अपराध के दलदल में फंस रहे किशोर: चंडीगढ़ में चार साल में 587 नाबालिग गिरफ्तार, आखिर क्यों बन रहे क्रिमिनल
जहां पहले किशोरों को चोरी, स्नैचिंग या दंगा फैलाने जैसे छोटे अपराधों में पकड़ा जाता था, अब हत्या के प्रयास जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, किशोरों द्वारा किए गए अपराधों में सबसे अधिक चोरी के 86, स्नैचिंग के 64 और मारपीट और झगड़े के मामलों में 60 किशोर गिरफ्तार हुए हैं।
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अपराध करने वाले नाबालिगों को सुधरने का मौका देने के लिए देश के कानून में उनके प्रति नरमी बरती गई है। किशोर न्याय अधिनियम (जुवेनाइल जस्टिस एक्ट) के तहत बच्चों और नाबालिगों के खिलाफ मामूली या कम सजाएं होती हैं। इसका फायदा अपराधी उठा रहे हैं और अपराध के लिए बड़ी संख्या में बच्चों का इस्तेमाल कर रहे हैं।
आंकडे़ बताते हैं कि चंडीगढ़ में बीते 5 साल 4 महीने में गंभीर घटनाओं को अंजाम दिया गया, जिसमें 587 नाबालिगों की गिरफ्तारी हुई। 2020 से 2025 के बीच पकड़े गए 587 किशोरों में से अधिकतर की उम्र 16–18 वर्ष (299 मामले) और 12–16 वर्ष (281 मामले) के बीच है। इनमें से 7 ही ऐसे थे जिनकी उम्र 12 वर्ष से कम थी।
हत्या के प्रयास के मामलों में 64 किशोर हुए गिरफ्तार
चंडीगढ़ में किशोर अब सिर्फ जेबकतरी या चोरी तक सीमित नहीं रह गए हैं। किशोर हत्या का प्रयास, हथियारों से हमले, दुष्कर्म, चोरी, लूट और झपटमारी जैसी बड़ी वारदातों में गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 2020 से लेकर अप्रैल 2025 तक कुल 64 किशोरों को हत्या के प्रयास के मामलों में पकड़ा गया। सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा 2024 का है, जब अकेले 19 किशोरों को इस अपराध में पकड़ा गया, जो पांच वर्षों में सबसे अधिक है। वहीं, 2025 के शुरुआती चार महीनों में ही 13 किशोरों को इसी अपराध में हिरासत में लिया जा चुका है।
चोरी, स्नैचिंग और मारपीट के मामले भी बढ़े
जहां पहले किशोरों को चोरी, स्नैचिंग या दंगा फैलाने जैसे छोटे अपराधों में पकड़ा जाता था, अब हत्या के प्रयास जैसे अपराध तेजी से बढ़े हैं। आंकड़ों के अनुसार, किशोरों द्वारा किए गए अपराधों में सबसे अधिक चोरी के 86, स्नैचिंग के 64 और मारपीट और झगड़े के मामलों में 60 किशोर गिरफ्तार हुए हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार इन अपराधों में चाकू और लोहे की रॉड जैसे हथियारों का इस्तेमाल बढ़ा है और अधिकतर घटनाएं गैंग रंजिश या बदले की भावना से प्रेरित होती हैं।
आसान बेल, बार-बार अपराध
कई किशोर बाल सुधार गृह में आपस में संपर्क बनाते हैं और रिहा होने के बाद फिर से संगठित होकर अपराध करते हैं। बेल मिलना आसान है और अधिकतम सजा कम होती है, चाहे अपराध कितना भी गंभीर क्यों न हो। यही वजह है कि अपराधी भी किशोरों का इस्तेमाल अपराधों के लिए करते हैं, क्योंकि उन्हें पता होता है कि किशोर न्याय प्रणाली सख्त नहीं है।
वर्ष 2020 से 2025 (31 अप्रैल तक) तक पकड़े गए किशोरों का विवरण
अपराध 2020 2021 2022 2023 2024 2025 (31 अप्रैल तक) कुल
हत्या 4 4 2 17 4 5 36
हत्या का प्रयास 11 5 6 10 19 13 64
दुष्कर्म 4 7 2 15 5 2 38
4. अपहरण 1 3 0 4 0 3 11
5. छेड़छाड़ 1 7 0 0 0 1 9
6. मारपीट 10 5 12 11 13 5 56
7. दंगा 3 7 20 17 10 3 60
8. डकैती 3 2 5 7 0 0 17
9. चोरी (छीनाझपटी सहित) 2 3 7 5 0 2 19
10. छीनाझपटी 2 14 23 17 6 2 64
11. सेंधमारी 15 13 10 5 6 1 50
12. चोरी 13 29 14 21 8 1 86
13. विविध आईपीसी अपराध 13 4 17 14 9 4 61
14. विशेष स्थानीय कानून 1 0 2 7 6 0 16
15. कुल 83 103 125 150 86 40 587
आयु वर्ग के अनुसार
आयु वर्ग संख्या
12 वर्ष से कम 7
12 से 16 वर्ष 281
16 से 18 वर्ष 299
कुल 587
बच्चों की परवरिश में माता-पिता की भूमिका सबसे अहम होती है। बच्चे को स्कूल भेजने से लेकर घर आने तक उसकी सभी गतिविधियों और संगत पर नजर रखें। अगर उनके व्यवहार में बदलाव महसूस हो तो डॉक्टर की सलाह लें। अगर बच्चे नशा या अपराध में शामिल हो रहे हैं तो उनमें जबरदस्त बदलाव नजर आ जाता है, जिसे परिवार वाले आसानी से समझ सकते हैं। जरूरत पड़ने पर पुलिस की मदद लें। पुलिस यदि बच्चों को गिरफ्तार करती है तो पुलिस को हर एक एंगल पर जांच करनी चाहिए। यह पता लगाना चाहिए कि बच्चे अपराध में शामिल क्यों हो रहें। इसे गंभीरता से लेना चाहिए और इसकी तह तक जाना चाहिए। - जगबीर सिंह, सेवानिवृत्त डीएसपी (क्राइम), चंडीगढ़ पुलिस