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Kerakachhar's daughter Sanju waves tricolour in Japan, wins Asian Games gold despite living in mud house.
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गांव की मिट्टी से एशियन गेम्स के गोल्ड तक: कोरबा की संजू देवी ने रचा इतिहास, ईरान के खिलाफ फाइनल में चमकीं
कोरबा के छोटे से गांव केराकछार की मिट्टी में पली-बढ़ी बेटी ने आज देश का मान बढ़ाया है। गांव की गलियों में कबड्डी खेलने वाली संजू देवी यादव ने जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है।
भारतीय महिला कबड्डी टीम की स्टार रेडर संजू देवी यादव ने फाइनल मुकाबले में ईरान के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन किया। भारत ने ईरान को हराकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया, जिसमें संजू की रेड ने अहम भूमिका निभाई। टीम इंडिया की इस ऐतिहासिक जीत में कोरबा की बेटी का योगदान पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय बन गया है।
केराकछार में आज संजू के घर में जश्न का माहौल है। उनके माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू हैं। संजू का छोटा सा कमरा आज उनकी कड़ी मेहनत की कहानी बयां कर रहा है। कमरे में सजे मेडल, ट्रॉफी और सम्मान पत्र उनकी संघर्ष से सफलता तक की यात्रा के गवाह हैं।
संजू के पिता राम जी यादव पेंटिंग और मजदूरी का काम करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी बेटी के सपनों को कम नहीं होने दिया। आज भी उनका परिवार गांव में साधारण जीवन जी रहा है, घर में पीएम आवास का निर्माण चल रहा है, लेकिन बेटी ने अपनी मेहनत से परिवार की पहचान देश भर में करा दी है।
कभी गांव के मैदान में बिना मैट के कबड्डी खेलने वाली संजू ने अपनी प्रतिभा के दम पर पहले जिला, फिर राज्य, राष्ट्रीय टीम और अब अंतरराष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया है। कोच और साथी खिलाड़ियों का कहना है कि संजू बचपन से ही फुर्तीली और जुझारू रही हैं।
संजू की इस बड़ी उपलब्धि पर पूरे गांव में बधाईयों का तारा लगा है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वयं संजू देवी को फोन कर बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि संजू ने छत्तीसगढ़ की बेटियों के लिए प्रेरणा का काम किया है।
गांव वाले बताते हैं कि संजू जब भी गांव आती है तो बच्चों को कबड्डी के टिप्स देती है। आज उसकी सफलता के बाद गांव की कई बेटियां भी कबड्डी में करियर बनाने का सपना देख रही हैं। केराकछार की इस बेटी ने साबित कर दिया है कि हौसला हो तो मिट्टी से भी सोना निकाला जा सकता है।
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