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रुपये न मिलने से खफा जीआरपी दरोगा का बेटा फांसी पर झूला
ब्यूूराे/अमर उजाला अमराेहा
Updated Fri, 30 Oct 2015 11:57 PM IST
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परिजनों के आग्रह पर पुलिस बिना कार्रवाई के लौट गई।घटना से परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
मोहल्ला सैफी नगर निवासी इंद्रदेव सिंह जौनपुर जीआरपी थाने में दरोगा के पद पर कार्यरत हैं। सैफी नगर में उनका मकान है। जहां उनकी पत्नी चंद्रकला अपने चारों बेटों के साथ रहती है। तीसरे नंबर का बेटा साहिल कोटा में पढ़ाई कर रहा है। जबकि दूसरे नंबर का 24 वर्षीय बेटा सनी घर से चंद कदम की दूरी पर सीआई टेलीकॉम सेंटर के नाम से मोबाइल की दुकान चलाता था।
बताया जाता है कि सनी अपनी मां चंद्रकला से तीन हजार रुपये की मांग कर रहा था। मां के मना करने पर उसने पिता को मोबाइल पर बताया। पिता ने पैसे देने के लिए हां कह दी। इसके बाद सनी की परिवार में कहासुनी हो गई। दोपहर एक बजे करीब सनी दुकान पर चला गया और दुकान के दोनों शटर गिरा कर अंदर से बंद कर लिये। पीछे-पीछे सनी का बड़ा भाई हनी और छोटा भाई शुलभ भी दुकान पर पहुंच गए। शटर बंद देख सनी को समझाने लगे।
यह देख पास पड़ोस के दुकानदार भी जमा हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ देर बाद दुकान के अंदर से सनी की आवाज आनी बंद हो गई। जिससे लोगों ने शटर बजाया। कोई प्रतिक्रिया न होने पर शटर को उखाड़ने के प्रयास में जुट गए। शटर उठा कर देखा तो सभी की चीख निकल गई। सनी पंखे से झूल रहा था। गले में साड़ी का फंदा कसा हुआ था। चीख पुकार मचने लगी।
आनन-फानन में परिजनों ने पास पड़ोस के लोगों की मदद से सनी को नीचे उतारा। तब तक सनी का दम निकल चुका था। परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पाकर चौपला चौकी इंचार्ज विजय यादव मौके पर पहुंचे और घटना के बाबत पूछताछ की। परिजनों के आग्रह पर बिना कार्रवाई के पुलिस लौट गई। वहीं परिजनों ने पुलिस को बताया कि सनी दो-तीनों दिन से बीमार चल रहा था। डिप्रेशन में आकर जान गवां दी।
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मोहल्ला सैफी नगर निवासी इंद्रदेव सिंह जौनपुर जीआरपी थाने में दरोगा के पद पर कार्यरत हैं। सैफी नगर में उनका मकान है। जहां उनकी पत्नी चंद्रकला अपने चारों बेटों के साथ रहती है। तीसरे नंबर का बेटा साहिल कोटा में पढ़ाई कर रहा है। जबकि दूसरे नंबर का 24 वर्षीय बेटा सनी घर से चंद कदम की दूरी पर सीआई टेलीकॉम सेंटर के नाम से मोबाइल की दुकान चलाता था।
बताया जाता है कि सनी अपनी मां चंद्रकला से तीन हजार रुपये की मांग कर रहा था। मां के मना करने पर उसने पिता को मोबाइल पर बताया। पिता ने पैसे देने के लिए हां कह दी। इसके बाद सनी की परिवार में कहासुनी हो गई। दोपहर एक बजे करीब सनी दुकान पर चला गया और दुकान के दोनों शटर गिरा कर अंदर से बंद कर लिये। पीछे-पीछे सनी का बड़ा भाई हनी और छोटा भाई शुलभ भी दुकान पर पहुंच गए। शटर बंद देख सनी को समझाने लगे।
यह देख पास पड़ोस के दुकानदार भी जमा हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ देर बाद दुकान के अंदर से सनी की आवाज आनी बंद हो गई। जिससे लोगों ने शटर बजाया। कोई प्रतिक्रिया न होने पर शटर को उखाड़ने के प्रयास में जुट गए। शटर उठा कर देखा तो सभी की चीख निकल गई। सनी पंखे से झूल रहा था। गले में साड़ी का फंदा कसा हुआ था। चीख पुकार मचने लगी।
आनन-फानन में परिजनों ने पास पड़ोस के लोगों की मदद से सनी को नीचे उतारा। तब तक सनी का दम निकल चुका था। परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पाकर चौपला चौकी इंचार्ज विजय यादव मौके पर पहुंचे और घटना के बाबत पूछताछ की। परिजनों के आग्रह पर बिना कार्रवाई के पुलिस लौट गई। वहीं परिजनों ने पुलिस को बताया कि सनी दो-तीनों दिन से बीमार चल रहा था। डिप्रेशन में आकर जान गवां दी।