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Haryana Nikay Chunav: शहर की सरकार भी भाजपा की हो ली रे... ये है कमल खिलने की वजह और कांग्रेस के हार के कारण
Thu, 13 Mar 2025 08:53 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 13 Mar 2025 08:53 AM IST
सार
हरियाणा विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक बनाने के बाद भाजपा ने बुधवार को राज्य के निकाय चुनावों में प्रचंड जीत दर्ज की है। पांचों नगर परिषदों को भाजपा ने भगवा रंग में रंग दिया है। 23 में से आठ पालिकाओं में उसे जीत हासिल हुई है, बाकी में निर्दलीय जीते हैं। कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई।
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शहरी स्थानीय निकायों चुनाव में जीत प्राप्त करने के बाद मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा विधानसभा चुनावों में जीत की हैट्रिक बनाने के छह महीने से भी कम समय में सत्तारूढ़ भाजपा ने बुधवार को राज्य के निकाय चुनावों में एकतरफा जीत दर्ज की। दस में से नौ मेयर सीटें जीत लीं।
पांचों नगर परिषदों को भी भाजपा ने भगवा रंग में रंग दिया है। अध्यक्ष पद जीत लिए हैं। 23 में से 8 पालिकाओं में उसे जीत हासिल हुई है, बाकी में निर्दलीय जीते हैं। कुल 38 शहरों में हुए निकाय चुनाव में उसने 22 में कब्जा कर लिया है। बाकी में निर्दलीय। कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई।
भाजपा का दावा है कि 90 फीसदी से ज्यादा पार्षद उसके चुने गए हैं। इस जीत से भाजपा में खुशी की लहर दौड़ गई। होली से दो दिन पहले ही भाजपाइयों की होली हो गई।
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पहली बार नगर निगम बने मानेसर में निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. इंद्रजीत यादव ने भाजपा के सुंदरलाल यादव को हराकर मेयर पद पर जीत हासिल की है। भाजपा ने 7 निगमों गुरुग्राम, फरीदाबाद, यमुनानगर, करनाल, रोहतक, हिसार, पानीपत में वापसी की है।
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पांचों नगर परिषदों को भी भाजपा ने भगवा रंग में रंग दिया है। अध्यक्ष पद जीत लिए हैं। 23 में से 8 पालिकाओं में उसे जीत हासिल हुई है, बाकी में निर्दलीय जीते हैं। कुल 38 शहरों में हुए निकाय चुनाव में उसने 22 में कब्जा कर लिया है। बाकी में निर्दलीय। कांग्रेस खाता नहीं खोल पाई।
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भाजपा का दावा है कि 90 फीसदी से ज्यादा पार्षद उसके चुने गए हैं। इस जीत से भाजपा में खुशी की लहर दौड़ गई। होली से दो दिन पहले ही भाजपाइयों की होली हो गई।
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पहली बार नगर निगम बने मानेसर में निर्दलीय उम्मीदवार डॉ. इंद्रजीत यादव ने भाजपा के सुंदरलाल यादव को हराकर मेयर पद पर जीत हासिल की है। भाजपा ने 7 निगमों गुरुग्राम, फरीदाबाद, यमुनानगर, करनाल, रोहतक, हिसार, पानीपत में वापसी की है।
इसके अलावा सोनीपत व अंबाला के मेयर पद पर विजयी रही है। इन दो जगह उपचुनाव हुआ था। कांग्रेस को अपने गढ़ में भी हार का सामना करना पड़ा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गढ़ रोहतक में भाजपा ने एक बार फिर मेयर की कुर्सी जीत ली है। वहीं, सांसद कुमारी सैलजा के क्षेत्र सिरसा नगर परिषद में पहली बार भाजपा को जीत हासिल हुई है।
मानेसर में, निर्दलीय उम्मीदवार इंद्रजीत यादव भाजपा प्रतिद्वंद्वी सुंदर लाल को 2,293 मतों के अंतर से हराकर पहली महापौर बनीं। कांग्रेस के निखिल मदान निवर्तमान सोनीपत महापौर थे। 2024 के विधानसभा चुनावों से पहले वे भाजपा में गए और विधायक बन गए। इस बार सोनीपत से भाजपा के राजीव जैन जीते।
