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काशी की महिलाएं बना रहीं रेल इंजन, हस्तशिल्प और टेक्सटाइल में भी दिखा रहीं हुनर

Sun, 08 Nov 2026 06:00 AM IST
किशन चौबे अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी
अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी Published by: किशन चौबे Updated Sun, 08 Nov 2026 06:00 AM IST
सार

वाराणसी के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में 2000 से अधिक महिलाएं काम कर रही हैं। बरेका में 335 महिलाएं रेल इंजन के तकनीकी पुर्जे तैयार कर रही हैं, जबकि बनास बीड्स में 700 और खोचवां की टेक्सटाइल इकाई में 300 महिलाएं कार्यरत हैं। चांदपुर की साड़ी फैक्ट्रियों में भी 70 फीसदी कामगार महिलाएं हैं।

 

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Women in Kashi are building railway engines while also showcasing their skills in handicrafts and textiles
वाराणसी, महिला रोजगार - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

काशी की महिलाएं अब घर की जिम्मेदारियों के साथ औद्योगिक विकास में भी अहम भूमिका निभा रही हैं। बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में रेल इंजनों के जटिल कलपुर्जे तैयार करने से लेकर कांच के मोती, बनारसी साड़ी और टेक्सटाइल उत्पादों के निर्माण तक में महिलाएं अपनी दक्षता दिखा रही हैं। जिले के 10 प्रमुख औद्योगिक प्रतिष्ठानों में 2000 से अधिक महिलाएं कार्यरत हैं। ये महिलाएं उत्पादन, तकनीकी कार्य, डिजाइनिंग, गुणवत्ता जांच और पैकेजिंग जैसी जिम्मेदारियां संभाल रही हैं।

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बरेका में रेल इंजन के पुर्जे तैयार कर रहीं 335 महिलाएं
बनारस रेल इंजन कारखाना (बरेका) में 335 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं। बरेका के जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार के मुताबिक, महिला तकनीकी कर्मचारी रेल इंजनों के लिए इलेक्ट्रिकल केबल लूम्स, वायरिंग हार्नेस और कंट्रोल सर्किट तैयार करने का काम कर रही हैं। इसमें कटिंग, क्रिम्पिंग, बाइंडिंग और असेंबलिंग जैसी तकनीकी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
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इसके अलावा महिलाएं विद्युत रेल इंजनों के अंडरफ्रेम, बोगी और बफर पार्ट्स की तकनीकी जांच, फिटिंग और असेंबली में भी योगदान दे रही हैं। हेवी इंजीनियरिंग और लोकोमोटिव मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े तकनीकी पदों पर भी महिलाएं जिम्मेदारी निभा रही हैं।
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Women in Kashi are building railway engines while also showcasing their skills in handicrafts and textiles
वाराणसी, महिला रोजगार - फोटो : Amar Ujala

बनास बीड्स में 700 महिलाओं के हाथों में हुनर
चांदपुर औद्योगिक क्षेत्र स्थित बनास बीड्स कांच के मोतियों के निर्माण और निर्यात के लिए जाना जाता है। संस्थान के अधिष्ठाता अशोक गुप्ता के अनुसार, यहां करीब 700 महिला कर्मचारी काम कर रही हैं।

महिलाएं कांच के मोतियों को आकार देने, उनमें बारीक रंग भरने, फैंसी मालाएं तैयार करने और उत्पादों की ग्रेडिंग से लेकर निर्यात के लिए पैकेजिंग तक का काम संभालती हैं। उनके कौशल से हस्तशिल्प उद्योग को मजबूती मिल रही है।

साड़ी की फैक्ट्रियों में 70 फीसदी महिलाएं
स्मॉल इंडस्ट्री एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश भाटिया के मुताबिक, चांदपुर औद्योगिक क्षेत्र की सात साड़ी फैक्ट्रियों में उत्पादन से लेकर पैकेजिंग तक की जिम्मेदारी करीब 70 फीसदी महिलाएं संभाल रही हैं। बनारसी साड़ी और टेक्सटाइल से जुड़े कामों में महिलाओं की भागीदारी लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है।
 

Women in Kashi are building railway engines while also showcasing their skills in handicrafts and textiles
वाराणसी, महिला रोजगार - फोटो : Amar Ujala

टेक्सटाइल इकाई में 300 महिलाओं को रोजगार
राजातालाब क्षेत्र के खोचवां में संचालित वस्त्र निर्माण इकाई में करीब 300 महिला कर्मचारी कार्यरत हैं। यह इकाई अंडरगारमेंट्स और अन्य टेक्सटाइल उत्पादों के निर्माण से जुड़ी है। यहां महिलाएं कटिंग, सिलाई, फिनिशिंग और डिजाइनिंग का काम कर रही हैं। इकाई में आने वाले समय में 700 और महिलाओं को रोजगार देने की तैयारी है।

इससे आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं और युवतियों को स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। उन्हें काम के लिए दूर शहरों की ओर जाने की जरूरत भी कम हो रही है।


परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहीं महिलाएं
अर्थशास्त्री प्रो. अनूप मिश्रा का कहना है कि औद्योगिक संस्थानों में महिलाओं को प्राथमिकता मिलने से जिले के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में बदलाव आ रहा है। नियमित आय से महिलाएं परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं। बच्चों की शिक्षा में निवेश बढ़ाने के साथ परिवार के फैसलों में भी उनकी भागीदारी बढ़ रही है। औद्योगिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी आत्मनिर्भरता के साथ सामाजिक बदलाव का भी संकेत है।

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