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Despite forest minister's claim of reduced conflict, tusker terror persists in Korba's Pasan range;
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CG: मंत्री कश्यप बोले- घट रहा मानव-हाथी द्वंद्व, उनके जाते ही पसान में दंतैल ने घर तोड़ा; ग्रामीणों में दहशत
छत्तीसगढ़ के वन मंत्री केदार कश्यप दो दिनों तक कोरबा जिले के प्रवास पर रहे। इस दौरान उन्होंने वन विभाग की तैयारियों और मानव-हाथी द्वंद्व को लेकर अधिकारियों से चर्चा की। मंत्री ने दावा किया कि गज संकेत एप और अन्य नवाचारों के माध्यम से लगातार मानव-हाथी द्वंद्व में कमी आ रही है और मृत्यु दर भी घटी है। शुक्रवार सुबह वे जांजगीर के लिए रवाना हो गए। लेकिन उनके रवाना होते ही जिले में हाथी के आतंक की एक और घटना ने वन विभाग के दावों पर सवाल खड़ा कर दिया।
ताजा मामला कटघोरा वन मंडल के पसान वन परिक्षेत्र के तरईनार गांव का है। शुक्रवार सुबह खाने की तलाश में भटक रहे एक दंतैल हाथी ने गांव में घुसकर उत्पात मचाया। हाथी ने सीधे तरईनार निवासी प्रकाश नायक के घर को निशाना बनाया और दीवार को तोड़ दिया। अचानक हुए हमले से घर में अफरा-तफरी मच गई। परिजन जान बचाकर दूसरे कमरे में भागे। गनीमत रही कि इस दौरान कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन घर को काफी नुकसान पहुंचा है और अनाज बिखर गया। घटना के बाद से पूरे गांव में दहशत का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि पसान क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही आम हो गई है। पिछले कई महीनों से हाथियों का दल लगातार गांवों के आसपास विचरण कर रहा है। हाथी कभी रात के अंधेरे में घरों में घुसकर तोड़फोड़ करते हैं तो कभी दिन में खेतों में लगी धान और अन्य फसलों को खाकर और पैरों से रौंदकर बर्बाद कर देते हैं। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि हाथी अचानक बिना किसी आहट के बस्ती के करीब पहुंच जाते हैं। ग्रामीणों को हर समय अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा की चिंता सताती है। रात में घर से निकलना मुश्किल हो गया है और लोग लाठी-टॉर्च लेकर पहरा देने को मजबूर हैं।
वहीं वन विभाग का हाथी गश्ती दल लगातार ग्रामीणों को सतर्क और सावधान रहने की अपील कर रहा है। मुनादी कराई जा रही है, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि आबादी से हाथियों को दूर रखने के लिए कोई ठोस और स्थायी समाधान नहीं निकाला जा रहा है। लगातार नुकसान से ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि हाथियों की निगरानी के लिए गश्त बढ़ाई जाए, प्रभावित परिवारों को तत्काल मुआवजा दिया जाए और आबादी वाले क्षेत्रों में हाथियों के प्रवेश को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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