद्र अब किसान हैं, लेकिन क्रिकेट के प्रति उनका जुनून आज भी बरकरार है।
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उन्होंने अपनी फसल बेचकर करीब दो लाख रुपये जुटाए और भारतीय क्रिकेटर सूर्यकुमार यादव की चार क्विंटल वजनी आदमकद सीमेंट प्रतिमा तैयार कराई। इतना ही नहीं प्रतिमा को पिकअप में लेकर वे करीब 1300 किलोमीटर का सफर तय कर मुंबई पहुंचे और 14 सितंबर को सूर्यकुमार के जन्मदिन पर उन्हें यह अनोखा तोहफा दिया।
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खेत बना बलिदान की यादों का स्थल
लोकेंद्र का क्रिकेट प्रेम सिर्फ क्रिकेटरों तक सीमित नहीं है। उनके गांव देवगहन स्थित खेत में कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई हमले, पुलवामा, गलवान घाटी और छत्तीसगढ़ के नक्सली हमलों में बलिदान हुए 18 जवानों की आदमकद प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन प्रतिमाओं को बनवाने में उन्होंने अपनी जेब से करीब 10 लाख रुपये खर्च किए हैं।
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इसके अलावा उन्होंने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की प्रतिमा भी अपने खेत में स्थापित कराई है। लोकेंद्र की इच्छा है कि बलिदान जवानों की इन प्रतिमाओं का लोकार्पण किसी भारतीय क्रिकेटर के हाथों हो।

सूर्यकुमार से मिली मुलाकात
13 सितंबर को लोकेंद्र सूर्यकुमार की प्रतिमा लेकर मुंबई के लिए रवाना हुए थे। अगले दिन मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने काफी समय तक क्रिकेटर के आवास का पता तलाशा। करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद सूर्यकुमार यादव ने उन्हें अंदर बुलाया और मुलाकात की।

लोकेंद्र के मुताबिक, सूर्यकुमार ने प्रतिमा की बनावट और चेहरे की आकृति की प्रशंसा की। लोकेंद्र ने बताया कि एशिया कप के दौरान पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए लोगों के परिवारों की मदद के लिए सूर्यकुमार द्वारा मैच फीस दान करने के फैसले से वे प्रभावित हुए थे। इसी भावना से उन्होंने क्रिकेटर की प्रतिमा बनवाने का फैसला किया।


सूर्यकुमार ने जल्द छत्तीसगढ़ आकर लोकेंद्र के परिवार से मिलने का आश्वासन दिया है। अब लोकेंद्र चाहते हैं कि सूर्यकुमार उनके गांव पहुंचें और खेत में स्थापित बलिदानों की प्रतिमाओं का लोकार्पण करें।
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