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‘मेरे मौला का जिस पे करम हो गया,
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वाराणसी। ‘छाप तिलक सब छीनी, तो से नैना मिलाई के... ‘मेरे मौला का जिस पे करम हो गया, वो सत्यम शिवम् सुंदरम हो गया’ से ईश्वर एक है का संदेश तो वहीं संत कबीर की ‘हर में हर को देखा’ जैसे गीत, कविता और कव्वालियों को जिसने सुना वो मंत्रमुग्ध हो उठा। मौका था आर्य महिला नागरमल मुरारका मॉडल स्कूल चेतगंज में स्पिक मैके के अंतर्गत प्रसिद्ध कव्वाल वारसी बंधु की प्रस्तुति का। जिसमें नजीर अहमद खान, खालीद हसन, वारीस नवाज, हमीद हुसैन, गुलाम रसूक अरसद ने मंच से कार्यक्रम में रूहानियत भर दी।
उनकी हर एक प्रस्तुति श्रोताओं को आनंदित करने के साथ ही अनेकता में एकता के सूत्र में पिरो रही थीं। विद्यालय सभागार के आंगन में सजे सूफी गीतों की महफिल में वारसी बंधुओं ने ऐसा रंग घोला कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। ‘अली मौला... को पेश किया तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। ‘बहुत कठिन है डगर पनघट की... और अल्लाह हू अल्लाह हू...’ ने तो छात्राओं के उल्लास को और बढ़ा दिया। दमादम मस्त क लंदर...के साथ वारसी बंधुओं ने विराम लिया।
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उनकी हर एक प्रस्तुति श्रोताओं को आनंदित करने के साथ ही अनेकता में एकता के सूत्र में पिरो रही थीं। विद्यालय सभागार के आंगन में सजे सूफी गीतों की महफिल में वारसी बंधुओं ने ऐसा रंग घोला कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। ‘अली मौला... को पेश किया तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। ‘बहुत कठिन है डगर पनघट की... और अल्लाह हू अल्लाह हू...’ ने तो छात्राओं के उल्लास को और बढ़ा दिया। दमादम मस्त क लंदर...के साथ वारसी बंधुओं ने विराम लिया।
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