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World Thalassemia Day: थैलेसीमिया ग्रसित आठ बच्चों को ट्रांसप्लांट का इंतजार, बीएचयू में 342 बच्चे पंजीकृत
Thu, 08 May 2025 02:47 PM IST
प्रगति चंद
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।
Published by: प्रगति चंद
Updated Thu, 08 May 2025 02:47 PM IST
सार
Varanasi News: बीएचयू बाल रोग विभाग में थैलेसीमिया से ग्रसित 342 बच्चे पंजीकृत हैं। इन बच्चों को जरूरत पड़ने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी कराया जाता है।
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थैलेसीमिया
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
थैलेसीमिया से ग्रसित बच्चों का समय से इलाज बहुत जरूरी होता है। इसमें कुछ गंभीर बच्चों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट की भी जरूरत होती है। इन दिनों आईएमएस बीएचयू के बाल रोग विभाग में वाराणसी समेत आसपास के जिलों के पंजीकृत 342 बच्चों में आठ बच्चों को ट्रांसप्लांट की जरूरत है। ऐसे बच्चों के ब्लड सैंपल की जांच कराई जा रही है। उनका एम्स नई दिल्ली में इलाज करवाया जाएगा।
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थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता को लेकर हर साल 8 मई को विश्व थैलेसीमिया दिवस मनाया जाता है। बीएचयू में वाराणसी के साथ ही भदोही, चंदौली, मिर्जापुर, गाजीपुर आदि जिलों से 10 साल तक के करीब 342 बच्चों का इलाज चल रहा है। इन बच्चों को जरूरत पड़ने पर ब्लड ट्रांसफ्यूजन भी कराया जाता है।
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बीएचयू बाल रोग विभाग की थैलेसीमिया यूनिट की नोडल आफिसर प्रो. विनीता गुप्ता का कहना है कि यह एक अनुवांशिक बीमारी है। इस तरह की बीमारी में नियमित इलाज के साथ ही काउंसिलिंग भी की जाती है। हर शनिवार को थैलेसीमिया क्लीनिक चलती है। बच्चों के इलाज और जांच के साथ ही अभिभावकों की काउंसिलिंग भी की जाती है।
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बताया कि अब तक थैलेसीमिया ग्रसित दो बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट एम्स नई दिल्ली में हो चुका है। दो और बच्चों के ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा आठ ऐसे बच्चे हैं, जिनको ट्रांसप्लांट का इंतजार है। बोन मैरो की मैचिंग के बाद इनके ट्रांसप्लांट की दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।