Varanasi News : मोहन-सात्विक ने सजाया विश्वशांति का राग विश्वरंजनी, वीणा वादन पर करतल ध्वनि बने सैकड़ों हाथ
लिट फेस्ट के तीसरे आयोजन में नामचीन कलाकारों ने शानदार पेशकश की। उनके प्रदर्शन पर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। शब्द फाउंडेशन के माध्यम से साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की सराहना की गई।
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विश्व शांति की कामना से लिट फेस्ट के तीसरे संस्करण में ग्रैमी अवार्डी व पद्मभूषण पं. विश्वमोहन भट्ट और सात्विक की वीणा पर राग विश्वरंजनी की अवतारणा हुई। यहां पद्मभूषण विश्वमोहन भट्ट ने अपने पुत्र सलिल भट्ट के साथ मंच संभाला।
वीणा पर सधे हुए हाथों की प्रस्तुतियों ने साहित्य से संवरे वातावरण में नई ऊर्जा प्रवाहित कर दी। सात्विक वीणा पर सलिल भट्ट ने सुयोग्य शिष्य होने का प्रमाण दिया। पं. विश्वमोहन भट्ट ने वादन की शुरुआत कर्नाटक स्केल पर आधारित स्वरचित राग विश्वरंजनी से की।
दो रागों- मधुवंती और शिवरंजनी के मेल से तैयार इस राग ने अपने नाम के अनुरूप श्रोताओं पर मोहिनी सा प्रभाव छोड़ा। तबले पर कोलकाता से आए ज्योतिर्मय ने वीणा के तारों के साथ गति बनाए रखी। इसके बाद डीपीएस की दो छात्रा वृंदा सुरेखा व यशस्वनी सुरेखा ने भरतनाट्यम की प्रभावपूर्ण प्रस्तुति दी। उन्होंने भाव-भंगिमाओं से पूरित नृत्य में शिव तांडव... को प्रवाहपूर्ण पिरोया।
उधर, संगम महाविद्यालय के कलाकारों ने कुटुंब एनजीओ की 10वीं प्रस्तुति के तहत अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर आधारित भावपूर्ण नाट्य व नृत्य प्रस्तुति दी। उमेश भाटिया के निर्देशन में हुई प्रस्तुति ने देवी अहिल्याबाई के असाधारण जीवन और उनके योगदान को जीवंत कर दिया।
बिछड़ चुके हैं कब के खुद हमीं से हम...
लिट फेस्ट में कविता पाठ, गजल, मोनो एक्ट और योग का आयोजन हुआ। हुनर के सरताज मंच पर आयोजित कार्यक्रम में काशी विद्यापीठ के छात्र जयंत मौर्य ने योग प्रदर्शन से सभी को प्रभावित किया, जबकि ईशा सिंह ने शेक्सपियर के नाटक से क्लियोपैट्रा का मोनोएक्ट प्रस्तुत कर सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
अगली प्रस्तुति में गजल पाठ के दौरान मंडल मिश्र, अमन भदौरिया और रोशनी गुप्ता ने अपनी शायरी से जादू बिखेरा। अमन भदौरिया की गजल बिछड़ चुके हैं कब के खुद हमीं से हम, बचे हुए हैं बस ये शायरी से हम... ने सभी को भावविभोर कर दिया।
राजन शुक्ला की कविता पर दर्शक झूम उठे, जबकि मयंक बनारसी ने काशी पर अपनी कविता से सबका दिल जीत लिया। लखनऊ से आए अनुराग त्रिपाठी ने अपनी किताब के तीन दृश्यों का पाठ किया और शब्द फाउंडेशन के माध्यम से साहित्य के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान की सराहना की गई।