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पंजाब विधानसभा चुनाव: सीएम फेस घोषित करने पर राजनीतिक दलों को फायदा या नुकसान, क्या कहते हैं ट्रेंड?
Thu, 03 Sep 2026 07:01 AM IST
शाहिल शर्मा
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: शाहिल शर्मा
Updated Thu, 03 Sep 2026 07:01 AM IST
सार
साल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनावों में ट्रेंड देखें तो अधिकतर दलों ने सीएम फेस पर ही चुनाव लड़े और उन्हें फायदा भी मिला। इन चुनावों में सीएम फेस के साथ-साथ मुद्दे भी अहम रहे।
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पंजाब विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पंजाब के विधानसभा चुनावों से पहले सीएम चेहरा घोषित करने का भी ट्रेंड रहा है। यह पैटर्न असरदार तो रहता है मगर इसे निर्णायक नहीं कहा जा सकता, क्योंकि मजबूत सीएम फेस के साथ-साथ जमीनी स्तर पर मजबूत संगठन और अनुकूल राजनीतिक माहौल भी जीत के लिए बड़ा आधार बनते हैं। कमजोर चेहरों और पार्टी विरोधी लहर की वजह से दलों ने नुकसान भी झेला है।
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साल 1997 से 2022 तक के विधानसभा चुनावों में ट्रेंड देखें तो अधिकतर दलों ने सीएम फेस पर ही चुनाव लड़े और उन्हें फायदा भी मिला। इन चुनावों में सीएम फेस के साथ-साथ मुद्दे भी अहम रहे। इसके अलावा दलों ने जातीय समीकरणों को भी साधते हुए अपने सीएम फेस घोषित किए। अब फरवरी 2027 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव के दौरान भी दलों की ओर से सीएम फेस पर मंथन जारी है। अभी तक आम आदमी पार्टी अपना सीएम फेस घोषित कर चुकी है, जबकि भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल की रणनीति अबकी इस दिशा में अलग है।
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सीएम फेस के साथ चुनाव लड़ने के पैटर्न को यदि देखें तो साल 1997 में प्रकाश सिंह बादल शिअद-भाजपा गठबंधन के प्रमुख चेहरे थे। मुद्दे भी असरदार रहे, लिहाजा पार्टी को जीत हासिल हुई। साल 2002 के चुनाव में शिअद की ओर से बादल ही चेहरा थे, मगर कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को प्रमुख चेहरा बनाकर मैदान में उतारा। सत्ता विरोधी लहर भी थी। नतीजतन बादल हार गए और कैप्टन अमरिंदर सीएम बने।
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साल 2007 और 2012 में शिअद-भाजपा गठबंधन ने प्रकाश सिंह बादल के नाम और सरकार के काम पर चुनाव लड़ा। इस दौरान कांग्रेस की ओर से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को ही प्रमुख चेहरा बनाया गया। पहले चुनाव में कांग्रेस सरकार के खिलाफ सत्ता-विरोधी माहौल, मजबूत ग्रामीण-सिख आधार, अकाली दल का संगठन और गठबंधन का सामाजिक समीकरण जीत का आधार बना, जबकि 2012 में बादल के चेहरे और उनकी पहली पारी के विकास कार्यों पर मतदाताओं ने फिर मुहर लगाई। नतीजतन लगातार दूसरी जीत हासिल हुई।
साल 2017 में भी मुकाबले में बादल और कैप्टन ही प्रमुख चेहरों के तौर पर आमने-सामने थे, मगर 10 साल की शिअद-भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, नशे, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। हालांकि प्रकाश सिंह बादल का व्यक्तिगत कद बड़ा था, लेकिन सरकार के खिलाफ नाराजगी की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन का नुकसान हुआ।
साल 2022 में बने थे नए समीकरण
साल 2022 में कांग्रेस ने दलित चेहरे पर दांव खेलते हुए दो बार के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर छह माह के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को प्रमुख चेहरा बनाया। ‘साड्डा चन्नी-साड्डा सीएम’ नारा भी दिया गया, मगर कांग्रेस की अंदरूनी कलह और आम आदमी पार्टी के वादों ने सत्ता पलट दी। आप ने अपने वादों और गारंटियों के साथ भगवंत सिंह मान को प्रमुख चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा। नतीजतन भगवंत मान की लोकप्रियता ने चन्नी के दलित कार्ड को पीछे छोड़ दिया।
साल 2027 के लिए क्या?
आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल साल 2027 के लिए भगवंत सिंह मान को सीएम फेस घोषित कर चुके हैं। कांग्रेस ने 2027 के लिए अब तक किसी एक नेता को औपचारिक मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। इसी मुद्दे पर अंदरूनी कलह के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल कह चुके हैं कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ेगी। जीत के बाद राहुल गांधी सीएम फेस तय करेंगे।
शिरोमणि अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल चुनावी तैयारी में सक्रिय हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा भी की है मगर पार्टी की ओर से औपचारिक सीएम फेस की घोषणा अभी नहीं हुई है। भाजपा भी साफ कर चुकी है कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। जीते तो संभवतः जट सिख चेहरे को सीएम बनाया जाएगा।
साल 2017 में भी मुकाबले में बादल और कैप्टन ही प्रमुख चेहरों के तौर पर आमने-सामने थे, मगर 10 साल की शिअद-भाजपा सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर, नशे, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने कांग्रेस को फायदा पहुंचाया। हालांकि प्रकाश सिंह बादल का व्यक्तिगत कद बड़ा था, लेकिन सरकार के खिलाफ नाराजगी की वजह से शिअद-भाजपा गठबंधन का नुकसान हुआ।
साल 2022 में बने थे नए समीकरण
साल 2022 में कांग्रेस ने दलित चेहरे पर दांव खेलते हुए दो बार के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह को दरकिनार कर छह माह के पूर्व सीएम चरणजीत सिंह चन्नी को प्रमुख चेहरा बनाया। ‘साड्डा चन्नी-साड्डा सीएम’ नारा भी दिया गया, मगर कांग्रेस की अंदरूनी कलह और आम आदमी पार्टी के वादों ने सत्ता पलट दी। आप ने अपने वादों और गारंटियों के साथ भगवंत सिंह मान को प्रमुख चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा। नतीजतन भगवंत मान की लोकप्रियता ने चन्नी के दलित कार्ड को पीछे छोड़ दिया।
साल 2027 के लिए क्या?
आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल साल 2027 के लिए भगवंत सिंह मान को सीएम फेस घोषित कर चुके हैं। कांग्रेस ने 2027 के लिए अब तक किसी एक नेता को औपचारिक मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं किया है। इसी मुद्दे पर अंदरूनी कलह के बीच पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल कह चुके हैं कि पार्टी सामूहिक नेतृत्व के साथ चुनाव लड़ेगी। जीत के बाद राहुल गांधी सीएम फेस तय करेंगे।
शिरोमणि अकाली दल की ओर से सुखबीर सिंह बादल चुनावी तैयारी में सक्रिय हैं और उन्होंने चुनाव लड़ने की घोषणा भी की है मगर पार्टी की ओर से औपचारिक सीएम फेस की घोषणा अभी नहीं हुई है। भाजपा भी साफ कर चुकी है कि सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा। जीते तो संभवतः जट सिख चेहरे को सीएम बनाया जाएगा।