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स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग मामलाः बनारस पुलिस करती रही ढिलाई, इलाहाबाद ने कर दी कार्रवाई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
Updated Tue, 19 Jun 2018 12:11 PM IST
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स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग
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आरजे व एंकर बनाने के नाम पर छात्र-छात्राओं से धोखाधड़ी के मामले में स्कूल ऑफ ब्रॉडकास्टिंग के संचालक साईं शेखर तिवारी सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर इलाहाबाद पुलिस ने वाराणसी पुलिस को आइना दिखा दिया है। यह भी बता दिया कि आपराधिक मामलों के आरोपियों के खिलाफ बिना किसी के दबाव पुलिस कानूनी शिकंजा कैसे कस सकती है।
पुलिस चाह ले तो आरोपी न तो भाग सकते हैं और न ही साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। तीनों आरोपी चूंकि यहां भी वांछित थे इसलिए इलाहाबाद पुलिस ने सिगरा थाने को इनके पकड़े जाने की सूचना दे दी है।
स्कूल संचालक साईं शेखर तिवारी सहित अन्य सभी आरोपियों के प्रति सिगरा थाना पुलिस का रवैया शुरू से ही उदार रहा। 20 छात्र-छात्राएं अप्रैल में शिकायत लेकर सिगरा थाने पहुंची तो थानाध्यक्ष सतीश सिंह ने सबको टरका दिया।
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पीड़ित छात्र-छात्राओं ने हिम्मत नहीं हारी और सभी तत्कालीन आईजी रेंज दीपक रतन के पास गुहार लगाने पहुंच गए। आईजी रेंज के निर्देश पर 28 अप्रैल को सिगरा थाने में तिवारी के साथ-साथ मोना जसलानी, यशार्थ दीप और प्रशांत शुक्ला के खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी, छल और धमकाने का मुकदमा दर्ज हुआ। दर्ज मुकदमे की विवेचना एसआई अरुण सिंह को सौंपी गई।
एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज का कहना है कि पिछले सप्ताह आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल हो गई है। अब पूरे मामले में ढंग से पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी।
बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि स्कूल संचालकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रहे विवेचक इलाहाबाद में गिरफ्तार आरोपियों का अदालत से वारंट बी जारी करा कर बनारस ला सकते हैं। अदालत की इजाजत से आरोपियों का बयान दर्ज किए जाएं।
यदि बयान में कोई नया तथ्य प्रकाश में आता है तो अदालत की इजाजत से मुजरिमों को कस्टडी रिमांड पर लेकर आगे की कार्रवाई करें। राय ने कहा कि मामले के अन्य पीड़ित छात्र-छात्राएं, जिन्होंने अभी तक मुकदमा दर्ज नही कराया है वो भी पुलिस को तहरीर दे सकती हैं।
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पुलिस चाह ले तो आरोपी न तो भाग सकते हैं और न ही साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ कर सकते हैं। तीनों आरोपी चूंकि यहां भी वांछित थे इसलिए इलाहाबाद पुलिस ने सिगरा थाने को इनके पकड़े जाने की सूचना दे दी है।
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स्कूल संचालक साईं शेखर तिवारी सहित अन्य सभी आरोपियों के प्रति सिगरा थाना पुलिस का रवैया शुरू से ही उदार रहा। 20 छात्र-छात्राएं अप्रैल में शिकायत लेकर सिगरा थाने पहुंची तो थानाध्यक्ष सतीश सिंह ने सबको टरका दिया।
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पीड़ित छात्र-छात्राओं ने हिम्मत नहीं हारी और सभी तत्कालीन आईजी रेंज दीपक रतन के पास गुहार लगाने पहुंच गए। आईजी रेंज के निर्देश पर 28 अप्रैल को सिगरा थाने में तिवारी के साथ-साथ मोना जसलानी, यशार्थ दीप और प्रशांत शुक्ला के खिलाफ यौन उत्पीड़न, धोखाधड़ी, छल और धमकाने का मुकदमा दर्ज हुआ। दर्ज मुकदमे की विवेचना एसआई अरुण सिंह को सौंपी गई।
एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज का कहना है कि पिछले सप्ताह आरोपियों के खिलाफ न्यायालय में चार्जशीट दाखिल हो गई है। अब पूरे मामले में ढंग से पैरवी कर आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी।
बनारस बार एसोसिएशन के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि स्कूल संचालकों के खिलाफ दर्ज मुकदमे की विवेचना कर रहे विवेचक इलाहाबाद में गिरफ्तार आरोपियों का अदालत से वारंट बी जारी करा कर बनारस ला सकते हैं। अदालत की इजाजत से आरोपियों का बयान दर्ज किए जाएं।
यदि बयान में कोई नया तथ्य प्रकाश में आता है तो अदालत की इजाजत से मुजरिमों को कस्टडी रिमांड पर लेकर आगे की कार्रवाई करें। राय ने कहा कि मामले के अन्य पीड़ित छात्र-छात्राएं, जिन्होंने अभी तक मुकदमा दर्ज नही कराया है वो भी पुलिस को तहरीर दे सकती हैं।
डेढ़ लाख रुपये लेकर दी जाती थी 75 हजार की फर्जी रसीद
पुलिस गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
भुक्तभोगी छात्रों के मुताबिक उनसे 1.5 लाख की वसूली होती थी लेकिन, 75 हजार की रसीद दी जाती थी। रसीद में भी कोई रजिस्ट्रेशन नंबर और क्रमांक दर्ज नहीं होता था। छात्रों को शुरुआत में बताया गया कि सभी को 10 माह की ट्रेनिंग कराई जाएगी। उसके बाद अलग-अलग स्थानों पर नौकरी दिलवाई जाएगी।
ऐसा कुछ होने के बजाय उल्टे कोर्स खत्म होने के बाद नौकरी के लिए रुपये मांगे गए। छात्र-छात्राओं के साथ मान्यता के नाम पर भी फरेब हुआ। संचालकों ने द नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट(निसबड) से संबद्धता की बात कही जबकि निसबड ने इससे साफ इंकार किया।
पीड़ित छात्र-छात्राओं ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि संचालकों ने हमारे और इलाहाबाद के छात्र-छात्राओं के साथ एक जैसा ही छल और धोखाधड़ी की है। इसके लिए ब्रोसर, पंफलेट, यूट्यूब आदि का सहारा स्कूल के संचालकों ने लिया। नामी रेडियो जॉकी को खुद के संस्थान का बताया।
मगर, सिगरा थाने में अधिकतम सात साल तक की सजा वाले अपराधों के आरोप में ही मुकदमा दर्ज किया गया। दरअसल, इलाहाबाद के जार्जटाउन थाने में दर्ज मुकदमे में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
छात्र-छात्राओं का कहना है कि इससे समझा जा सकता है कि सिगरा पुलिस मुकदमा दर्ज करने के दौरान ही जब आरोपियों के प्रति नरमी का रुख अख्तियार किए हुए थी तो कार्रवाई में भला हीलाहवाली क्यों नहीं करती?
