{"_id":"5cf786c5bdec22076019f84d","slug":"world-environment-day-2019-people-help-to-save-earth-plantation-varanasi","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"विश्व पर्यावरण दिवस : मिलिए इन दो पर्यावरण प्रहरियों से, पौधे लगाकर कर रहे पृथ्वी की रक्षा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्व पर्यावरण दिवस : मिलिए इन दो पर्यावरण प्रहरियों से, पौधे लगाकर कर रहे पृथ्वी की रक्षा
Wed, 05 Jun 2019 04:24 PM IST
गीतार्जुन गौतम
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,वाराणसी
Published by: गीतार्जुन गौतम
Updated Wed, 05 Jun 2019 04:24 PM IST
विज्ञापन
पौध रोपण करते डॉ. गणेश और पीपल के पेड़ पर धागा बांधता सलातम
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस समय लोग अपने स्वार्थ के लिए एक ओर जहां हरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर रहे हैं, वहीं बड़ागांव ब्लॉक के चिलबिला गांव निवासी पर्यावरण प्रहरी डॉ गणेश प्रसाद मौर्य (75) धरती को हराभरा करने में लगे हुए हैं। तो वहीं जक्खिनी गांव के असलम पर्यावरण की रक्षा के लिए पीपल के पेड़ में लाल कपड़ा बांध कर उस पर सफेद कच्चा धागा बांधते हैं। डॉ गणेश मौर्य 1991 से लेकर अब तक 4500 से अधिक पौध रोपण कर चुके हैं।
विज्ञापन
उनके लगाए अधिकतर पौधे वृक्ष हो चुके हैं। डॉ गणेश ने बताया कि सन 1971 में स्नातक की पढ़ाई कर रोजगार के लिए मुंबई चला गया, जहां मेरा मन किसी भी काम में नहीं लग रहा था। उसी दौरान मेरी मुलाकात गायत्री परिवार के एक गुरु से हुई। मैं उनसे प्रेरित होकर शांति कुंज हरिद्वार चला आया, जहां एक महीने तक रुक कर गुरुओं के विचारों से प्रभावित हुआ। वहां की हरियाली देख कर मन में समाज कल्याण की शपथ लेकर गांव आ गया और पौधरोपण में लग गया। डॉ गणेश अब तक बरगद, पीपल, पाकड़, गूलर, नीम, आम, जामुन, कदम, अमरूद, अशोक, शीशम सहित कुल 4500 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। इन सब कार्य के साथ ही गणेश अपनी खेती-बारी भी करते हैं।
विज्ञापन
जड़ी-बूटी के भी लगाते हैं पौधे :
डॉ. गणेश अपनी नर्सरी में जड़ी-बूटी का पौधा लगाए हुए हैं। इनमें तुलसी, असगंध, गुरुच आदि में पौधे हैं। इन औषधियों को वे बीमार व्यक्तियों को नि:शुल्क देते हैं। इस लिए लोग इनको डॉक्टर के नाम से पुकारते हैं।
विज्ञापन
पर्यावरण की रक्षा के लिए असलम और सलामत पीपल में बांधते हैं धागा :
जक्खिनी गांव के असलम पर्यावरण की रक्षा के लिए पीपल के पेड़ में लाल कपड़ा बांध कर उस पर सफेद कच्चा धागा बांधते हैं। कड़ी मेहनत से कमाए पैसे वह इस कार्य में लगाते हैं। उनका कहना है कि देव वृक्ष पीपल हमें प्राणवायु देता है, इनकी आराधना करने से धरती प्रसन्न रहती है और पर्यावरण ठीक रहता है।
इसी तरह यहां के सलामत (21) भी पीपल के पेड़ में लाल धागा बांध कर उस पर सफेद कच्चा धागा बांधते हैं। उनके पिता सदीक का कहना है कि आने वाले समय में मनुष्य पर्यावरण संकट से ही जूझेगा। इसलिए हम सबको पर्यावरण के करीब रहना चाहिए। कहा कि इंसान ने मजहब के आधार पर भगवान बांट लिए हैं लेकिन प्रकृति सबके लिए मां जैसी है। सलामत यूं तो मेले में गुब्बारे आदि बेचता है, लेकिन उससे प्राप्त होने वाले पूरे पैसे को वह इसी धर्म कार्य में लगा देता है।