वाराणसी मौसम: नम हवाओं और बारिश ने कराया गुलाबी ठंड का अहसास, वैज्ञानिकों ने बताया अगले दो दिन का हाल
वाराणसी में रविवार सुबह धूप निकलने के बावजूद गर्मी का अहसास कम हो रहा है। मौसम में बदलाव का ही असर है कि अधिकतम तापमान में दो दिन में छह डिग्री की कमी दर्ज की गई।
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पश्चिम बंगाल में आने वाली नम हवाओं की वजह से बारिश होने के बाद अब उमस तो गायब हो गई है, गुलाबी ठंड जैसा अहसास होने लगा है। वाराणसी में रविवार सुबह धूप निकलने के बावजूद गर्मी का अहसास कम हो रहा है। शुक्रवार की तुलना में शनिवार को बारिश जरूर कम हुई, लेकिन दिन में नम हवाओं के साथ बूंदाबांदी होती रही।
मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय ने बताया कि पश्चिम बंगाल से आ रही नम हवाओं की वजह से बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इस वजह से वाराणसी समेत आसपास के जिलों में दो दिन तक ऐसे ही मौसम बने रहने की संभावना है।
दो दिन में गिरा छह डिग्री पारा
शनिवार को सुबह भी बूंदाबांदी हुई। इसके बाद दिन भर हवाएं चलती रही। मौसम में बदलाव का ही असर है कि अधिकतम तापमान में दो दिन में छह डिग्री की कमी दर्ज की गई। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 33.6 डिग्री सेल्सियस की जगह शुक्रवार को 29 डिग्री सेल्सियस रहा जबकि शनिवार को दो डिग्री सेल्सियस और कम होकर 27.7 तक पहुंच गया। इसके अलावा शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 22.4 से कम होकर शनिवार को 21.4 रिकार्ड किया गया।
बारिश में कीचड़ और कचरे से पटा शहर
मौसम में बदलाव और बारिश के बाद शहर की सड़कों और गलियों में चलना मुश्किल हो गया है। कीचड़ और कचरे के बीच लोग जैसे-तैसे आवागमन कर रहे हैं। दो दिन की बारिश में कूड़ा घरों के बाहर जमा कूड़े से बदबू आने लगी है। नगर निगम प्रशासन कूड़ा उठाने से लेेकर शहर की नियमित सफाई का दावा तो कर रहा है मगर उसके बाद भी जहां-तहां कचरा फैला हुआ है।
नगरीय सीमा से रोजाना तकरीबन 600 मीट्रिक टन कचरा निकलता है। इसके निस्तारण और सफाई के लिए 4200 सफाई कर्मियों को लगाया गया है। इसके अलावा निगरानी के लिए जोनल अधिकारी से लेकर सफाई सुपरवाइजरों की ड्यूटी लगाई जाती है।
सोनिया, मलदहिया, इंग्लिशिया लाइन, शिवाला में बने कूड़ा घरों के बाहर कचरा फैलने और बारिश से गंदे पानी के रिसाव के चलते राहगीरों को भी परेशानी उठानी पड़ी। निचले इलाकों में जगह-जगह जलभराव से भी नागरिकों को दिक्कत हुई। रानीपुर, बजरडीहा, सुंदरपुर, नेवादा, जलालीपुरा जैसे इलाकों में पानी लगने और कीचड़ से काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।