ऐसा कुछ होने के बजाय उल्टे कोर्स खत्म होने के बाद नौकरी के लिए रुपये मांगे गए। छात्र-छात्राओं के साथ मान्यता के नाम पर भी फरेब हुआ। संचालकों ने द नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर इंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट(निसबड) से संबद्धता की बात कही जबकि निसबड ने इससे साफ इंकार किया।
पीड़ित छात्र-छात्राओं ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि संचालकों ने हमारे और इलाहाबाद के छात्र-छात्राओं के साथ एक जैसा ही छल और धोखाधड़ी की है। इसके लिए ब्रोसर, पंफलेट, यूट्यूब आदि का सहारा स्कूल के संचालकों ने लिया। नामी रेडियो जॉकी को खुद के संस्थान का बताया।
मगर, सिगरा थाने में अधिकतम सात साल तक की सजा वाले अपराधों के आरोप में ही मुकदमा दर्ज किया गया। दरअसल, इलाहाबाद के जार्जटाउन थाने में दर्ज मुकदमे में आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है।
छात्र-छात्राओं का कहना है कि इससे समझा जा सकता है कि सिगरा पुलिस मुकदमा दर्ज करने के दौरान ही जब आरोपियों के प्रति नरमी का रुख अख्तियार किए हुए थी तो कार्रवाई में भला हीलाहवाली क्यों नहीं करती?
आईजी के निर्देश के बाद भी आरोपियों पर मेहरबानी
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28 अप्रैल को तत्कालीन आईजी रेंज के निर्देश के बाद सिगरा थाने में स्कूल संचालकों के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज हुआ लेकिन पुलिस आरोपियों की मदद करने में लगी रही। यह इससे जाहिर है कि विवेचक अरुण सिंह तफ्तीश कर रहे और पीड़ित पक्ष थाने का चक्कर काटता रहा।
इसी बीच आरोपी साक्ष्य नष्ट करने के साथ-साथ महमूरगंज स्थित स्कूल का कार्यालय बंद कर भाग गए। इस जानकारी के बाद भी विवेचक का रवैया आरोपियों से मिलीभगत वाला ही रहा।
हाल तो यह रहा कि आला अधिकारियों की जानकारी में होने और उनके निर्देश के बावजूद एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज भी हर बार मामले को देखने की ही बात कहते रहे। माना जा रहा है कि पुलिस विभाग आरोपियों द्वारा नेताओं-मंत्रियों तक बताई गई ऊंची पहुंच के कारण दबाव में आ गई थी।
आरोपियों पर कार्रवाई के संबंध में जब भी पीड़ित छात्र-छात्राएं विवेचक से पूछते थे, तो वह कहते हैं कि क्या हम दूरबीन लगाए बैठे हैं जो देख लें कि कौन-कहां हैं और क्या कर रहा है। विवेचक के इस रवैये से आहत छात्र-छात्राओं ने उनसे कुछ कहना-पूछना ही छोड़ दिया।
रविवार को जब विवेचक को बताया गया कि इलाहाबाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और आपने अब तक क्या किया? वह कुछ भी कहने से बचते रहे।
इसी बीच आरोपी साक्ष्य नष्ट करने के साथ-साथ महमूरगंज स्थित स्कूल का कार्यालय बंद कर भाग गए। इस जानकारी के बाद भी विवेचक का रवैया आरोपियों से मिलीभगत वाला ही रहा।
हाल तो यह रहा कि आला अधिकारियों की जानकारी में होने और उनके निर्देश के बावजूद एसएसपी राम कृष्ण भारद्वाज भी हर बार मामले को देखने की ही बात कहते रहे। माना जा रहा है कि पुलिस विभाग आरोपियों द्वारा नेताओं-मंत्रियों तक बताई गई ऊंची पहुंच के कारण दबाव में आ गई थी।
आरोपियों पर कार्रवाई के संबंध में जब भी पीड़ित छात्र-छात्राएं विवेचक से पूछते थे, तो वह कहते हैं कि क्या हम दूरबीन लगाए बैठे हैं जो देख लें कि कौन-कहां हैं और क्या कर रहा है। विवेचक के इस रवैये से आहत छात्र-छात्राओं ने उनसे कुछ कहना-पूछना ही छोड़ दिया।
रविवार को जब विवेचक को बताया गया कि इलाहाबाद पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया और आपने अब तक क्या किया? वह कुछ भी कहने से बचते रहे।