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हरियाणा में पशु मेलों के कायाकल्प की तैयारी, अब होंगे स्मार्ट मेले
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 16 Apr 2017 09:49 AM IST
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पशु मेले की तस्वीर
हरियाणा सरकार अब प्रदेश में लगने वाले पशु मेलों को नया रूप देने की तैयारी में है। अब तक इन मेलों का आयोजन पुराने तरीकों से होता रहा है, अब इन्हें स्मार्ट मेलों का रूप दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से करवाए गए सर्वे में यह बात सामने आई है कि प्रदेश में लगने वाले पशु मेले खस्ताहाल तरीके से लग रहे हैं। जबकि पशुआें की कीमत और नस्ल यहां अच्छी खासी है।
मुख्यमंत्री ने इस मामले में अब पंजाब पैटर्न अपनाने के लिए कहा है। सीएमओ की टीम पंजाब के किलियांवाली का दौरा भी कर चुकी है। अब तक यह पशु मेले 1971 के सोसायटी एक्ट के तहत लग रहे थे। सरकार ने हाल में ही इस एक्ट में संशोधन किया है।
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मुख्यमंत्री ने इस मामले में अब पंजाब पैटर्न अपनाने के लिए कहा है। सीएमओ की टीम पंजाब के किलियांवाली का दौरा भी कर चुकी है। अब तक यह पशु मेले 1971 के सोसायटी एक्ट के तहत लग रहे थे। सरकार ने हाल में ही इस एक्ट में संशोधन किया है।
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पशु मेले की तस्वीर
पंजाब का अध्ययन करने के बाद सरकार का मानना है कि सालाना 50 से 60 करोड़ की आमदनी होगी। इससे पशु मेलों का भी उत्थान होगा। इस उत्थान के लिए क्रेता और विक्रेता दोनों से सरकारी फीस लेने का प्रावधान किया जाएगा। वर्तमान में यह फीस मात्र 50 रुपये है।
अधिकारियों के सर्वे में यह भी सामने आया है कि सुविधाओं के अभाव में पशु क्रूरता का शिकार हो रहे हैं। मेले में पशुओं को ठीक से पीने का पानी भी नहीं मिल रहा। झज्जर और फतेहाबाद पशु मेले को सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लेने की तैयारी कर रही है।
अधिकारियों के सर्वे में यह हुआ खुलासा
1. पशुआें को जब बेचा जाता है तो उनका दूध रोक लिया जाता है जिससे दुधारू पशु की कीमत अधिक मिले
2. देखने में आया है गर्भवती गाय मेले में बछड़े को जन्म देती हैं और उसकी देखभाल नहीं हो पाती
3. ट्रक में रैंप न होने के कारण पशुओं को उतारने के दौरान वह चोटिल हो जाते हैं
हमने पंजाब का मॉडल स्टडी किया है। पशु मेलों को बेहतर करने का प्रयास है। पूरी उम्मीद कि पशु मेले पहले से बेहतर होंगे।
-नवराज संधू, अतिरिक्त मुख्य सचिव पंचायत एवं विकास विभाग, हरियाणा।
अधिकारियों के सर्वे में यह भी सामने आया है कि सुविधाओं के अभाव में पशु क्रूरता का शिकार हो रहे हैं। मेले में पशुओं को ठीक से पीने का पानी भी नहीं मिल रहा। झज्जर और फतेहाबाद पशु मेले को सरकार पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लेने की तैयारी कर रही है।
अधिकारियों के सर्वे में यह हुआ खुलासा
1. पशुआें को जब बेचा जाता है तो उनका दूध रोक लिया जाता है जिससे दुधारू पशु की कीमत अधिक मिले
2. देखने में आया है गर्भवती गाय मेले में बछड़े को जन्म देती हैं और उसकी देखभाल नहीं हो पाती
3. ट्रक में रैंप न होने के कारण पशुओं को उतारने के दौरान वह चोटिल हो जाते हैं
हमने पंजाब का मॉडल स्टडी किया है। पशु मेलों को बेहतर करने का प्रयास है। पूरी उम्मीद कि पशु मेले पहले से बेहतर होंगे।
-नवराज संधू, अतिरिक्त मुख्य सचिव पंचायत एवं विकास विभाग, हरियाणा।