भाजपा की जीत के कारण
- प्रदेश प्रदेश में सरकार होने का फायदा मिला। पांच महीने पहले ही भाजपा ने प्रदेश में हैट्रिक लगाई। प्रचार में इसे भुनाया और ट्रिपल इंजन का नारा दिया।
- विधानसभा चुनाव की तरह ही बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया। छोटी-छोटी टीमें वार्ड-वार्ड जाकर लोगों को भाजपा की नीतियों से अवगत कराती रहीं।
- मुख्यमंत्री नायब सैनी ने खुद मोर्चा संभाला। सभी निगमों में मंत्रियों को लगाया। सभी बड़े नेता वार्डों में भी प्रचार करते दिखे।
कैथल, इंद्री व जाखल में लगा झटका
- कैथल जिले की तीनों नगर पालिका पूंडरी, सीवन और कलायत में भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। तीनों जगह चेयरमैन पद पर निर्दलीय प्रत्याशी जीते हैं और पिछली बार यहां भाजपा का कब्जा था।
- करनाल के इंद्री नगर पालिका में आजाद प्रत्याशी राकेश कुमार को जीत मिली है। यहां पिछले प्लान में भाजपा समर्थित सिवानी गोयल अध्यक्ष थीं।
- जाखल नगर पालिका में प्रचार के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी खुद प्रचार के लिए गए थे, लेकिन यहां निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत हासिल की है।
कांग्रेस की हार के कारण
- संगठन नहीं बना पाने के कारण पहले लोकसभा, फिर विधानसभा और अब निकाय चुनावों में हार झेलनी पड़ी।
- कांग्रेस एकजुट नहीं हो पाई। चुनावों के बीच प्रदेश प्रभारी दीपक बाबरिया बदल दिए गए। प्रधान हटाने की चर्चा भी चलती रही। नेता प्रतिपक्ष भी नहीं बन पाया।
- चुनाव प्रचार में केवल दीपेंद्र हुड्डा दिखाई दिए। भूपेंद्र हुड्डा, सांसद कुमारी सैलजा व रणदीप सुरजेवाला ने दूरी बनाए रखी। सांसद भी कम ही बाहर निकले।
रोहतक, सिरसा व जुलाना गंवाए
- पूर्व सीएम हुड्डा के गढ़ रोहतक में भाजपा के मेयर प्रत्याशी रामअवतार वाल्मीकि ने कांग्रेस के सूरजमल किलोई को 45 हजार 198 वोटों से हराया। हुड्डा के वार्ड 14 में भी भाजपा को जीत मिली है। भाजपा की कंचन खुराना ने कांग्रेस के पूर्व गृह मंत्री सुभाष बतरा की बेटी आरती जुनेजा को 3176 वोटों से हराया।
- कांग्रेस विधायक विनेश फोगाट के क्षेत्र जुलाना में नगर पालिका चेयरमैन पद पर भाजपा ने कब्जा जमाया है।
- कांग्रेस सांसद कुमारी के क्षेत्र सिरसा नगर परिषद में भाजपा प्रत्याशी ने चेयरमैन पद पर जीत हासिल की है।
नगर निगम
- सबसे बड़ी जीत: 3,16,852 वोटों से फरीदाबाद की प्रवीण बत्रा जोशी
- सबसे छोटी जीत: 2293 वोटों से मानेसर की डॉ. इंद्रजीत यादव
नगर परिषद
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- सबसे बड़ी जीत : 32,577 वोटों से थानेसर की माफी देवी
- सबसे छोटी जीत: 1891 वोटों से पटौदी-जटौली मंडी के प्रवीण कुमार
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नगर पालिका
- सबसे बड़ी जीत : 4,425 वोटों से खरखौदा के हीरालाल
- सबसे छोटी जीत: 43 वोटों से लोहारू के प्रदीप कुमार
देश में सबसे बड़ी जीत प्रवीण बत्रा की
सीएम सैनी ने कहा किया कि फरीदाबाद में मेयर पद पर भाजपा प्रत्याशी प्रवीण बत्रा जोशी ने देश में सबसे बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने 3,16,852 वोटों से कांग्रेस की लता रानी को हराया है।
सीएम सैनी ने कहा किया कि फरीदाबाद में मेयर पद पर भाजपा प्रत्याशी प्रवीण बत्रा जोशी ने देश में सबसे बड़ी जीत हासिल की है। उन्होंने 3,16,852 वोटों से कांग्रेस की लता रानी को हराया है।